झोपु कानून की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति की पहली बैठक, प्रक्रिया तेज करने पर जोर
हाईकोर्ट के आदेश पर बनी विशेषज्ञ समिति ने झोपड़पट्टी पुनर्विकास कानून के अमल की समीक्षा की।
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महाराष्ट्र में झोपड़पट्टियों के पुनर्विकास की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी, असरदार और तेज बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। उच्च न्यायालय के आदेश पर बनाई गई विशेषज्ञ समिति की पहली समीक्षा बैठक हाल ही में हुई।
इस बैठक में महाराष्ट्र झोपड़पट्टी क्षेत्र (सुधार, निर्मूलन और पुनर्विकास) अधिनियम, 1971 के अमल की समीक्षा की गई और आगे की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। विधायक पराग अलवणी समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में हिस्सा लिया। उन्होंने झोपड़पट्टी पुनर्वास योजना का फायदा आम नागरिकों को जल्द से जल्द दिलाने के लिए अहम सुझाव दिए।
यह विशेषज्ञ समिति महाराष्ट्र सरकार के आवास विभाग ने 31 जुलाई 2026 को बनाई थी। समिति का गठन सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का पालन करते हुए और मुंबई उच्च न्यायालय में दाखिल सुमोटो याचिका के तहत दिए गए आदेशों के मुताबिक किया गया। अदालत ने कानून के असर का परफॉर्मेंस ऑडिट करने को कहा था। साथ ही डेवलपर, जमीन मालिकों और कानूनी जानकारों के सुझावों पर गौर करते हुए रिपोर्ट सौंपने का निर्देश भी दिया था।
उच्च न्यायालय की सूचना के बाद अब इस समिति को अगले 10 महीनों में अपनी विस्तृत सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपनी होंगी। समिति की मदद के लिए एसआरए के अलग-अलग विभागों के अधिकारियों की एक उपसमिति भी बनाई जाएगी। इसमें इंजीनियरिंग, वित्त, भूमि अधिग्रहण और नगर नियोजन विभाग के अधिकारी शामिल होंगे।
बैठक में आवास और नगर विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव असीम कुमार गुप्ता, झोपड़पट्टी पुनर्वास प्राधिकरण (एसआरए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. महेंद्र कल्याणकर, पूर्व सांसद राहुल शेवाले, नगर नियोजन संचालक जितेंद्र भोपले, वास्तुकार सलोनी देवधर और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
पहली बैठक में कानून की मौजूदा स्थिति और पुनर्विकास में आ रही अड़चनों का जायजा लिया गया। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि झोपड़पट्टी में रहने वालों को सम्मान के साथ जीने का हक मिले और झोपड़पट्टीमुक्त शहर का सपना जल्द पूरा हो। इसके अलावा पुनर्विकास से जुड़े प्रशासनिक और तकनीकी कामों की रफ्तार बढ़ाने के लिए जरूरी नीतिगत बदलावों पर भी बात हुई।