मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:59 IST

जांभूळघाट आश्रमशाला में अनुशासन के नाम पर बच्चों के आधे बाल कटे, अधीक्षक को नोटिस

चिमूर तालुका की सरकारी माध्यमिक आश्रमशाला में हेयरकटिंग के दौरान खेल रहे बच्चों पर भड़के अधीक्षक पर आरोप है कि उन्होंने नाई से आधे बाल कटवाए। पालकों में गुस्सा है।

जांभूळघाट आश्रमशाला में अनुशासन के नाम पर बच्चों के आधे बाल कटे, अधीक्षक को नोटिस
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

चिमूर तालुका के जांभूळघाट की शासकीय माध्यमिक आश्रमशाला में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि अनुशासन के नाम पर एक विद्यार्थी के आधे बाल कटवा दिए गए। बाल काटने के लिए आए नाई से यह काम करवाया गया, और इससे आश्रमशाला के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं। पालकों में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है।

यह निवासी आश्रमशाला चिमूर आदिवासी प्रकल्प के तहत आती है। यहां करीब साढ़े पांच सौ लड़के-लड़कियां पढ़ते हैं। बच्चे यहीं रहते हैं, इसलिए उनकी रोजमर्रा की जरूरतों और अनुशासन की जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की है। बच्चों के बाल काटने के लिए आदिवासी विभाग ने सरकारी स्तर पर एक नाई नियुक्त किया है। इसके लिए शनिवार और रविवार के दिन तय हैं।

शनिवार को दोपहर करीब चार बजे आश्रमशाला के परिसर में बच्चों की हेयरकटिंग चल रही थी। बताया जाता है कि कुछ बच्चों के बाल कट रहे थे, तभी बाकी कुछ बच्चे आसपास खेल रहे थे। इससे अधीक्षक नाराज हो गए। आरोप है कि उन्होंने गुस्से में नाई को विद्यार्थी के आधे बाल साफ करने को कहा। ट्रिमर से कुल 82 विद्यार्थियों के बाल काटे गए, जिससे वे अजीब हालत में रह गए। सवाल उठ रहे हैं कि इसका बच्चे के मन पर क्या असर पड़ा, उसे मानसिक तकलीफ हुई या नहीं, और क्या उसकी मंजूरी ली गई थी।

इलाके में यह चर्चा भी है कि घटना के वक्त अधीक्षक ने शराब पी रखी थी। लेकिन इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए मांग हो रही है कि संबंधित विभाग इसकी भी निष्पक्ष जांच करे।

स्कूल के मुख्याध्यापक प्रशांत गिरी ने बताया, "महत्त्वपूर्ण काम से एक घंटे के लिए चिमूर गया था। वापस आने के बाद बच्चों ने इस बारे में बताया। अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस दिया गया है।"

पालकों का कहना है कि सिर्फ कारण बताओ नोटिस से बात खत्म नहीं होती। उनकी मांग है कि इसकी गहरी जांच हो कि आधे बाल काटने का फैसला किस वजह से लिया गया, बच्चों को ऐसी सजा देने का हक किसे है, और घटना के वक्त असल में क्या हुआ। पालक यह भी पूछ रहे हैं कि अगर किसी बच्चे ने अनुशासन तोड़ा था, तो नियम के मुताबिक समझाइश देना या स्कूल के अनुशासन के दायरे में कार्रवाई करना काफी क्यों नहीं था। क्या सीधे बाल कटवाकर सजा दी गई, यह भी जांच का विषय बताया जा रहा है।

पालक अधीक्षक के साथ मुख्याध्यापक पर भी फौरन कार्रवाई चाहते हैं। उनका कहना है कि निवासी आश्रमशाला में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा के साथ उनकी मानसिक और भावनिक सेहत की जिम्मेदारी भी प्रशासन की है। अगर बच्चे को अपमान झेलना पड़ा है, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

पालकों की मांग है कि वरिष्ठ अधिकारी निष्पक्ष जांच करें, विद्यार्थी की बात सुनें, घटना की असली सच्चाई सामने लाएं और दोषी पाए जाने वालों पर नियम के मुताबिक कार्रवाई करें। सरकार आदिवासी बच्चों की पढ़ाई के लिए निवासी आश्रमशालाओं में कई सुविधाएं देती है, मगर बच्चों के साथ सम्मान से पेश आना भी उतना ही जरूरी है। अब विद्यार्थी, पालक और इलाके के लोग देख रहे हैं कि चिमूर आदिवासी प्रकल्प और आदिवासी विभाग इस मामले का क्या संज्ञान लेते हैं और किस पर क्या कार्रवाई करते हैं।

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