जिवती ग्रामीण अस्पताल में अब चार डॉक्टर, इलाज हुआ आसान
जिवती ग्रामीण अस्पताल में चार डॉक्टरों की तैनाती से स्थानीय मरीजों को राहत मिली है, सांप के काटने और रेबीज की वैक्सीन भी अब वहीं उपलब्ध है।
जिवती के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को अब इलाज के लिए दूर भागना नहीं पड़ रहा। गांव के लोगों को समय पर और अच्छा इलाज मिले, और इलाज पर लगने वाला पैसा और वक्त बचे, इसी सोच के साथ करीब साल भर पहले जिवती प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को अपग्रेड करके ग्रामीण अस्पताल बनाया गया था। महीने भर पहले स्वास्थ्य विभाग ने यहां तीन एमबीबीएस डॉक्टरों की नियुक्ति की, जिससे अस्पताल की सेवा को बड़ा सहारा मिला है।
अभी डॉ. प्रमेय भगत, डॉ. मकरंद हजारे और डॉ. डेव्हिड देशपांडे, इन तीनों के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. सुरज मडावी भी दिन-रात मरीजों की सेवा में लगे हैं। इन चारों मेडिकल अफसरों की मेहनत की वजह से जिवती और आसपास के इलाके के मरीजों में संतोष का माहौल बना है।
जिवती तालुका दुर्गम और पूरी तरह ग्रामीण इलाका है, जहां स्वास्थ्य समेत कई बुनियादी सुविधाओं की कमी रही है। यहां के ज्यादातर लोग बारिश पर निर्भर खेती करते हैं और आर्थिक हालत भी ठीकठाक नहीं है। इसी वजह से बीमारी के वक्त बड़े शहरों या दूसरी जगह जाकर इलाज कराना कई परिवारों के लिए मुश्किल हो जाता था।
पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं की कमी और जरूरी सुविधाओं के अभाव में कई मरीजों को दूसरी जगह रेफर करना पड़ता था, जिससे मरीज और उनके घरवालों को पैसे की और मानसिक तौर पर परेशानी होती थी। लेकिन ग्रामीण अस्पताल शुरू होने के बाद हालात बदलते दिख रहे हैं। अभी अस्पताल में जरूरी दवाओं का पूरा स्टॉक है, साथ ही सांप के काटने पर दी जाने वाली वैक्सीन और रेबीज की वैक्सीन भी उपलब्ध है। इस वजह से ज्यादातर मरीजों का इलाज जिवती में ही हो पा रहा है। सिर्फ गंभीर मरीजों को ही आगे के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों के पास रेफर किया जा रहा है, ऐसा मेडिकल अफसरों ने बताया।
फिलहाल इलाके में मलेरिया और टायफॉइड जैसी बीमारियां बढ़ी हैं, और बुखार, थकान जैसे लक्षणों वाले मरीज बड़ी संख्या में अस्पताल में इलाज के लिए आ रहे हैं। बढ़ती मरीजों की संख्या को देखते हुए चारों मेडिकल अफसर दिन-रात सेवा दे रहे हैं ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके। इनकी तुरंत मिलने वाली सेवा से कई मरीजों की तबीयत में सुधार आ रहा है।
इससे पहले डॉ. विशाल पवार ने भी जिवती में अच्छी स्वास्थ्य सेवा दी थी। अब तीन नए एमबीबीएस डॉक्टरों समेत चार मेडिकल अफसर काम कर रहे हैं, जिससे जिवती और आसपास के लोगों को बड़ी राहत मिली है।
अस्पताल में रोज सैकड़ों मरीज इलाज के लिए आते हैं, और मरीज की जरूरत के हिसाब से सलाइन, इंजेक्शन या दवा दी जाती है। कुछ ग्रामीण मरीज खुद से सलाइन या इंजेक्शन देने की मांग करते हैं, लेकिन हर बीमारी में सलाइन या इंजेक्शन जरूरी नहीं होता, यह बात डॉक्टर मरीजों को समझाकर उनके मन का गलतफहमी दूर करने की कोशिश कर रहे हैं।
दुर्गम ग्रामीण इलाके में सेवा दे रहे इन नौजवान डॉक्टरों को लोगों से सहयोग की अपील की जा रही है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग अगर जिवती ग्रामीण अस्पताल पर खास ध्यान देकर जरूरी मेडिकल मशीनरी, दवाएं, जांच की सुविधा और बाकी बुनियादी चीजें मुहैया कराए, तो इन डॉक्टरों को और बेहतर तरीके से सेवा देने में मदद मिलेगी। इससे जिवती समेत आसपास के ग्रामीण इलाके के लोगों को स्थानीय स्तर पर ही ज्यादा भरोसेमंद और समय पर इलाज मिल सकेगा।