मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:01 IST

होर्मुझ में फंसे जहाजों पर जमी जैविक परत से मुंबई, सिंगापुर बंदरगाहों को खतरे की चेतावनी

मिडिल ईस्ट में महीनों से खड़े सैकड़ों मालवाहक जहाजों के तले पर जमी जैविक परत अब दुनिया भर के बंदरगाहों के लिए नया खतरा बन गई है।

होर्मुझ में फंसे जहाजों पर जमी जैविक परत से मुंबई, सिंगापुर बंदरगाहों को खतरे की चेतावनी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

होर्मुझ की खाड़ी में चल रहे सैन्य टकराव और वहां से गुजरने वाली समुद्री आवाजाही में आई रुकावट ने वैसे तो जहाजरानी उद्योग के सामने पहले से ही ढेर सारी मुश्किलें खड़ी कर दी थीं। लेकिन अब इस संकट का एक और खतरनाक और अब तक नजरअंदाज पहलू सामने आ रहा है। पर्शियन खाड़ी और ओमान की खाड़ी में महीनों से एक ही जगह पर खड़े सैकड़ों बड़े मालवाहक जहाजों के तले पर जैविक परत जम गई है, जिसे बायोफॉलिंग कहा जाता है। यह परत अब दुनिया भर की समुद्री पारिस्थितिकी और समुद्री जीवों के अस्तित्व के लिए एक बड़ा जैविक खतरा बनती जा रही है।

समुद्री जीव वैज्ञानिकों का कहना है कि जब जहाज उथले और गर्म पानी में लंबे समय तक रुके रहते हैं, तो उनकी सतह पर तरह-तरह के समुद्री जीव बहुत तेजी से पनपने लगते हैं। इस प्रक्रिया को विज्ञान की भाषा में बायोफॉलिंग कहते हैं। इसमें बार्नेकल्स, जंगली सीप, शैवाल, सूक्ष्मजीव और कई तरह के परजीवी जीव जहाज के तले से चिपककर वहां अपना बसेरा बना लेते हैं। अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं ने चेताया है कि जब यही जहाज दोबारा अपनी यात्रा शुरू करेंगे, तो ये एक इलाके की आक्रामक और खतरनाक प्रजातियों को एशिया और यूरोप के सुरक्षित बंदरगाहों तक ढोकर ले जाएंगे।

आमतौर पर व्यावसायिक मालवाहक जहाज किसी भी बंदरगाह या समुद्र में बहुत सीमित समय के लिए ही रुकते हैं, जिससे समुद्री जीवों को जहाज की सतह पर जड़ें जमाने के लिए पर्याप्त समय और माकूल माहौल नहीं मिल पाता। लेकिन मौजूदा युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के चलते हालात पूरी तरह बदल गए हैं। पिछले कई महीनों से 1500 से ज्यादा मालवाहक जहाज और तेल टैंकर समुद्र में एक ही जगह खड़े हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों के मुताबिक अगर जहाज एक ही जगह 10 दिन से ज्यादा समय तक स्थिर रहें, तो बायोफॉलिंग की रफ्तार बहुत बढ़ जाती है। होर्मुझ के इस संकट में जहाज सामान्य समय से करीब 40 गुना ज्यादा समय तक रुके रह चुके हैं। इतने लंबे समय में जहाजों पर लगी एंटी-फॉलिंग कोटिंग धीरे-धीरे खराब हो गई है, जिससे शैवाल, सूक्ष्मजीव और परजीवियों को जहाज के तले पर बेतहाशा बढ़ने का पूरा मौका मिल गया है।

होर्मुझ की खाड़ी कच्चे तेल और वैश्विक व्यापारिक जहाजों के आवागमन का बेहद अहम रास्ता है, और इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों का जाल दुनिया भर के सैकड़ों बंदरगाहों से जुड़ा है। समुद्र में लगा यह जाम खुलने के बाद जब ये जहाज दोबारा तेजी से चलना शुरू करेंगे, तो इनके तले पर बैठी आक्रामक प्रजातियां रास्ते में दूसरे देशों की समुद्री सीमाओं और बंदरगाहों में घुस जाएंगी। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस जैविक प्रदूषण की सबसे बड़ी मार एशिया और हिंद महासागर के प्रमुख बंदरगाहों पर पड़ सकती है। खासतौर पर मुंबई, कोलंबो और सिंगापुर, जो दुनिया के सबसे व्यस्त बंदरगाहों में गिने जाते हैं, वहां बाहरी आक्रामक जीवों के घुसने का खतरा सबसे ज्यादा है। इसके अलावा लाल सागर, भूमध्य सागर और यूरोप के अल्जेसिरास व रॉटरडैम जैसे बंदरगाहों की समुद्री पारिस्थितिकी पर भी इसका लंबे समय तक असर दिख सकता है।

जब जहाजों के तले पर सवार होकर आई ये बाहरी प्रजातियां नए समुद्री माहौल में पहुंचती हैं, तो वहां की स्थानीय प्रजातियों के अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा कर देती हैं। मिसाल के तौर पर, पर्शियन खाड़ी की एशियन ग्रीन मसेल या खास किस्म के बार्नेकल्स जब नए बंदरगाहों में पहुंचते हैं, तो वहां के स्थानीय मछलियों और सीपों से उनका खाना और ठिकाना छीन लेते हैं। अगर ये बाहरी जीव नए माहौल में तेजी से बढ़ें, तो वे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर पूरी तरह कब्जा जमा लेते हैं। इस जैविक हमले से मछलियों की कई दुर्लभ प्रजातियां खत्म हो सकती हैं। इतना ही नहीं, समुद्री परजीवी और सूक्ष्मजीव नई जगहों पर फैलने से स्थानीय मछली पकड़ने के धंधे और झींगा-सीप पालन को भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं। कई जगहों पर ये जीव बिजली बनाने वाले प्लांट और पानी का खारापन कम करने वाली डिसैलिनेशन पाइपलाइनों में जमा होकर अरबों रुपये का नुकसान कर देते हैं। एक बार किसी समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में इन आक्रामक प्रजातियों ने पैर जमा लिए, तो उन्हें वहां से पूरी तरह हटाना नामुमकिन जैसा हो जाता है।

होर्मुझ के इस संकट का असर अब सिर्फ तेल के दाम बढ़ने या व्यापार में देरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक वैश्विक पर्यावरणीय संकट बन चुका है। इस जैविक आपदा से बचने के लिए जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) और समुद्री सुरक्षा एजेंसियां जहाजों के रवाना होने से पहले उनके तले की सही तरीके से सफाई यानी हल क्लीनिंग करना अनिवार्य करें। हालांकि जल्दबाजी में समुद्र के पानी में ही जहाजों का तला साफ किया जाए, तो इन जीवों के सीधे स्थानीय पानी में मिल जाने का खतरा रहता है। इसलिए पर्यावरण के अनुकूल तरीके और वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर ही इस बायोफॉलिंग से निपटना जरूरी है। मुंबई समेत दुनिया भर के प्रमुख बंदरगाहों के लिए अब यह जरूरी हो गया है कि वे आने वाले जहाजों की जैविक जांच और बायो-सिक्योरिटी चेकिंग को और सख्त करें।

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