लाडकी बहीण योजना: सरकारी नौकरी वाले परिवारों और पुरुषों से होगी रकम की वसूली
ई-केवाईसी जांच में अपात्र लाभार्थी सामने आए, सोलापुर में 1907 और 78 पुरुष।
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राज्य सरकार की बहुचर्चित 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण' योजना को पारदर्शी बनाने और अपात्र लोगों को रोकने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। ई-केवाईसी (e-KYC) की पड़ताल के दौरान कई जगह नियम तोड़कर योजना का फायदा लिए जाने की बात सामने आई है। इसमें सरकारी नौकरी वाले परिवारों के साथ कुछ पुरुष भी शामिल पाए गए हैं। ऐसे संदिग्ध अपात्र लाभार्थियों ने अब तक जो पैसे लिए हैं, उनकी वसूली की जाएगी।
महिला व बालविकास विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक महाआईटी (MahaIT) और ई-केवाईसी की जांच में सोलापुर जिले से बड़ी गड़बड़ियां खुली हैं। अकेले सोलापुर जिले में 1907 ऐसे लाभार्थी मिले हैं, जो खुद या जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी सेवा में है। इसके अलावा नियमों को ताक पर रखकर 78 पुरुषों ने भी इस योजना के लिए आवेदन किया और लाभ लिया, यह बात भी सामने आई है।
इन सभी संदिग्धों की 63 पन्नों की पूरी सूची महिला व बालविकास विभाग के सचिव ने सोलापुर के जिलाधिकारी और जिला महिला व बालविकास अधिकारी को सौंप दी है। सूत्रों ने बताया है कि सिर्फ सोलापुर ही नहीं, राज्य के बाकी जिलों के ऐसे संदिग्ध लाभार्थियों की सूचियां भी संबंधित जिलाधिकारियों के पास भेजी गई हैं।
फिलहाल इन सभी संदिग्ध लाभार्थियों का आर्थिक लाभ कुछ समय के लिए रोक दिया गया है। जिला प्रशासन आंगनवाड़ी सेविकाओं के जरिए मामले की मौके पर जाकर आखिरी जांच करवा रहा है। सिर्फ रिकॉर्ड में नाम आने या शक के आधार पर किसी को सीधे अपात्र नहीं ठहराया जाएगा। लेकिन जांच के बाद जो लाभार्थी सचमुच अपात्र निकलेंगे, उन्होंने अब तक इस योजना से जितनी भी रकम ली है, वह सरकार वसूल करेगी।
यह योजना महिलाओं की आर्थिक आजादी को मजबूत करने और उनकी सेहत व पोषण में सुधार लाने के मकसद से शुरू की गई थी। अब सरकार इस बात को लेकर ज्यादा चौकस हो गई है कि इस कल्याणकारी योजना का फायदा मानदंडों के हिसाब से सिर्फ पात्र महिलाओं को ही मिले, और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जा रही है।
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