कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो तो पौर्णिमा पर करें ये उपाय, मिलेगी मानसिक शांति
भाद्रपद पौर्णिमा पर चंद्रमा को मजबूत करने के लिए ज्योतिष में बताए गए उपाय, कमजोर चंद्रमा के लक्षण और शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं, जानिए पूरी बात।
ज्योतिष में चंद्रमा को मन, माता और पानी का कारक माना जाता है। कुंडली में चंद्रमा मजबूत हो तो जिंदगी में शांति और खुशी बनी रहती है, लेकिन चंद्रमा कमजोर या पीडित हो तो मन में तनाव घर कर जाता है। ऐसे में कई बार लोग कमजोर चंद्रमा के लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह जानना जरूरी है कि आपकी कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत है या कमजोर।
इस बार भाद्रपद पौर्णिमा शनिवार, 26 सितंबर को है। इस दिन शाम के वक्त चंद्रमा की पूजा करना और दूध, चावल जैसी सफेद चीजों का दान करना खास माना जाता है। इसके अगले दिन यानी रविवार, 27 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत होने जा रही है। जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर है, वे भाद्रपद पौर्णिमा पर कुछ उपाय करके चंद्रमा की स्थिति को मजबूत कर सकते हैं।
पौर्णिमा तिथि की शुरुआत 25 सितंबर की रात 11 बजकर 6 मिनट से हो गई है और यह तिथि 26 सितंबर की रात 10 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। चंद्रोदय का समय शाम करीब 5 बजकर 25 मिनट से 6 बजकर 9 मिनट के बीच रहने वाला है। इसी दौरान अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक रहेगा, जबकि सत्यनारायण पूजा का समय सुबह 7 बजकर 42 मिनट से 9 बजकर 12 मिनट तक बताया गया है।
अगर कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो तो इंसान को मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक स्तर पर कई तरह के लक्षण झेलने पड़ते हैं। जैसे छोटी-छोटी बातों को लेकर ज्यादा सोचना और लगातार तनाव में रहना, बिना किसी वजह के मूड बदलना, चिड़चिड़ापन और उदासी छा जाना। इसके अलावा फैसले लेने में मुश्किल होना, हर वक्त डर या चिंता बने रहना, याददाश्त कमजोर होना यानी बातें लंबे समय तक याद न रखना, रात में बार-बार नींद खुलना, अनिद्रा या बुरे सपने आना, बार-बार सर्दी-खांसी होना या फेफड़ों से जुड़ी दिक्कतें होना और मां के साथ रिश्ते में खटास या मां की सेहत में गिरावट भी चंद्रमा कमजोर होने के लक्षणों में शामिल हैं।
पौर्णिमा के दिन चंद्रमा की पूजा और कुछ खास विधियां करने से कुंडली का चंद्रमा मजबूत होता है और मन को शांति मिलती है। पौर्णिमा की रात चंद्रोदय के वक्त तांबे या पीतल के बर्तन में पानी, कच्चा दूध, गंगाजल, सफेद चंदन और सफेद फूल मिलाकर चंद्रमा को तीन बार जल चढ़ाएं। अर्घ्य देते वक्त या पूजा के बाद "ओम सोम सोमय नमः" या चंद्र बीज मंत्र "ओम श्राम श्रीं श्राम सह चंद्रमसे नमः" का जाप करें।
पौर्णिमा के दिन सुबह शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर पानी के साथ चीनी, चावल और दूध जैसी सफेद चीजें चढ़ाएं। ज्योतिष के हिसाब से चांदी का ब्रेसलेट, अंगूठी या चेन पहनने से भी चंद्रमा की ताकत बढ़ती है। पौर्णिमा की रात बनी खीर को कुछ देर चांद की रोशनी में रखें और फिर उसे प्रसाद के तौर पर खाएं। हर पौर्णिमा पर जरूरतमंदों को दूध, चावल, चीनी जैसी सफेद चीजें या सफेद कपड़े दान करना भी अच्छा माना गया है। ज्योतिषी से सलाह लेने के बाद चांदी की अंगूठी में मोती पहना जा सकता है।
कुंडली के चंद्रमा को मजबूत करने के लिए शिवलिंग पर नियमित रूप से, खासकर सोमवार के दिन शुद्ध कच्चा दूध और पानी चढ़ाना चाहिए। ज्योतिष के मुताबिक चंद्रमा भगवान शिव के मस्तक पर बसा हुआ है, इसलिए शिवलिंग की पूजा करने से चंद्रमा के दोष दूर होते हैं।