जेरुसलेम की पूर्व डिप्टी मेयर बोलीं, भारत इस्रायल का सबसे मजबूत साथी और UN की साख खत्म
फ्लूर हसन नाहूम ने गाझा युद्ध, UN की भूमिका, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और भारत-इस्रायल रिश्तों पर खुलकर अपनी बात रखी।
गाझा युद्ध को लेकर दुनियाभर में कूटनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच जेरुसलेम की पूर्व डिप्टी मेयर फ्लूर हसन नाहूम ने वैश्विक राजनीति, संयुक्त राष्ट्र (UN) की भूमिका और मिडिल ईस्ट में तनाव को लेकर बड़े साफ शब्दों में अपनी राय रखी है। उनका कहना है कि गाझा युद्ध के दौरान UN अपने मूल सिद्धांतों से भटक गया और दुनियाभर में उसकी जो थोड़ी-बहुत साख बची थी, वो भी अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है।
नाहूम ने आरोप लगाया कि UN इस्रायल के खिलाफ एकतरफा रुख अपना रहा है और गाझा में भूखमरी के झूठे दावे फैला रहा है। उनके मुताबिक दुनिया में और भी कई खतरनाक और भीषण संघर्ष चल रहे हैं, लेकिन UN और दूसरी वैश्विक संस्थाएं सिर्फ इस्रायल को ही निशाना बना रही हैं। UN की एजेंसी UNRWA पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि 7 अक्टूबर 2023 को हुए भीषण हत्याकांड में इस एजेंसी के कर्मचारियों की सीधी भागीदारी के सबूत मिले हैं। उनके मुताबिक आतंकियों को अपने सिस्टम में पनाह देने से UNRWA की निष्पक्षता पूरी तरह दांव पर लग गई है।
गाझा के भविष्य और वहां के लोगों के पुनर्वास पर बात करते हुए नाहूम ने एक बड़ी योजना पेश की। उनका कहना है कि गाझा में शांति लानी है तो सबसे पहली शर्त यही है कि हमास के कट्टर नेतृत्व को सत्ता से पूरी तरह हटाया जाए। जब तक हमास के लड़ाके हथियार नहीं डालते और सरेंडर नहीं करते, तब तक गाझा में कोई समझौता या शांति डील मुमकिन नहीं है।
गाझा के प्रशासनिक ढांचे की तुलना उन्होंने सीधे एक अपराधी 'माफिया' राज से की। नाहूम ने कहा कि हमास गाझा के आम लोगों के लिए आने वाला अंतरराष्ट्रीय मानवीय राशन चुरा लेता है और उसे बेचकर अपने लड़ाकों को तनख्वाह देता है। उनके मुताबिक इस भ्रष्ट और हिंसक व्यवस्था को पूरी तरह खत्म किए बिना गाझा की आम जनता का पुनर्वास और विकास बिल्कुल नामुमकिन है।
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही संभावित बातचीत पर नाहूम ने कहा कि दोनों देशों के बीच कोई टिकाऊ समझौता होना बहुत मुश्किल है, क्योंकि पहले हुए शांति समझौते जमीन पर पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। उनके मुताबिक जो देश या संगठन तबाही मचाने की सोच पर चलते हैं, उनसे शांति समझौता करना संभव नहीं, और अब अमेरिका के नेतृत्व को भी यह बात समझ आ गई है। उन्होंने कहा कि कोई अस्थायी समझौता हो भी जाए तो वो ज्यादा दिन नहीं टिकेगा।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर इस्रायल के रुख को साफ करते हुए नाहूम ने कहा कि ईरान ने जो संवर्धित परमाणु सामग्री जमा कर रखी है, उसे पूरी तरह नष्ट किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक भविष्य में किसी भी तरह के परमाणु संवर्धन पर ईरान पर हमेशा के लिए बैन लगना चाहिए, तभी पूरा मिडिल ईस्ट इलाका बड़े परमाणु युद्ध के खतरे से सुरक्षित रह सकता है।
भारत और इस्रायल के द्विपक्षीय रिश्तों की तारीफ करते हुए फ्लूर हसन नाहूम ने भारत को इस्रायल का सबसे मजबूत, भरोसेमंद और रणनीतिक साथी बताया। उनके मुताबिक भारत सिर्फ एक बड़ा व्यापारिक पार्टनर नहीं है, बल्कि दुनिया में शांति और स्थिरता लाने में भारत की भूमिका बहुत अहम है, और आने वाली नई वैश्विक व्यवस्था बनाने में भारत को आगे रहना चाहिए।
उन्होंने बताया कि फिलहाल दोनों देश व्यापार, हाई-टेक, रक्षा और सिक्योरिटी के क्षेत्र में तेजी से सहयोग बढ़ा रहे हैं। भारत, मिडिल ईस्ट, इस्रायल और यूरोप को जोड़ने वाले IMEC (इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर) प्रोजेक्ट पर दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। इसके अलावा भारत, इस्रायल, अमेरिका और UAE वाला I2U2 ग्रुप इलाके की आर्थिक तरक्की में बड़ा बदलाव ला रहा है। नाहूम ने कहा कि ये प्रोजेक्ट पूरी दुनिया की आर्थिक खुशहाली के लिए नया रास्ता खोलेंगे।