मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:00 IST

हार्ट अटैक के गोल्डन aवर में 'स्टेमी महाराष्ट्र' बना सहारा, 57 लाख ईसीजी में 34 हजार गंभीर मरीज

हार्ट अटैक के गोल्डन aवर में 'स्टेमी महाराष्ट्र' बना सहारा, 57 लाख ईसीजी में 34 हजार गंभीर मरीज
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

आज 29 सितंबर, यानी विश्व हृदय दिवस पर 'स्टेमी महाराष्ट्र' प्रोजेक्ट का असर साफ दिख रहा है। सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि हार्ट अटैक के बाद 'गोल्डन aवर' में मरीज को फौरन जांच और इलाज मिले, इसके लिए राज्य में यह प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है और कई मरीजों के लिए यह संजीवनी साबित हो रहा है।

विभाग के मुताबिक गांव स्तर की स्वास्थ्य संस्था से लेकर सीधे एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की सुविधा तक इलाज की पूरी कड़ी इस प्रोजेक्ट के जरिए खड़ी की गई है।

हार्ट अटैक आने के बाद हर पल मरीज के लिए अहम होता है। दिल को खून पहुंचाने वाली नस बंद हो जाए और वक्त पर इलाज न मिले, तो दिल की मांसपेशियों का नुकसान बढ़ता जाता है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रोजेक्ट के तहत 2020-21 से 27 सितंबर 2026 के बीच 57 लाख 90 हजार 963 ईसीजी किए गए। इनमें से 34 हजार 32 मरीज स्टेमी क्रिटिकल निकले, जबकि 1 लाख 45 हजार 503 मरीज दूसरी क्रिटिकल श्रेणी में पाए गए। यानी हर 100 ईसीजी में से करीब 3 मरीज क्रिटिकल श्रेणी में मिले, और उनमें से करीब 0.59 फीसदी मरीज स्टेमी क्रिटिकल थे।

स्टेमी का पूरा नाम 'एसटी-इलेव्हेशन मयोकार्डियल इन्फावर्शन' है। दिल की नस में खून का थक्का जम जाए और खून की सप्लाई अचानक रुक जाए, तो दिल की मांसपेशियों को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाता है। इसलिए ईसीजी से स्टेमी की पहचान जितनी जल्दी हो सके, उतनी जरूरी है। उसके बाद बंद नस खोलने के लिए एंजियोप्लास्टी जैसा इलाज वक्त पर मिलना भी बेहद अहम है। स्टेमी महाराष्ट्र प्रोजेक्ट इसी इलाज की कड़ी को मजबूत कर रहा है।

राज्य में 2,415 'स्पोक' स्वास्थ्य संस्थाएं और 96 'हब' हैं, जिनके जरिए हार्ट के मरीजों को वक्त पर इलाज मिलने का रास्ता खुला है। प्राथमिक स्वास्थ्य संस्था में ईसीजी करके उसका तुरंत मूल्यांकन किया जाता है। मरीज 'स्टेमी क्रिटिकल' निकले तो आगे के इलाज के लिए उसे हब अस्पताल भेजने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इस तरह जांच से लेकर नस खोलने के इलाज तक का कीमती वक्त बचाने की कोशिश की जा रही है।

संजय काटकर ने बताया कि स्टेमी प्रोजेक्ट बहुत उपयोगी है और हार्ट के मरीजों को वक्त पर इलाज मिले, इसके लिए इसे असरदार तरीके से लागू किया जा रहा है। प्रोजेक्ट में मौजूद मैनपावर की मैपिंग की जा रही है और उपलब्ध स्टाफ की क्षमता के हिसाब से उसका सही इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं।

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