शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

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घुग्घुस में लॉयड्स मेटल्स पर शांतीनगर की 7 करोड़ की जमीन हड़पने का आरोप

घुग्घुस में लॉयड्स मेटल्स पर शांतीनगर की 7 करोड़ की जमीन हड़पने का आरोप तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
जुर्म PT24 टीम

घुग्घुस नगर परिषद में भाजपा की दल नेता मीना चांद मोरपाका ने कंपनी पर जमीन हड़पने और सार्वजनिक रास्ता बंद करने का आरोप लगाया है।

घुग्घुस नगर परिषद में भाजपा गुट की नेता मीना चांद मोरपाका ने लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि कंपनी ने एक प्राइवेट अस्पताल बनाने के लिए शांतीनगर के लोगों की करीब 7 करोड़ रुपये की जमीन हड़प ली और सार्वजनिक रास्ते पर संरक्षक दीवार बनाकर उसे बंद कर दिया। मोरपाका ने नगर परिषद के मुख्य अधिकारी को लिखित शिकायत देकर कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

मोरपाका की शिकायत के मुताबिक लॉयड्स मेटल्स के पीछे की तरफ पहले शांतीनगर बस्ती थी, जिसमें 55 से ज्यादा घर थे। कंपनी के विस्तार के लिए इस बस्ती की जमीन चाहिए थी, इसलिए 14 मई 1996 को कंपनी और शांतीनगर के निवासियों के बीच करार हुआ था। इस करार के तहत कंपनी को 1.38 हेक्टेयर जमीन खरीदकर परियोजना प्रभावित निवासियों को देनी थी।

आरोप है कि कंपनी ने इस जमीन पर 62 भूखंड और खुली जगह का लेआउट मंजूर करवा लिया। लेकिन इसमें से करीब 2,600 वर्ग मीटर (27,975 वर्ग फुट) जगह निवासियों को देने के बजाय "भविष्य के विकास के लिए क्षेत्र" के नाम पर रोक ली गई। मोरपाका ने शिकायत में कहा है कि इसी जगह पर अब कंपनी प्राइवेट अस्पताल का निर्माण कर रही है।

इसी जगह से चंद्रपुर मार्ग से शांतीनगर तक एक सार्वजनिक रास्ता बना था। 30 नवंबर 2019 को तत्कालीन ग्राम पंचायत ने इस रास्ते के कंक्रीटीकरण का प्रस्ताव पास किया था। इसके बाद प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के फंड से रास्ते का कंक्रीटीकरण भी हुआ। अब कंपनी ने संरक्षक दीवार खड़ी करके रास्ता रोक दिया और उसका कुछ हिस्सा तोड़ दिया, जिससे विवाद खड़ा हो गया है।

मोरपाका ने घुग्घुस नगर परिषद की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। नगर परिषद ने 29 अप्रैल 2026 को प्रस्ताव क्रमांक 14 पास करके रास्ते में बदलाव की इजाजत दी थी। मोरपाका का आरोप है कि सार्वजनिक रास्ता बंद करने से पहले कानून के हिसाब से जरूरी 30 दिन की पूर्व सूचना और आपत्तियां मंगाने की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।

इसके बाद 30 अप्रैल को नगर परिषद ने सार्वजनिक सूचना जारी की। इस सूचना पर अमित बोरकर समेत दो लोगों ने आपत्तियां दर्ज कराईं। 29 जून 2026 को प्रस्ताव क्रमांक 19 पास हुआ, जिसमें पार्षदों, शांतीनगर के निवासियों और कंपनी के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाकर विशेष साधारण सभा में फैसला लेने की बात तय हुई थी। मोरपाका ने साफ किया कि उसके बाद अंतिम फैसला करने वाला कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ है।

इसलिए मोरपाका का दावा है कि कंपनी को सार्वजनिक रास्ता बंद करने या उस जगह को अस्पताल के निर्माण में इस्तेमाल करने की आखिरी इजाजत मिली ही नहीं है। उन्होंने मांग की है कि चल रहा निर्माण रोका जाए, सार्वजनिक रास्ता पहले जैसा किया जाए, विवादित जमीन मूल हालत में लाई जाए और कंपनी के साथ नगर परिषद प्रशासन की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच हो।

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