कच्चा तेल 115 डॉलर के आसपास, इंडियन बास्केट 120 डॉलर के करीब; बाजार में दबाव
कच्चे तेल की चढ़ती कीमतों और कमजोर ग्लोबल संकेतों से निवेशकों की चिंता बढ़ी है। इंडियन क्रूड बास्केट 119.99 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है।
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कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और कमजोर ग्लोबल संकेतों की वजह से भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों की फिक्र बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude का भाव प्रति बैरल 115 डॉलर के आसपास चल रहा है। वहीं भारत के लिए अहम इंडियन क्रूड बास्केट की कीमत 119.99 डॉलर तक पहुंच गई है। महंगे तेल का असर देश के आयात खर्च, महंगाई और तेल कंपनियों के मुनाफे पर पड़ने की आशंका है। इसलिए सबकी नजर इस पर है कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे या नहीं।
अमेरिका और ईरान के बीच जंग शुरू होने के बाद से Brent Crude की कीमत में बड़ा उछाल आया है। पिछले सत्र में भाव प्रति बैरल 117.41 डॉलर तक गया था और फिर 116.72 डॉलर पर बंद हुआ। सोमवार को मिले आंकड़ों के मुताबिक भाव 1.55 फीसदी गिरकर करीब 114.91 डॉलर पर कारोबार कर रहा था।
सऊदी अरब में हूती बागियों के हमलों के बाद तेल की सप्लाई बिगड़ने का डर पैदा हुआ है। इसी वजह से ग्लोबल बाजार में कच्चे तेल के दामों को सहारा मिल रहा है। भाव थोड़ा नीचे आया है, लेकिन अब भी ऊंचे स्तर पर हैं।
भारत के लिए सिर्फ अंतरराष्ट्रीय Brent का रेट मायने नहीं रखता, देश जो कच्चा तेल खरीदता है उसकी कीमत भी उतनी ही अहम है। आंकड़ों के मुताबिक 22 अक्टूबर को इंडियन क्रूड बास्केट का भाव 119.99 डॉलर प्रति बैरल दर्ज हुआ। अक्टूबर की औसत कीमत भी करीब 120 डॉलर बताई गई है। भारत बड़े पैमाने पर कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए दाम बढ़ने का सीधा असर आयात बिल पर पड़ता है। इससे रुपये पर दबाव आ सकता है और महंगाई बढ़ने की गुंजाइश रहती है।
कच्चे तेल के महंगा होने से तेल मार्केटिंग कंपनियों का खर्च बढ़ रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक कंपनियों को रोज 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ रहा है। अंदाजा है कि पेट्रोल पर प्रति लीटर 8 रुपये और डीजल पर प्रति लीटर 9 रुपये का घाटा हो रहा है। इसके अलावा हर LPG सिलेंडर पर 300 रुपये की अंडर रिकवरी बताई गई है।
त्योहारों के मौसम में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की संभावना कम मानी जा रही है। फिर भी अगर कच्चे तेल के भाव लंबे वक्त तक ऊंचे रहे, तो कंपनियां बढ़ा हुआ खर्च ग्राहकों पर डाल सकती हैं। हालांकि ईंधन के दाम बढ़ाने को लेकर कोई पक्का फैसला जाहिर होने की जानकारी इन आंकड़ों में नहीं है।
शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई। Dow Jones Industrial Average 652.82 अंक यानी 1.23 फीसदी गिरकर 52,215.16 पर बंद हुआ। S&P 500 में 0.52 फीसदी और Nasdaq Composite में 0.21 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई।
सोमवार को एशियाई बाजारों में भी दबाव दिखा। जापान का Nikkei 225 करीब 0.26 फीसदी, दक्षिण कोरिया का KOSPI 0.92 फीसदी, चीन का Shanghai Composite 0.36 फीसदी और सिंगापुर का Straits Times 0.43 फीसदी फिसला। हालांकि हांगकांग का Hang Seng 0.31 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था।
सोमवार सुबह 7:36 बजे GIFT Nifty 22,599.50 पर था। पिछले बंद के मुकाबले इसमें 8.50 अंक यानी 0.04 फीसदी की गिरावट थी। इससे संकेत मिल रहे थे कि भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत लगभग सपाट रह सकती है। लेकिन असली कारोबार शुरू होने के बाद बाजार की चाल बदल भी सकती है।
इस हफ्ते अमेरिका के फेडरल रिजर्व की 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली बैठक भी निवेशकों के लिए अहम रहेगी। ऊर्जा की कीमतें बढ़ने के बीच महंगाई और ब्याज दरों पर फेड क्या रुख अपनाता है, इस पर ग्लोबल बाजारों की नजर रहेगी। कच्चे तेल के भाव, दुनिया के बाजारों की हलचल और फेड का फैसला भारतीय शेयर बाजार पर असर डाल सकते हैं। इसलिए निवेशकों के लिए कारोबार में सावधानी बरतना जरूरी होगा।
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