ILO रिपोर्ट: भारत में मैनेजर पदों पर महिलाएं 12 प्रतिशत से कम, 34 में 32वें नंबर पर
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की नई रिपोर्ट में एशिया-प्रशांत के 34 देशों और अर्थव्यवस्थाओं में भारत 32वें स्थान पर है। पगार की खाई और पढ़ाई के आंकड़े भी सामने आए हैं।
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की एक नई रिपोर्ट ने काम करने वाली महिलाओं के हालात पर कई चौंकाने वाली बातें सामने रखी हैं। "विमेन इन बिजनेस एंड मैनेजमेंट, स्केलिंग सक्सेस" नाम की इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मैनेजर के पदों पर महिलाओं की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत से भी कम है।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 34 देशों और अर्थव्यवस्थाओं की सूची में भारत 32वें नंबर पर है। यानी इस सूची में भारत से नीचे सिर्फ पाकिस्तान और बांग्लादेश हैं। रिपोर्ट कॉर्पोरेट दुनिया में बराबरी, पगार के फर्क और मैनेजमेंट के अलग-अलग स्तरों पर महिलाओं की मौजूदगी की तस्वीर दिखाती है। यह रिपोर्ट ILO के उस सर्वे पर टिकी है, जो 99 देशों के 11,957 उद्योगों में किया गया।
आंकड़ों को देखें तो एशिया-प्रशांत में हर पांच में से एक, यानी करीब 20 प्रतिशत मैनेजर महिलाएं हैं। दुनिया भर का आंकड़ा 30.5 प्रतिशत है। भारत में कुल मैनेजर पदों के साथ-साथ सीनियर और मिडिल मैनेजमेंट, दोनों स्तरों पर महिलाओं की भागीदारी बहुत कम है।
सेंटर फॉर विमेंस डेवलपमेंट स्टडीज की प्रोफेसर नीथा एन. के मुताबिक इस फर्क के पीछे मुख्य रूप से दो बड़ी वजहें हैं। पहली, महिलाओं की क्षमता को लेकर समाज में चली आ रही रूढ़िवादी सोच, जिसकी वजह से उन्हें ऊंचे पदों के लायक नहीं माना जाता। दूसरी, घर-परिवार और बच्चों की परवरिश की भारी जिम्मेदारी, जिसके चलते महिलाओं को खुद ही इन पदों से पीछे हटना पड़ता है।
पगार के मामले में रिपोर्ट कहती है कि भारत में महिला कर्मचारियों को पुरुषों के मुकाबले प्रति घंटा करीब 28 प्रतिशत कम पगार मिलती है। 23 एशिया-प्रशांत अर्थव्यवस्थाओं में यह चौथा सबसे बड़ा जेंडर वेज गैप है। भारत से आगे सिर्फ टोंगा (करीब 64 प्रतिशत), दक्षिण कोरिया (करीब 41 प्रतिशत) और वानुआतू (करीब 29 प्रतिशत) हैं।
हालांकि एक अच्छी बात भी निकली है। मैनेजर के स्तर पर भारत में महिलाओं और पुरुषों की पगार का फर्क लगभग शून्य है। मतलब ऊंचे पद पर पहुंचने के बाद पुरुषों और महिलाओं की कमाई में बड़ा अंतर नहीं दिखता।
पढ़ाई के मोर्चे पर रिपोर्ट के मुताबिक भारत में उच्च शिक्षा लेने वाली कुल महिलाओं में से 23.1 प्रतिशत ने विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) की पढ़ाई की है। पुरुषों में यह आंकड़ा 31.4 प्रतिशत है। ILO का कहना है कि पगार और पदों का यह फर्क सिर्फ पढ़ाई या काम के घंटों से समझ में नहीं आता। इसके पीछे कई वजहें हैं, जैसे पेशों का लैंगिक बंटवारा, महिलाओं के काम की कम गिनती और परिवार की देखभाल से जुड़ी जिम्मेदारियां।
रिपोर्ट का एक और पहलू उत्साह देने वाला है। जिन कंपनियों या कारोबारों की कमान महिलाओं के हाथ में है, उनके कामकाज में सुधार दिखा है। महिला सीईओ वाले कारोबारों को पुरुष सीईओ वाले कारोबारों के मुकाबले बेहतर नतीजे मिलने की संभावना 6.4 प्रतिशत ज्यादा रहती है। जिन कंपनियों के बोर्ड की चेयरपर्सन महिला हैं, वहां बेहतर नतीजों की संभावना 17.5 प्रतिशत ज्यादा बताई गई है।
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