बुधवार, 7 अक्टूबर 2026

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18:49 IST

गौ विज्ञान केंद्र को 'गो टुरिझम' का दर्जा, भागवत ने सौंपा प्रमाणपत्र

गौ विज्ञान केंद्र को 'गो टुरिझम' का दर्जा, भागवत ने सौंपा प्रमाणपत्र तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर में विश्व हिंदू परिषद के गौ विज्ञान केंद्र को 'गौ टुरिझम' का दर्जा दिया गया है। इस दर्जे का प्रमाणपत्र राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के हाथों केंद्र के पद्मेश गुप्ता को सौंपा गया। इसी मौके पर बोलते हुए भागवत ने समाज से एक खास अपील की।

भागवत ने संघ के एक गीत का जिक्र किया, जिसका भाव है कि बोले हुए शब्द मिट जाते हैं, लेकिन सत्कर्म अमर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि गौ विज्ञान केंद्र और विश्व हिंदू परिषद जो काम कर रहे हैं, वह बेशक कीमती है। लेकिन समाज की जरूरत को देखें तो गौ-सेवा का यह काम अकेला काफी नहीं है। उनके मुताबिक हम सबको अपनी खुद की सुरक्षा और धर्म की सुरक्षा के लिए यह काम करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि समाज को उत्सव पसंद हैं और वह उनमें जोश से शामिल भी होता है। मगर जो काम करना चाहिए, उसे मैं नहीं, कोई दूसरा करे, समाज की ऐसी उम्मीद रहती है। धर्म की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए भगवान अवतार लें, हम नहीं करेंगे, हमारी तो नौकरी है, हमारे पास और काम हैं, ऐसी सोच भी दिखती है। भागवत ने कहा कि जब भी धर्म रक्षा का यह काम हुआ, तब पूरे समाज की कोशिश उसमें लगी थी। क्या होगा और मेरा क्या होगा, इसकी फिक्र किए बिना पूरी ताकत से देश और समाज के लिए काम करना चाहिए, यही उनकी अपील थी।

सरसंघचालक ने यह भी कहा कि जो कुछ मैं कमाता हूं, उसमें से कुछ हिस्सा समाज को देना मेरा फर्ज है। ऐसा हुआ तभी साबित होगा कि हम अपने महापुरुषों के कदमों पर चल रहे हैं।

राज्य के अर्थ राज्यमंत्री आशिष जयस्वाल ने कहा कि देवलापार इलाका अभयारण्य और यहां के बाघों के लिए पहले से मशहूर था। अब यहां के गौ विज्ञान केंद्र और उसकी रिसर्च को जानने के लिए भी लोग आएंगे। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने देवलापार के गौ विज्ञान केंद्र को गौ-तीर्थ का दर्जा दिया है। इससे आने वाले दिनों में यहां की रिसर्च के लिए सरकारी फंड देना मुमकिन होगा। जयस्वाल ने यह भी कहा कि इस समय सूखे के हालात हैं, इसलिए अलग-अलग जिलों में जो CFR जमीन है, उस पर चारे की खेती करने का विचार है।

विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने अशोक सिंघल को याद किया। उन्होंने कहा कि आज 1990 की याद आती है। तब के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने अयोध्या में और अयोध्या की ओर आने वाले हर रास्ते पर कई रुकावटें और दिक्कतें खड़ी की थीं। फिर भी हिंदू समाज ने वह चुनौती कबूल की। अयोध्या के लोगों ने कारसेवकों का साथ दिया और उन्हें पनाह दी। आलोक कुमार के मुताबिक अशोक सिंघल मोटरसाइकिल पर बैठकर वहां पहुंचे। उनके सिर पर ईंट लगी, पर उसकी परवाह न करते हुए वे कारसेवा में डटे रहे। घायल सिंघल ने उस दिन हिंदू समाज को हिम्मत दी और जीत का भाव दिया।

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