मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
17:59 IST

गेर्बेरा ड्रोन खतरा: सीआईए ने यूरोप को चेताया, इटली-जर्मनी-फ्रांस पर रूसी हमले का डर

सीआईए की चेतावनी के बाद स्पेन, फ्रांस और इटली में हाई-अलर्ट, व्यापारी जहाजों से ड्रोन हमले की आशंका

गेर्बेरा ड्रोन खतरा: सीआईए ने यूरोप को चेताया, इटली-जर्मनी-फ्रांस पर रूसी हमले का डर
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

दुनिया की राजनीति में एक नए बड़े टकराव के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका की मशहूर खुफिया एजेंसी सीआईए ने यूरोपीय देशों को एक बड़े और गंभीर खतरे को लेकर अलर्ट किया है। स्पेनिश अखबार एल मुंडो की एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस, यूरोप के प्रमुख नाटो देशों के टूरिस्ट स्पॉट, बंदरगाहों और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने के लिए व्यापारी जहाजों के जरिए छुपे तरीके से गेर्बेरा ड्रोन से हमला करने की योजना बना रहा है। इस चेतावनी के बाद स्पेन, फ्रांस और इटली समेत पूरे यूरोप में हाई-अलर्ट जारी कर दिया गया है।

यूक्रेन-रूस जंग के बीच पश्चिमी देश यूक्रेन को लगातार सैनिक और आर्थिक मदद दे रहे हैं। इसी मदद का बदला लेने और यूरोपीय देशों पर राजनीतिक और आर्थिक दबाव बनाने के लिए रूस सीधी लड़ाई की जगह छुपे और सीमित हाइब्रिड हमलों का रास्ता अपना सकता है, ऐसा माना जा रहा है। खुफिया रिपोर्ट में शुरुआती अंदाजा लगाया गया है कि रूस भूमध्य सागर से गुजरने वाले इंटरनैशनल व्यापारी जहाजों का इस्तेमाल करके ऐसी कार्रवाई कर सकता है।

यह खतरा किस तरह का हो सकता है, इसके बारे में लिथुआनिया के डिफेंस मिनिस्ट्री के सूत्रों के हवाले से अहम जानकारी सामने आई है। रूस इस काम के लिए अपने देश में बने गेर्बेरा नाम के मानवरहित ड्रोन का इस्तेमाल कर सकता है। सिर्फ 2 मीटर लंबे और लगभग 18 किलोग्राम वजन वाले इस ड्रोन में 4 से 5 किलोग्राम तक विस्फोटक ले जाने की क्षमता है। इस ड्रोन की मारक क्षमता करीब 600 किलोमीटर है और आकार छोटा होने की वजह से इसे कमर्शियल शिपिंग कंटेनर में आसानी से छुपाया जा सकता है।

आम कार्गो का हिस्सा बताकर इन ड्रोन को जहाजों पर समुद्र में लाया जा सकता है और वहां से कैटापुल्ट की मदद से हवा में उड़ाया जा सकता है। इस ड्रोन का मकसद बड़ी तबाही मचाना नहीं, बल्कि तटीय इलाकों के अहम एयरपोर्ट, एनर्जी सेंटर या बंदरगाहों के काम में कुछ वक्त के लिए रुकावट डालना, छोटी-बड़ी आग लगाना और यूरोप की अंदरूनी सुरक्षा को चुनौती देना है। इससे रूस को सीधे जिम्मेदारी नकारने का मौका भी मिल जाता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सीआईए डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ ने अगस्त महीने में अचानक मॉस्को का दौरा किया था। इस दौरे के दौरान और बाद में जुटाई गई संवेदनशील जानकारी के आधार पर अमेरिका ने यह संभावित खतरे की जानकारी अपने यूरोपीय पार्टनर देशों के साथ शेयर की। इस जानकारी की गंभीरता की वजह से यूरोपीय देशों के राजनीतिक हलकों में बड़ी हलचल मच गई है।

खासतौर पर फ्रांस में यह खतरा साफ नजर आ रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस संभावित साइबर, ड्रोन और आतंकी खतरे पर बात करने के लिए देश के बड़े राजनीतिक नेताओं के साथ मीटिंग बुलाई और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर की सिक्योरिटी तुरंत बढ़ाने के निर्देश दिए। दूसरी तरफ इटली की डिफेंस मिनिस्ट्री ने कहा है कि वह इन रिपोर्ट्स पर बारीकी से नजर रख रही है, लेकिन उनके स्तर पर किसी असली हमले की ऑफिशियल पुष्टि नहीं हुई है। इसी वजह से अभी इस रिपोर्ट को सिर्फ एक बहुत जरूरी खुफिया अलर्ट के तौर पर देखा जा रहा है।

आने वाले कुछ महीनों में यूरोपीय देशों में चुनाव और दूसरी अहम घटनाएं होनी हैं। ऐसे वक्त में टूरिज्म और आर्थिक तौर पर अहम भूमध्य सागर इलाके को निशाना बनाकर लोगों में डर का माहौल बनाने की कोशिश हो सकती है, एक्सपर्ट्स का यह अंदाजा है। सीधी जंग किए बिना ग्रे-जोन कार्रवाइयों के जरिए यूरोपीय यूनियन और नाटो की सिक्योरिटी को कमजोर करने की यह रूस की चाल मानी जा रही है। अभी तक किसी सीधे हमले का ऑफिशियल एलान नहीं हुआ है, लेकिन इस अलर्ट के बाद पश्चिमी देशों की सारी सिक्योरिटी एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई हैं।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे