कर्मवीर भाऊराव पाटील: गांव-गांव तक शिक्षा पहुंचाने वाले रयत शिक्षण संस्था के संस्थापक की कहानी
ग्रामीण महाराष्ट्र में शिक्षा की अलख जगाने वाले कर्मवीर भाऊराव पाटील की जिंदगी और उनके काम की कहानी।
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कर्मवीर भाऊराव पाटील को महाराष्ट्र में वो इंसान माना जाता है जिन्होंने शिक्षा का दिया घर-घर तक पहुंचाया, खासकर गांव के इलाकों में। बहुजन समाज को इज्जत के साथ जीने का रास्ता दिखाने वाले इस बड़े विचारक का जन्म 22 सितंबर 1887 को कोल्हापुर के कुंभोज गांव में हुआ था। लोग उन्हें प्यार से अण्णा कहते थे। पूरी जिंदगी उन्होंने गलत सामाजिक रिवाजों, छुआछूत और असमानता के खिलाफ लड़ाई लड़ी। राजर्षी छत्रपती शाहू महाराज और महात्मा जोतीराव फुले के विचारों का उन पर गहरा असर था।
भाऊराव की सामाजिक और शैक्षणिक क्रांति की नींव 1919 में बनी, जब उन्होंने रयत शिक्षण संस्था की शुरुआत की। उन्होंने कमाओ और सीखो का एक अनोखा तरीका अपनाया, जिससे गरीब और जरूरतमंद बच्चे भी पढ़ाई के मुख्य दायरे में आ सके। 1924 में सातारा में उन्होंने एक हॉस्टल बनाया, जिसका नाम महात्मा गांधी ने खुद राजर्षी छत्रपती शाहू महाराज बोर्डिंग रखा। अण्णा ने सिर्फ स्कूल और कॉलेज ही नहीं खोले, बल्कि पहाड़ी और सूखाग्रस्त इलाकों में सैकड़ों स्वयंस्फूर्त स्कूल शुरू करके शिक्षा को सबसे निचले तबके तक पहुंचाया। सातारा का छत्रपती शिवाजी महाविद्यालय ग्रामीण इलाके का पहला कॉलेज बना।
इस बड़े काम में उनकी पत्नी लक्ष्मीबाई पाटील, जिन्हें वहिनी कहा जाता था, का त्याग भी कम नहीं था। हॉस्टल में रहने वाले अलग-अलग जाति-धर्म के बच्चों के खाने का खर्च चलाने के लिए उन्होंने अपने सोने के गहने और यहां तक कि मंगलसूत्र भी बेच दिया था।
शिक्षा के काम के साथ-साथ अण्णा सामाजिक आंदोलनों में भी सबसे आगे रहते थे। सत्यशोधक समाज, हरिजन सेवक संघ, डिप्रेस्ड क्लास मिशन और श्री गाडगे महाराज मिशन जैसी संस्थाओं के जरिए उन्होंने छुआछूत मिटाने और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए काम किया। मजदूरों के हक और गांव के विकास के लिए भी वो हमेशा पहल करते रहे। महात्मा गांधी की सादगी से प्रभावित होकर उन्होंने पूरी जिंदगी खादी ही पहनी।
उनके इस बेमिसाल योगदान के लिए पुणे विश्वविद्यालय ने उन्हें डी.लिट. की उपाधि दी और भारत सरकार ने पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया। लेकिन जनता ने उन्हें जो कर्मवीर की उपाधि दी, वही उनके काम की असली पहचान है। आज रयत शिक्षण संस्था के रूप में कर्मवीर भाऊराव पाटील के विचार और उनका शैक्षणिक काम लगातार समाज को दिशा दिखाने का काम कर रहा है।