करंजी से गडचिरोली और राजनीति तक: वडेट्टीवार परिवार का सफर और समाजसेवा
गोंडपिपरी तालुका के करंजी गांव से जुड़े वडेट्टीवार परिवार की राजनीतिक विरासत, संघर्ष और सामाजिक कामों की चर्चा हो रही है।
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गोंडपिपरी तालुका का करंजी गांव राजनीतिक रूप से संवेदनशील और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाला गांव माना जाता है। गांव ने कई राजनीतिक घटनाक्रम देखे हैं और वडेट्टीवार परिवार का इस गांव से रिश्ता आज भी लगाव भरा माना जाता है। राजनीतिक विरासत, संघर्ष भरा जीवन, मुश्किल हालात से उबरकर खड़ा किया गया सब कुछ और जरूरतमंदों की मदद की परंपरा, इन सब वजहों से इस परिवार का सफर चर्चा में है।
नामदेवराव वडेट्टीवार का जन्म करंजी में हुआ था। 1972 में जब वे करंजी के सरपंच थे, तभी उनका निधन हो गया। इसके बाद उनके बेटे विलास वडेट्टीवार ने भी गांव की राजनीति में हिस्सा लिया और उपसरपंच की जिम्मेदारी संभाली। यानी वडेट्टीवार परिवार का करंजी से नाता सिर्फ जन्मस्थान तक सीमित नहीं है, उसके पीछे राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि भी है।
समय के साथ परिवार पर आर्थिक संकट आया। हालात बहुत खराब हो गए तो गांव छोड़ने की नौबत आ गई। रिश्तेदारों की मदद से परिवार गडचिरोली पहुंचा। नई जगह पर गृहस्थी बसाना, आर्थिक मुश्किलों से जूझना और जिंदगी को स्थिरता देना आसान सफर नहीं था। शुरुआत में कई संकटों का सामना करना पड़ा। फिर भी जिद, मेहनत और डटे रहने के दम पर छोटे व्यवसाय से गृहस्थी धीरे-धीरे पटरी पर आने लगी।
प्रतिकूल हालात से लड़ते हुए आगे बढ़ने का यह सफर परिवार की जिंदगी का अहम पड़ाव बना। आगे चलकर विजय वडेट्टीवार ने राजनीति में कदम रखा। स्थानीय राजनीति से व्यापक राजनीतिक क्षेत्र तक पहुंचते हुए उन्होंने विधायक और मंत्री के तौर पर जिम्मेदारियां निभाईं। राज्य की राजनीति के अहम नेताओं में उन्होंने अपनी जगह बनाई।
एक तरफ आर्थिक तंगी से जूझता परिवार और दूसरी तरफ राजनीति में मिली कामयाबी, इस सफर से हालात बदलने के लिए जरूरी जिद साफ दिखती है। परिवार के सफर में करंजी की मिट्टी से रिश्ता और अपने मूल गांव के प्रति लगाव भी एक भावनात्मक पहलू माना जाता है।
स्थानीय स्तर पर बताया जाता है कि राजनीति के साथ-साथ वडेट्टीवार परिवार सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की कोशिश भी करता है। जानकारी है कि किशोर भाई वडेट्टीवार और उनकी पत्नी गीता वडेट्टीवार के जरिए गरीब, बेसहारा और जरूरतमंद लोगों की मदद का काम किया जाता है।
बताया गया है कि समाजसेवा की रुचि और वंचित तबके के प्रति संवेदना की वजह से यह परिवार अलग-अलग मौकों पर मदद के लिए आगे आता है। संकट के समय जरूरतमंदों के साथ खड़े होना, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद करना और सामाजिक कार्यक्रमों में सहयोग देना, इसी के जरिए सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की कोशिश की जाती है।
कहा जाता है कि आदिवासी समाज के बच्चों की शिक्षा और सर्वांगीण विकास को बढ़ावा मिले, इसके लिए किशोर वडेट्टीवार के जरिए अलग-अलग पहलों को प्रोत्साहन दिया जाता है। शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और वंचित तबके के सवालों की ओर ध्यान खींचने को खास अहमियत दी गई है।
समाज में वैचारिक जागरूकता लाने के लिए जागरण के कार्यक्रम भी अहम हैं। अंजली भारती और अनिरुद्ध वनकर के जरिए जागरण के कार्यक्रम आयोजित कर सामाजिक सवालों पर जनजागरण की कोशिश की जाती है। ऐसे कार्यक्रमों से समाज के अलग-अलग तबकों में जागरूकता बढ़ने में मदद मिलती है।
किशोर वडेट्टीवार का जन्म करंजी में हुआ, जबकि उनकी पत्नी गीता वडेट्टीवार का जन्म गोंडपिपरी तालुका के पानोरा में हुआ। दोनों की पढ़ाई ग्रेजुएशन तक पूरी हो चुकी है। जन्मभूमि और आसपास के इलाके से इस रिश्ते की वजह से गोंडपिपरी तालुका के लोगों के प्रति उन्हें खास लगाव है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक करंजी गांव पर कोई प्राकृतिक आपदा आई हो, बाढ़ के हालात बने हों या हादसे में लोग घायल हुए हों, ऐसे संकट के मौकों पर वडेट्टीवार परिवार की तरफ से मदद का हाथ बढ़ाया जाता है। खासकर गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को संकट में सहारा देना इस परिवार के सामाजिक काम का अहम हिस्सा माना जाता है।
करंजी जैसे गांव से शुरू हुआ यह जीवन सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा है। सरपंच पद से शुरू हुई राजनीतिक पृष्ठभूमि, आर्थिक संकट की वजह से गांव छोड़ने की नौबत, गडचिरोली में नए सिरे से गृहस्थी बसाने का संघर्ष और आगे चलकर राज्य की राजनीति में हासिल मुकाम, इन सभी पड़ावों से वडेट्टीवार परिवार का सफर आगे बढ़ा।
राजनीति में कामयाबी एक पहलू है, लेकिन जरूरतमंदों की दिक्कतें समझना और उनकी मदद के लिए आगे आना सामाजिक नेतृत्व का एक और अहम हिस्सा है। इसी पृष्ठभूमि में वडेट्टीवार परिवार के सामाजिक कामों और करंजी समेत गोंडपिपरी तालुका से उनके लगाव भरे रिश्ते की चर्चा हो रही है।