गोंडपिपरी में बारिश रूठी, खड़ी फसलें सूख रहीं; किसानों को चाहिए आर्थिक मदद
चंद्रपुर जिले का गोंडपिपरी तालुका सूखाग्रस्त घोषित हो चुका है, पर किसान चाहते हैं कि सरकार घोषणा पर न रुके और पैसा सीधे उनके हाथ में पहुंचाए।
चंद्रपुर जिले के गोंडपिपरी तालुका में किसान इस वक्त बड़ी मुश्किल में हैं। बुवाई के बाद बारिश अचानक रुक गई और खेतों में खड़ी फसल पानी के बिना सूखने लगी है। सरकार ने तालुका को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है, लेकिन किसानों की उम्मीद है कि बात सिर्फ घोषणा तक न रहे और उन्हें असल में पर्याप्त आर्थिक मदद मिले।
गोंडपिपरी राज्य के आखिरी छोर पर बसा है और यहां के लोग बड़े पैमाने पर खेती पर निर्भर हैं। इसे पिछड़ा तालुका माना जाता है। यहां न बड़े उद्योग हैं, न बड़े कारोबार के मौके। इसी वजह से ज्यादातर परिवारों की रोजी-रोटी आज भी खेती से ही चलती है। ऐसे में सूखाग्रस्त घोषित होने से किसानों पर संकट और गहरा गया है।
इस सीजन की शुरुआत में बारिश ने अच्छी उम्मीद जगाई थी। शुरू की बारिश संतोषजनक रही, तो किसानों ने बड़ी आस के साथ बुवाई शुरू की। धान, सोयाबीन, कपास समेत कई फसलें लगाई गईं। बहुत से किसानों ने बुवाई के लिए कर्ज लिया और बीज, खाद, दवाइयों और खेत की तैयारी पर खर्च किया। उन्होंने यह जोखिम इस भरोसे पर उठाया कि बारिश साथ देगी और सीजन अच्छा जाएगा।
लेकिन बुवाई के बाद बारिश ने अचानक पीठ फेर ली। दिन-ब-दिन बारिश का गैप बढ़ता गया और धूप की तपिश तेज होती गई। नतीजा यह कि खेतों की फसलें पानी की कमी से मरणासन्न हालत में पहुंच गई हैं। कई जगह फसल की बढ़त रुक गई है और किसानों की आंखों के सामने खड़ी फसल सूख रही है। मेहनत, खर्च और कर्ज लेकर तैयार की गई फसल हाथ से निकल जाने का डर उन्हें सता रहा है।
गोंडपिपरी तालुका में कई किसान अल्पभूधारक और मध्यम भूधारक हैं। खेती से होने वाली कमाई ही उनके परिवार का गुजारा, बच्चों की पढ़ाई, सेहत का खर्च और लिए हुए कर्ज की अदायगी का सहारा होती है। इसलिए फसल का नुकसान सीधे पूरे परिवार की आर्थिक हालत पर असर डालता है। इस साल का सूखा सिर्फ फसलों का सवाल नहीं रहा, यह हजारों किसान परिवारों के जीने का सवाल बन गया है। सरकार ने तालुका को सूखाग्रस्त घोषित किया है, तो किसानों को कुछ हद तक राहत जरूर मिली है।
बोरगाव के सधन किसान अतुल झाडे ने कहा, "इस बार बारिश ने पीठ फेर ली और खड़ी फसल आंखों के सामने धूप की तपिश से सूख रही है। सरकार ने सूखाग्रस्त घोषित किया, यह बहुत अच्छी बात है। लेकिन खेत की पैदावार को ध्यान में रखकर आर्थिक मदद दी जाए।"