महाराष्ट्र में NCC के पास अपनी अकादमी नहीं, 40 से 60 फीसदी प्रशासकीय पद खाली
राज्य में करीब डेढ़ लाख छात्र और सात गट होने के बावजूद हर गट के लिए अलग प्रशिक्षण अकादमी नहीं है। पुणे गट के करीब 20 हजार छात्र स्कूल-कॉलेजों की जगह पर निर्भर हैं।
महाराष्ट्र में राष्ट्रीय छात्र सेना (एनसीसी) का दायरा तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन उसके लिए जरूरी इमारतें, सुविधाएं और स्टाफ अब भी कम पड़ रहे हैं। राज्य में करीब डेढ़ लाख छात्र हैं, सात गट हैं और अढ़ाई हजार से ज्यादा स्कूल-कॉलेज एनसीसी से जुड़े हैं। फिर भी हर गट के लिए अलग प्रशिक्षण अकादमी नहीं है।
पुणे गट के करीब 20 हजार छात्रों को ट्रेनिंग के लिए स्कूल-कॉलेजों में जो जगह मिल जाए, उसी पर निर्भर रहना पड़ता है। ऊपर से गट और यूनिट स्तर के 40 से 60 फीसदी प्रशासकीय पद खाली पड़े हैं। यानी एनसीसी के विस्तार के सामने दोहरी मुश्किल खड़ी है।
एनसीसी के महासंचालक लेफ्टिनंट जनरल वीरेंद्र वत्स बुधवार (30 तारीख) को पुणे गट के मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने ट्रेनिंग, स्टाफ और बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया। इसके बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश में एनसीसी का दायरा जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, उसके मुकाबले ट्रेनिंग की सुविधाएं कम हैं। महाराष्ट्र संचालनालय के अतिरिक्त महासंचालक मेजर जनरल विवेक त्यागी भी इस मौके पर मौजूद थे।
'विकसित भारत 2047' की पृष्ठभूमि में एनसीसी की ट्रेनिंग का स्वरूप भी बदल रहा है। पुरानी कवायत और शारीरिक ट्रेनिंग के साथ अब साइबर सुरक्षा, ड्रोन तकनीक, व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व, चिकित्सक विचार और आपदा प्रबंधन जैसे हुनर पर जोर है। मगर इसके लिए जरूरी प्रयोगशालाएं, ट्रेनिंग कक्ष और स्थायी सुविधाएं नहीं हैं, इसलिए विस्तार की एक सीमा बन गई है।
लेफ्टिनंट जनरल वत्स ने बताया कि पुणे गट में करीब 20 हजार छात्र हैं और उनके लिए अलग अकादमी नहीं है। इसलिए जगह की उपलब्धता के हिसाब से स्कूल या कॉलेज के परिसर में शिविर लगाने पड़ते हैं। नतीजा यह कि एक ही जगह पर लगातार ट्रेनिंग की सुविधा खड़ी नहीं हो पाती। देश में एनसीसी के 102 गट हैं और हर गट के लिए अलग अकादमी जरूरी है। एक अकादमी के लिए मोटे तौर पर 10 से 15 एकड़ जमीन चाहिए। उसमें रहने की व्यवस्था, क्लासरूम, कवायत का मैदान, शारीरिक ट्रेनिंग की सुविधा, ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर और साइबर लैब बन सकती है। वत्स के मुताबिक महाराष्ट्र के लिए जरूरी जमीन देने के बारे में राज्य सरकार से बातचीत चल रही है।
मेजर जनरल विवेक त्यागी ने साफ किया कि महाराष्ट्र में एनसीसी के सात गट काम कर रहे हैं, इसलिए हर गट के लिए अलग ट्रेनिंग अकादमी होनी चाहिए। छत्रपति संभाजीनगर में राज्य की पहली एनसीसी अकादमी का उद्घाटन पिछले साल हुआ है। लेकिन फंड और जरूरी सुविधाएं मिलने के बाद ही वह पूरी क्षमता से चालू होगी। उम्मीद है कि अगले दो साल में वह शुरू हो जाएगी।
छत्रपति संभाजीनगर, पुणे और मुंबई में साइबर डिफेंडर कोर्स शुरू किए जा चुके हैं। नागपुर और मुंबई में ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर बनाए जा रहे हैं। इस नई ट्रेनिंग के लिए अलग प्रयोगशाला, उपकरण और ट्रेनिंग कक्ष चाहिए, इसलिए अकादमियों का होना और अहम हो जाता है।
प्रशासकीय ढांचे पर भी बोझ है। राज्य में गट और यूनिट स्तर के 40 से 60 फीसदी पद खाली हैं। एनसीसी का काम करीब डेढ़ लाख छात्रों, अढ़ाई हजार स्कूल-कॉलेजों और 36 जिलों में चलता है। ट्रेनर के साथ क्लर्क, ड्राइवर और दूसरे प्रशासकीय कर्मचारी भी चाहिए। त्यागी ने बताया कि स्थायी भर्ती लंबे समय से नहीं हुई है और कई जगह कर्मचारी कॉन्ट्रैक्ट पर रखे जा रहे हैं। कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की नियुक्ति के नवीनीकरण के लिए भी बार-बार प्रशासकीय पीछा करना पड़ता है।
सेना, नौसेना और वायुसेना के करीब 140 से 150 वरिष्ठ अधिकारी एनसीसी में काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी मदद के लिए प्रशासकीय स्टाफ कम है। गट और यूनिट स्तर के कर्मचारी, फंड और प्रशासकीय मामले राज्य सरकार के अधिकार में आते हैं। इसलिए छात्रों की संख्या बढ़ने के साथ उसी अनुपात में ट्रेनिंग की सुविधाएं और स्टाफ मुहैया कराना राज्य के सामने बड़ी चुनौती है।