काँगो में इबोला बेकाबू: 8,067 मरीज, 3,901 की मौत, स्वास्थ्यकर्मियों की भी कमी
WHO ने इबोला को अंतरराष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया है, फिर भी काँगो में 26 सितंबर तक 8,067 मामले और 3,901 मौतें दर्ज हुईं।
काँगो में इबोला का प्रकोप काबू से बाहर जाता दिख रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पहले ही इबोला की इस महामारी को अंतरराष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर चुका है। इसके बावजूद काँगो में हालात संभल नहीं रहे हैं।
26 सितंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक देश में इस बीमारी के 8,067 मामले और 3,901 मौतें दर्ज हुई हैं। ये आंकड़े देश के 26 प्रांतों में से सात प्रांतों के 63 स्वास्थ्य क्षेत्रों के हैं। इसका मतलब यह निकलता है कि हर 100 संक्रमित लोगों में से 48 से ज्यादा की जान जा रही है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस बीमारी से लड़ने के लिए काँगो में अब स्वास्थ्यकर्मियों की कमी पड़ रही है।
काँगो में इबोला का यह 17वां और अब तक का सबसे जानलेवा प्रकोप है। यह बुंदीबुग्यो वायरस से फैलता है, जिसका अभी तक कोई मान्यता प्राप्त इलाज या टीका मौजूद नहीं है। WHO के मुताबिक बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ रहे हैं। इससे साफ होता है कि लोगों को वक्त पर इलाज नहीं मिल पा रहा। देर से जांच और वक्त पर इलाज न मिलना भी इन मौतों की बड़ी वजह बताई गई है।
इस बीमारी में सबसे बड़ी मुश्किल लोगों का भरोसा न करना है। कुछ लोग मानते हैं कि यह बीमारी सिर्फ अफवाह है। इसका असर इतना गंभीर है कि कई जगहों पर स्वास्थ्यकर्मियों और इलाज केंद्रों पर हमले हुए हैं।
इबोला की गंभीरता को देखते हुए रोकथाम के लिए संसाधन तेजी से लगाए जा रहे हैं, और इसका असर बाकी स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी OCHA के मुताबिक अप्रैल से जून के बीच इतुरी प्रांत में रोजमर्रा की बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं में 13 फीसदी की गिरावट आई है। डर की वजह से लोग अस्पताल जाने से भी कतरा रहे हैं।
ऐसे में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी एक बड़ी चुनौती बन गई है। तनख्वाह में देरी और तनख्वाह न मिलने की वजह से कई इलाकों में हड़ताल हुई है। अफ्रीका सीडीसी के मुताबिक महामारी की शुरुआत से अब तक 50 स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हो चुकी है। कुछ इलाकों में नए मरीजों की तादाद घटी है, लेकिन दूसरे इलाकों में बीमारी फैलती जा रही है। अफ्रीका सीडीसी के आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा महामारी की रफ्तार 2014-16 की पश्चिम अफ्रीका की इबोला महामारी से ज्यादा है।
WHO ने चेतावनी दी है कि अगर रफ्तार यही रही तो यह महामारी पिछले संकट के स्तर तक पहुंच सकती है, जिसमें करीब 11,000 लोगों की मौत हुई थी। अब इस वायरस को काबू में लाना काँगो के लिए बड़ी चुनौती है। हिंसा, स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल और लगातार हो रहे पलायन ने रोकथाम की हर कोशिश को और मुश्किल बना दिया है।