गिरगाव चौपाटी पर विसर्जन के दौरान थाईलैंड के सैलानियों ने की बप्पा की आरती
गणेश विसर्जन 2026 में 23 देशों के पर्यटक शामिल हुए, विदेशी मेहमान महाराष्ट्र की संस्कृति देखकर भावुक
अनंत चतुर्दशी के मौके पर मुंबई की मशहूर गिरगाव चौपाटी पर हुए गणेश विसर्जन समारोह में इस बार विदेशी सैलानियों को भी महाराष्ट्र की संस्कृति देखने और महसूस करने का मौका मिला। महाराष्ट्र सरकार के पर्यटन विभाग ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका के साथ मिलकर विदेशी पर्यटकों के लिए खास तौर पर एक अलग दालन बनाया था, जहां से आने वाले मेहमान गणेश विसर्जन के जुलूस को बिलकुल करीब से देख सके।
इस समारोह की सबसे खास बात यह रही कि दुनिया के 23 देशों से आए पर्यटक और मेहमान इसमें शामिल हुए। थाईलैंड से आए सैलानियों ने सिर्फ जुलूस देखा ही नहीं, बल्कि गणपती बप्पा की आरती में भी बड़े उत्साह से हिस्सा लिया। पारंपरिक महाराष्ट्रीयन कपड़े, ढोल ताशों की गूंज, गणेशभक्तों की भीड़ और चारों तरफ गूंज रहे 'गणपती बाप्पा मोरया' के जयघोष ने विदेशी मेहमानों को भावुक कर दिया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पर्यटन विभाग के इस आयोजन की तारीफ की। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि गणेशोत्सव अब इंटरनेशनल लेवल पर पहचान बना रहा है, और विदेशी पर्यटकों की मौजूदगी तथा विसर्जन समारोह के अनुशासित आयोजन पर उन्होंने संतोष जताया।
पर्यटन विभाग के इस खास दालन में मौजूद अधिकारियों ने भी विदेशी मेहमानों के साथ मिलकर गणपती की आरती की। इस दौरान कौशल्य, रोजगार, उद्योजकता और नाविन्यता मंत्री मंगलप्रभात लोढा, मुंबई की महापौर रितू तावडे, बृहन्मुंबई महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिडे, पर्यटन संचालनालय के डायरेक्टर विकास पानसरे के साथ साथ पर्यटन विभाग के अफसर और महाराष्ट्र पर्यटन की युवा दूत नवेली देशमुख भी मौजूद रहीं।
इटली से आए मार्को ने बताया कि उन्होंने यह समारोह पहली बार देखा और अनुभव किया। उनका कहना था कि इस उत्सव में श्रद्धा, एकता और खुशी का ऐसा संगम देखने को मिला जो उनके लिए बिलकुल नया था। लाखों भक्तों का एक साथ मिलकर 'गणपती बाप्पा मोरया' का जयघोष करना उनके लिए अविस्मरणीय पल था।
फिनलैंड से आईं जॉना सुनी ने भी कहा कि विसर्जन समारोह का यह अनुभव उनके लिए अनोखा और दिल को छू लेने वाला रहा। उनके मुताबिक ढोल ताशों की आवाज, पारंपरिक वेशभूषा, भक्तिमय माहौल और भक्तों का उत्साह देखकर उन्हें महाराष्ट्र की संस्कृति की भव्यता का अंदाजा हुआ। उन्होंने यह भी बताया कि यहां के लोगों का प्यार, अपनापन और मेहमाननवाजी उन्हें खास तौर पर पसंद आई।
पर्यटन मंत्री शंभुराज देसाई ने कहा कि गणेशोत्सव महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है। उनके मुताबिक विदेशी पर्यटकों को इस उत्सव से जोड़ने का मकसद महाराष्ट्र की परंपराओं को दुनियाभर में पहुंचाना है, और ऐसे आयोजनों से राज्य में सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई।
पर्यटन संचालनालय के डायरेक्टर विकास पानसरे के मुताबिक, इस खास दालन की वजह से विदेशी पर्यटकों को विसर्जन जुलूस करीब से देखने के साथ साथ गणेशोत्सव की भावना से जुड़ने का भी मौका मिला। कई पर्यटकों ने गणपति की खूबसूरत मूर्तियों के साथ फोटो खिंचवाकर इन पलों को अपने कैमरे में कैद किया। गिरगाव चौपाटी पर हुआ यह गणेश विसर्जन विदेशी मेहमानों के लिए सिर्फ घूमने फिरने का अनुभव नहीं रहा, बल्कि महाराष्ट्र की श्रद्धा, परंपरा, उत्सव मनाने के जज्बे और यहां की मेहमाननवाजी वाली संस्कृति को करीब से जानने का जरिया बन गया।