मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:00 IST

कौन जिएगा कौन मरेगा... यह तय करता है इजराइल का यह छोटा कंप्यूटर, 'नाझा' डॉक्यूमेंट्री में खुलासा

वेनिस फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई 'नाझा' डॉक्यूमेंट्री में इजराइल की दो गुप्त एआई सिस्टम लैवेंडर और व्हेयर्स डैडी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है।

कौन जिएगा कौन मरेगा... यह तय करता है इजराइल का यह छोटा कंप्यूटर, 'नाझा' डॉक्यूमेंट्री में खुलासा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

आजकल एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल पढ़ाई, इलाज, बिजनेस, आईटी और रिसर्च में तेजी से बढ़ रहा है। जो टेक्नोलॉजी इंसान की जिंदगी आसान बनाने के लिए बनाई गई थी, वही अब जंग के मैदान में सीधे किसी के जीने-मरने का फैसला लेने लगी है। अब सिर्फ बंदूकें, मिसाइलें, विमान और सैनिक ही जंग नहीं लड़ रहे, बल्कि कंप्यूटर के अल्गोरिदम और एआई सेना को यह आदेश दे रहे हैं कि किसे मारना है और किसे छोड़ना है।

हाल ही में हुए वेनिस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इजराइल-गाजा युद्ध पर बनी 'नाझा' नाम की डॉक्यूमेंट्री का प्रीमियर हुआ। इस डॉक्यूमेंट्री के रिलीज होने के बाद दुनियाभर में, खासकर ग्लोबल लेवल पर, गुस्से की बड़ी लहर उठी है। सवाल यह उठ रहा है कि टेक्नोलॉजी इतनी बेरहमी से इंसान की जिंदगी और मौत का फैसला कैसे ले सकती है। इस डॉक्यूमेंट्री में यह दिखाया गया है कि इजराइली सेना ने जंग के दौरान लोगों को ढूंढने और उन्हें निशाना बनाकर मारने के लिए एआई टेक्नोलॉजी का किस तरह इस्तेमाल किया।

'नाझा' डॉक्यूमेंट्री बनाते वक्त इजराइली डिफेंस फोर्स यानी आईडीएफ और खुफिया विभाग के 24 अलग-अलग सूत्रों का हवाला दिया गया है। सुरक्षा कारणों से इन सूत्रों के नाम गुप्त रखे गए हैं, लेकिन इनकी गहरी बातचीत और जांच से इजराइल की दो बेहद ताकतवर और गुप्त एआई सिस्टम दुनिया के सामने आई हैं। डॉक्यूमेंट्री में दावा किया गया है कि गाजा युद्ध के दौरान इन दोनों सिस्टम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ।

पहली सिस्टम है लैवेंडर, जो गाजा के फोन डेटा, मैसेज और लोगों की संदिग्ध हरकतों का विश्लेषण करके 'आतंकवादी' और सैन्य टारगेट की एक अपने आप बनने वाली लिस्ट तैयार करती थी। दूसरी सिस्टम है व्हेयर्स डैडी, जो लैवेंडर द्वारा चुने गए संदिग्ध लोगों पर 24 घंटे नजर रखती थी। यह सिस्टम बताती थी कि वह शख्स कब अपने घर परिवार के पास पहुंचता है, और इसका रियल-टाइम अलर्ट इजराइली सैन्य ऑपरेटरों को भेजा जाता था।

डॉक्यूमेंट्री में बातचीत करने वाले एक पूर्व इजराइली सैन्य अधिकारी ने चौंकाने वाली जानकारी दी। युद्ध के शुरुआती महीनों में ही लैवेंडर सिस्टम ने करीब 37,000 संभावित संदिग्धों की टारगेट लिस्ट तैयार कर ली थी। 7 अक्टूबर की घटना से पहले हमास के कार्यकर्ताओं के फोन, उनकी बातचीत और रोज की हरकतों के डेटा पर इस एआई को ट्रेन किया गया था। इसके बाद पूरे गाजा इलाके का फोन डेटा स्कैन करके एआई ने खुद ही यह लिस्ट बना डाली।

डॉक्यूमेंट्री के दावे के मुताबिक, इजराइली सैन्य ऑपरेटर एआई सिस्टम से चुने गए टारगेट को आखिरी मंजूरी देने से पहले इंसानी लेवल पर जांच करते थे। लेकिन असल में हर टारगेट की जांच के लिए एक ऑपरेटर को सिर्फ 20 सेकंड दिए जाते थे। इतने कम वक्त में एआई का फैसला सही है या गलत, यह पता लगाना नामुमकिन था, इसलिए ऑपरेटर आंख मूंदकर एआई के फैसले पर मुहर लगा देते थे। इसी वजह से कई बेगुनाह लोग, महिलाएं और छोटे बच्चे एआई के गलत विश्लेषण की वजह से मारे गए, ऐसा आरोप इस डॉक्यूमेंट्री में लगाया गया है।

इस चौंकाने वाली डॉक्यूमेंट्री के बाद इजराइली डिफेंस फोर्स यानी आईडीएफ ने ये सारे दावे पूरी तरह से खारिज कर दिए हैं। एक सीनियर सैन्य अधिकारी ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री में दिखाई गई जानकारी बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई है और इससे सेना की गलत छवि बनती है। हालांकि उन्होंने आधुनिक युद्ध में एआई और एडवांस कंप्यूटर टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को पूरी तरह नकारा नहीं है। इजराइली सेना का दावा है कि किसी भी हवाई हमले या कार्रवाई को आखिरी मंजूरी देने से पहले सैन्य अधिकारी असली हालात, आसपास मौजूद आम नागरिक, जान जाने की आशंका और सैन्य मकसद, इन सभी बातों की बारीकी से जांच करते हैं।

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