ग्रीन एशिया इम्पेक्स का आईपीओ 1 अक्टूबर तक खुला, प्राइस बैंड 84 से 89 रुपये किया गया
ग्रीन एशिया इम्पेक्स का आईपीओ अब 1 अक्टूबर 2026 को बंद होगा और प्राइस बैंड 84 से 89 रुपये प्रति शेयर तय हुआ है।
खेती से जुड़ी प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट करने वाली कंपनी ग्रीन एशिया इम्पेक्स लिमिटेड ने अपने आईपीओ की तारीख आगे बढ़ा दी है। अब यह आईपीओ 1 अक्टूबर 2026 को बंद होगा। कंपनी ने साथ ही प्राइस बैंड भी बदलकर 84 से 89 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। आईपीओ 24 सितंबर 2026 को खुला था और शेयरों की लिस्टिंग एनएसई इमर्ज प्लेटफॉर्म पर प्रस्तावित है।
कंपनी का मुख्य काम जमे हुए झींगे और सूखी मिर्च की खरीद, प्रोसेसिंग और बिक्री का है। वह देश के बाजार में भी काम करती है और बाहर भी। फिलहाल कंपनी चीन, कुवैत, अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, वियतनाम और थाईलैंड, इन सात देशों में अपना माल भेजती है। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड से कंपनी को टू स्टार एक्सपोर्ट हाउस का दर्जा मिला हुआ है।
झींगा प्रोसेस करने की कंपनी की कुल क्षमता 10800 मेट्रिक टन प्रति साल है। इसमें 7200 मेट्रिक टन प्रति साल ब्लॉक फ्रीजिंग की क्षमता है और 3600 मेट्रिक टन प्रति साल इंडिविजुअल क्विक फ्रीजिंग की। कंपनी के प्रोडक्ट में वनामी झींगा, ब्लैक टाइगर झींगा और मीठे पानी का झींगा शामिल हैं। इनके अलावा तरह-तरह की सूखी मिर्च भी है।
आर्थिक साल 2025-26 में कंपनी ने ऑपरेशंस से 383.80 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया। आर्थिक साल 2024-25 में यह रेवेन्यू 33 करोड़ रुपये था। 2025-26 में ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और एमॉर्टाइजेशन से पहले का मुनाफा 25.23 करोड़ रुपये रहा, जो 6.57 प्रतिशत था। टैक्स और दूसरे खर्च के बाद कंपनी का शुद्ध मुनाफा 15.62 करोड़ रुपये रहा और यह 4.07 प्रतिशत था।
आईपीओ से जुटाई जाने वाली रकम प्रस्तावित सी-फूड प्रोसेसिंग प्लांट बनाने में लगेगी। इससे प्लांट के लिए जरूरी मशीनें और उपकरण खरीदे और लगाए जाएंगे। बाकी रकम आम कारोबारी जरूरतों और आईपीओ के खर्च में जाएगी। कंपनी को उम्मीद है कि प्रस्तावित प्लांट से उसकी उत्पादन क्षमता और कामकाज की कुशलता बढ़ेगी।
आईपीओ की बाकी जानकारी यह है। नए शेयरों की बिक्री ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से 53.46 करोड़ रुपये की है, जबकि मौजूदा शेयरधारकों की बिक्री 6.88 करोड़ रुपये की है। ऊपरी प्राइस बैंड पर कुल आईपीओ का आकार 59.34 करोड़ रुपये है। एक लॉट 1600 शेयरों का है। कम से कम 3200 शेयरों की बोली लगानी होगी, उसके बाद 1600 शेयरों के गुणकों में। इश्यू के मैनेजर इंडओरिएंट फाइनेंशियल सर्विसेस लिमिटेड हैं और मार्केट मेकर स्टील सिटी सिक्योरिटीज लिमिटेड है।
कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर पसुपुलेटी वेंकटा रामा राव ने कहा कि पिछले दस साल में कंपनी ने कच्चे माल की उपलब्धता, प्रोसेसिंग सुविधाओं और देश-विदेश के बाजारों तक पहुंच पर ध्यान देकर कारोबार बढ़ाया है। शुरुआत में कंपनी का ध्यान सूखी मिर्च के कारोबार पर था, उसके बाद वह सी-फूड प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट में भी उतरी। मैनेजमेंट के मुताबिक आईपीओ के जरिए कंपनी प्रोसेसिंग का ढांचा मजबूत कर उत्पादन क्षमता बढ़ाना चाहती है, ग्राहकों से रिश्ते और गहरे करना चाहती है और बाजार में अपनी मौजूदगी फैलाना चाहती है।
निवेशकों के लिए जरूरी बात यह है कि आईपीओ में पैसा लगाने से पहले कंपनी का जारी किया प्रॉस्पेक्टस और उसमें दिए रिस्क फैक्टर ध्यान से पढ़ लेने चाहिए। कंपनी ने आगे के कारोबार की बढ़त की जो बातें कही हैं, वे अनुमानों पर टिकी हैं और असल नतीजे अलग हो सकते हैं।