जर्मनी में पढ़ाई 2026: ट्यूशन फीस माफ, पर रहने-खाने का बजट न भूलें
जर्मनी के सरकारी विश्वविद्यालयों में ट्यूशन फीस नहीं लगती, लेकिन रहने-खाने, हेल्थ इंश्योरेंस और वीजा के लिए दिखानी पड़ने वाली रकम को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
जो भारतीय स्टूडेंट्स विदेश जाकर हायर एजुकेशन का सपना देख रहे हैं, उनके बीच जर्मनी एक बहुत पॉपुलर देश है। वजह यह है कि वहां के कई सरकारी विश्वविद्यालयों में ट्यूशन फीस नहीं ली जाती। यही सुनकर बहुत से स्टूडेंट्स को लगता है कि जर्मनी में पढ़ाई का खर्च बहुत कम होगा। लेकिन विदेश में पढ़ाई का पूरा खर्च सिर्फ कॉलेज की फीस से तय नहीं होता। वहां पहुंचने के बाद रहने की जगह, खाने-पीने, आने-जाने, हेल्थ इंश्योरेंस और बाकी रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पैसा खर्च होता है।
इसके अलावा जर्मनी के स्टूडेंट वीजा के लिए यह साबित करना जरूरी है कि स्टूडेंट अपनी पढ़ाई और रहने का खर्च उठा सकता है। 2026 में स्टूडेंट वीजा के लिए कम से कम 11,904 यूरो की आर्थिक क्षमता दिखानी पड़ती है, जो आमतौर पर ब्लॉक अकाउंट के जरिए साबित की जा सकती है। इसलिए कोई भी भारतीय स्टूडेंट अगर जर्मनी में पढ़ाई का प्लान बना रहा है, तो सिर्फ ट्यूशन फीस देखकर बजट न बनाए।
जर्मनी के ज्यादातर सरकारी विश्वविद्यालयों में आमतौर पर ट्यूशन फीस नहीं होती, लेकिन स्टूडेंट्स को हर सेमेस्टर में कुछ कंट्रीब्यूशन देना पड़ता है। सरकारी जानकारी के मुताबिक यह खर्च हर सेमेस्टर औसतन करीब 300 यूरो हो सकता है। यह रकम विश्वविद्यालय और जगह के हिसाब से बदल सकती है और अक्सर इसमें स्टूडेंट सर्विसेज और पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जुड़ी सुविधाएं भी शामिल होती हैं। हर संस्थान और राज्य के नियम एक जैसे नहीं होते, इसलिए जिस यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेना है, वहां की फीस पहले ही चेक कर लेनी चाहिए।
जर्मनी पहुंचने के बाद रहने का खर्च सबसे बड़ा खर्च बन सकता है। सरकारी गाइडलाइंस के मुताबिक एक व्यक्ति के लिए बेसिक किराया जगह और घर के साइज के हिसाब से महीने का करीब 350 से 1,000 यूरो तक हो सकता है। इसके अलावा बिजली, पानी और हीटिंग जैसी सुविधाओं पर महीने का करीब 80 से 250 यूरो तक खर्च हो सकता है। बड़े शहरों में किराया छोटे शहरों और गांवों के मुकाबले काफी ज्यादा हो सकता है, इसलिए यूनिवर्सिटी चुनते वक्त सिर्फ फीस नहीं, बल्कि उस शहर में रहने का खर्च भी देखना जरूरी है।
विदेश में रहने वाले स्टूडेंट का खर्च सिर्फ कमरे के किराए तक सीमित नहीं रहता। जर्मनी की सरकारी जानकारी के मुताबिक एक व्यक्ति के खाने-पीने पर महीने का करीब 200 से 350 यूरो खर्च हो सकता है। इसके अलावा ट्रैवल, फोन, इंटरनेट और एंटरटेनमेंट जैसी चीजों पर महीने का करीब 150 से 350 यूरो तक खर्च हो सकता है। अगर स्टूडेंट खुद खाना बनाए और सस्ती दुकानों से सामान खरीदे, तो खर्च कंट्रोल में रखने में मदद मिल सकती है।
जर्मनी में पढ़ाई के लिए जाने वाले भारतीय स्टूडेंट्स के लिए फाइनेंशियल तैयारी बहुत जरूरी है। 2026 में स्टूडेंट वीजा के लिए 11,904 यूरो की रकम से अपनी आर्थिक स्थिति साबित करनी पड़ती है। इसके लिए ब्लॉक अकाउंट एक रास्ता है, जिसमें पैसे जमा रहते हैं और महीने में एक तय लिमिट तक ही रकम निकाली जा सकती है। भारतीय स्टूडेंट्स के लिए जर्मनी की ऑफिशियल वेबसाइट भी पहले साल के खर्च में 11,904 यूरो और महीने में ज्यादा से ज्यादा 992 यूरो निकालने की लिमिट बताती है।
जर्मनी में पढ़ रहे स्टूडेंट्स के लिए हेल्थ इंश्योरेंस होना जरूरी है। यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेते वक्त भी इंश्योरेंस का सबूत देना पड़ता है। मतलब भारत से जर्मनी जाने वाले स्टूडेंट को पढ़ाई और रहने के खर्च के साथ-साथ हेल्थ इंश्योरेंस का इंतजाम भी करना होगा।
इसके अलावा शुरुआती दिनों में कमरे की डिपॉजिट रकम, ट्रैवल, जरूरी सामान और छोटी-मोटी दूसरी जरूरतों पर भी खर्च हो सकता है। इसीलिए जर्मनी जाने से पहले सिर्फ यूनिवर्सिटी की फीस देखकर बजट न बनाते हुए पूरे साल के रहने और पढ़ाई से जुड़े सारे खर्चों को ध्यान में रखकर तैयारी करना सही रहता है।