मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:00 IST

गरुड पुराण: शाम को घर में झाड़ू क्यों नहीं लगाना चाहिए, जानें क्या है वजह

धार्मिक मान्यताओं में सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू लगाने को अशुभ माना गया है, इसके पीछे की वजह जानिए

गरुड पुराण: शाम को घर में झाड़ू क्यों नहीं लगाना चाहिए, जानें क्या है वजह
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

घर की सफाई सिर्फ सेहत के लिए ही जरूरी नहीं मानी जाती, बल्कि हिंदू धर्म की परंपराओं में भी इसका खास महत्व बताया गया है। सुबह के वक्त घर झाड़ना और साफ-सफाई करना शुभ माना जाता है, जबकि सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू लगाने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके पीछे धनदेवता लक्ष्मी, घर की सकारात्मक ऊर्जा और पूर्वजों से जुड़ी कुछ धार्मिक मान्यताएं बताई जाती हैं।

गरुड पुराण में मृत्यु के बाद के संस्कार, दान-धर्म और आचार-विचार को लेकर कई नियमों का जिक्र मिलता है। लेकिन आज जो 'सूर्यास्त के बाद झाड़ू न लगाने' की प्रथा प्रचलित है, वह गरुड पुराण में शब्दशः लिखी गई हो, ऐसा पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता।

तो फिर सूर्यास्त के बाद झाड़ू लगाने से क्यों बचा जाता है? इसकी एक वजह पुराने जमाने से जुड़ी है। पहले के समय में घरों में आज जैसी पर्याप्त कृत्रिम रोशनी नहीं होती थी। ऐसे में सूर्यास्त के बाद झाड़ू लगाते वक्त कीमती चीजें, अनाज या घर की कोई छोटी वस्तु कचरे के साथ बाहर जाने की आशंका रहती थी। इस व्यावहारिक वजह के साथ धीरे-धीरे इस प्रथा को धार्मिक मान्यता भी जुड़ गई। मान्यता है कि शाम का वक्त लक्ष्मी के आगमन का समय होता है, इसलिए इस दौरान घर से केर-कचरा बाहर निकालने पर घर की समृद्धि भी बाहर चली जाती है, ऐसी श्रद्धा है।

हिंदू परंपरा में साफ-सुथरा और व्यवस्थित घर लक्ष्मी को प्रिय माना जाता है, इसीलिए सुबह घर साफ करके कचरा बाहर निकालने की प्रथा है। लेकिन शाम को झाड़ू लगाने से घर का धन-धान्य और सुख-समृद्धि बाहर जा सकती है, ऐसी धार्मिक मान्यता है। यह सिर्फ एक परंपरा का हिस्सा है।

गरुड पुराण में जीवन, मृत्यु, कर्म, दान, धर्म और मृत्यु के बाद की यात्रा से जुड़े कई धार्मिक और दार्शनिक विचार बताए गए हैं। मगर 'सूर्यास्त के बाद घर में झाड़ू न लगाने' का नियम गरुड पुराण में सीधे और साफ तौर पर लिखा है, ऐसा कहना ठीक नहीं होगा। इस प्रथा को अलग-अलग लोक परंपराओं, घरेलू रीति-रिवाजों और धार्मिक मान्यताओं ने आगे बढ़ाया है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई बार शाम या रात के वक्त भी घर साफ करना जरूरी हो जाता है। ऐसे में सेहत और सफाई को पहले रखना ही सही है। जो परिवार धार्मिक मान्यता निभाना चाहते हैं, उनमें कचरे को उसी वक्त बाहर न फेंककर एक जगह जमा करके अगली सुबह बाहर डालने का तरीका अपनाया जाता है। मगर यह कोई सबके लिए बंधनकारी धार्मिक नियम नहीं है, यह हर परिवार की अपनी परंपरा के हिसाब से बदल सकता है।

सूर्यास्त के बाद झाड़ू न लगाने की मान्यता भले ही हो, लेकिन घर में कचरा जमा होने देना सही नहीं है। गीला कचरा, बचा हुआ खाना या बदबू वाला कचरा हो तो सेहत के लिहाज से उसे समय पर बाहर निकालना जरूरी है। इसलिए धार्मिक परंपरा निभाते हुए सफाई, सेहत और आज की जीवनशैली के बीच सही संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

कुल मिलाकर, सूर्यास्त के बाद झाड़ू न लगाने की प्रथा मुख्य रूप से धार्मिक और लोक परंपरा से जुड़ी है। इसके पीछे यही मान्यता है कि इससे लक्ष्मी घर से चली जाती है या धन-संपत्ति कम हो जाती है।

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