मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:49 IST

इराणी विमान कंपनियों पर अमेरिकी बैन से भारत असमंजस में, 23 सितंबर से लागू

अमेरिका ने 23 सितंबर से इराणी एयरलाइनों और उनकी सर्विस देने वालों पर सख्ती का ऐलान किया है, भारत ने अभी कोई फैसला नहीं लिया।

इराणी विमान कंपनियों पर अमेरिकी बैन से भारत असमंजस में, 23 सितंबर से लागू
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

अमेरिका और इराण के बीच पिछले सात महीने से राजनीतिक और सैन्य तनाव अपने सबसे तीखे मोड़ पर पहुंच गया है, और अब इसका असर दुनिया भर के एविएशन सेक्टर पर साफ दिखने लगा है। अमेरिका ने इराण पर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ाने के लिए एक बड़ा और आक्रामक कदम उठाया है। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने ऐलान किया है कि 23 सितंबर से दुनिया भर की इंटरनेशनल फ्लाइट्स में इराणी एयरलाइन कंपनियों पर, और उन्हें किसी भी तरह की सर्विस देने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस नए फैसले से ग्लोबल पॉलिटिक्स और इंटरनेशनल सिविल एविएशन सेक्टर में हलचल मच गई है, और अब सबकी नजरें इस मामले में भारत के रुख पर टिकी हैं।

अमेरिका ने सिर्फ इराणी विमानों पर बैन की अपील नहीं की, बल्कि इराणी एयरलाइनों को फ्यूल, लैंडिंग, मेंटेनेंस या किसी भी टेक्निकल सर्विस देने वाली विदेशी कंपनियों को भी सीधी कार्रवाई की चेतावनी दी है। जो कंपनियां या देश अमेरिका का यह नियम नहीं मानेंगे, उन्हें अमेरिकी डॉलर के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सिस्टम से बाहर कर दिया जाएगा, यह बेहद सख्त धमकी अमेरिका की तरफ से दी गई है। इस चेतावनी के बाद कई देशों के इंटरनेशनल एयरपोर्ट और सर्विस देने वाली कंपनियां मुश्किल में आ गई हैं। कुछ देशों ने अमेरिका का यह आदेश फौरन मान लिया है, जबकि कुछ देशों ने अभी तक अपना रुख साफ नहीं किया है।

इस पूरे मामले में भारत की भूमिका बेहद अहम और उतनी ही नाजुक मानी जा रही है। भारत ने अमेरिका की इस नई चेतावनी पर अभी तक कोई ऑफिशियल रिएक्शन या फैसला नहीं दिया है। फिलहाल महान एयर और इराण एयर, ये दो प्रमुख इराणी एयरलाइन कंपनियां भारत और तेहरान के बीच रेगुलर पैसेंजर और कार्गो सर्विस चलाती हैं। मार्च 2026 के आंकड़ों के मुताबिक भारत से इराण जाने वाले पैसेंजरों की संख्या करीब 1,69,000 दर्ज की गई थी, जिसमें रोजाना 5,000 से ज्यादा पैसेंजर शामिल हैं। इस आंकड़े में सीधे सफर करने वालों के साथ-साथ कनेक्टिंग फ्लाइट्स से यात्रा करने वाले पैसेंजर भी शामिल हैं।

अगर भारत अमेरिका के दबाव में आकर इन विमानों पर बैन लगाता है, तो दोनों देशों के बीच सीधा हवाई संपर्क टूट जाएगा, जिसका सीधा असर व्यापारियों, स्टूडेंट्स, मरीजों और टूरिस्ट्स पर पड़ेगा। वहीं अगर भारत अमेरिका का आदेश ठुकरा देता है, तो भारतीय एयरपोर्ट अथॉरिटी और सर्विस देने वाली कंपनियों को अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए भारत सरकार इस मामले में बहुत सोच-समझकर और सावधानी से कदम उठा रही है।

अमेरिका के इस सख्त फैसले के बाद दुनिया भर में साफ तौर पर दो गुट बंटते दिख रहे हैं। कुछ देशों ने अमेरिका की बात मानते हुए इराणी विमानों पर सीधे बैन लगाना शुरू कर दिया है। इराक ने बगदाद एयरपोर्ट से इराणी विमानों की उड़ान और लैंडिंग पर रोक लगा दी है। ओमान और जॉर्जिया ने इराणी एयरलाइन महान एयर को अपने एयरस्पेस में एंट्री देने से पहले ही इनकार कर दिया है। इसके अलावा तुर्की सरकार की गुजारिश पर महान एयर ने खुद ही तुर्की जाने वाली अपनी फ्लाइट्स रोक दी हैं।

दूसरी तरफ चीन और रूस जैसी बड़ी महाशक्तियों ने अमेरिका के इस एकतरफा प्रतिबंध का सख्त विरोध किया है। चीन ने अमेरिका की इस कार्रवाई को पूरी तरह गैरकानूनी और इंटरनेशनल नियमों का उल्लंघन बताया है। चीन ने साफ किया है कि वह इराणी विमानों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाएगा और अपनी फ्लाइट्स पहले की तरह चलाता रहेगा। रूस, पाकिस्तान और तुर्की को लेकर भी यही अनिश्चितता बनी हुई है, ये देश अमेरिका के दबाव को पूरी तरह नकारने की तैयारी में हैं।

भारत के लिए यह फैसला लेना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है, क्योंकि अमेरिका के साथ भारत के मजबूत आर्थिक, तकनीकी और सामरिक रिश्ते हैं। अमेरिका के साथ ट्रेड और डिफेंस डील भारत के लिए अहम हैं। लेकिन साथ ही इराण भारत का एक पुराना, भरोसेमंद और स्ट्रैटेजिक रूप से बेहद अहम पार्टनर देश है। चाबहार पोर्ट का डेवलपमेंट हो या सेंट्रल एशिया तक पहुंचने का रास्ता, भारत को इराण की मदद चाहिए। इसीलिए अमेरिका को संतुष्ट रखना और इराण के साथ पुराने रिश्ते बनाए रखना, इन दोनों में बैलेंस बनाने की बड़ी कूटनीतिक चुनौती फिलहाल भारतीय विदेश मंत्रालय के सामने खड़ी है।

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