मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
18:20 IST

गांजा, चरस और अफीम में फर्क क्या है, नशा दिमाग के डोपामिन सिस्टम को कैसे बिगाड़ता है

गांजा, चरस और अफीम अलग-अलग तरह के नशीले पदार्थ हैं, और THC दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम पर असर डालकर डोपामिन सिग्नलिंग बदल देता है।

गांजा, चरस और अफीम में फर्क क्या है, नशा दिमाग के डोपामिन सिस्टम को कैसे बिगाड़ता है
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

गांजा और चरस दोनों कैनॅबिस के पौधे से ही निकलते हैं, लेकिन दोनों की बनावट अलग है। गांजा कैनॅबिस के फूल वाले हिस्से से बनता है, जबकि चरस उसी पौधे से मिलने वाला राल जैसा पदार्थ है। अफीम इनसे बिलकुल अलग है, यह अफीम के पौधे से मिलने वाला ओपिऑइड ग्रुप का नशा है। इसके अलावा हेरॉइन, कोकेन, मेथएम्फेटामाइन, MDMA और LSD भी अलग-अलग रासायनिक ग्रुप के नशीले पदार्थ माने जाते हैं। इन सबके उत्पादन, बिक्री, तस्करी और सेवन पर भारत में NDPS Act, 1985 के तहत सख्त सजा का प्रावधान है। हालांकि कानून में कुछ मेडिकल और वैज्ञानिक इस्तेमाल के लिए परमिशन का भी रास्ता है, और लाइसेंस लेकर अफीम की खेती भी सीमित दायरे में की जा सकती है।

NDPS कानून का मकसद नशीले पदार्थों के गलत इस्तेमाल, गैरकानूनी ढुलाई और तस्करी पर रोक लगाना है, साथ ही इलाज और पुनर्वास को बढ़ावा देना भी इसमें शामिल है। गांजा, चरस और बाकी कैनॅबिस पदार्थों पर केंद्र का कानून भले लागू हो, मगर भांग जैसे पेय पदार्थों को लेकर हर राज्य के अपने अलग नियम हो सकते हैं। इसलिए यह कहना ठीक नहीं होगा कि भारत में सारे कैनॅबिस पदार्थ पूरी तरह एक जैसे तरीके से बैन हैं।

गांजे में मौजूद THC दिमाग के कैनॅबिनॉइड रिसेप्टर्स पर असर करता है। इससे रिवॉर्ड सिस्टम एक्टिव हो जाता है और डोपामिन का सिग्नलिंग बढ़ सकता है, जिससे कुछ लोगों को खुशी, उत्साह या "हाय" वाली फीलिंग आती है। लेकिन सिर्फ डोपामिन ही इसमें शामिल नहीं है। THC दिमाग के हिप्पोकैम्पस, फ्रंटल हिस्से, सेरेबेलम जैसे कई भागों पर असर डालता है, जिससे याददाश्त, ध्यान, फैसला लेने की क्षमता, रिएक्शन टाइम और शरीर का तालमेल भी बिगड़ सकता है।

दिमाग का विकास आमतौर पर करीब 25 साल की उम्र तक चलता रहता है। इसी वजह से किशोरावस्था में बार-बार कैनॅबिस लेने से ध्यान, सीखने की क्षमता और याददाश्त पर असर पड़ने का खतरा ज्यादा माना जाता है। भारत के एक राष्ट्रीय सर्वे के मुताबिक 10 से 17 साल की उम्र के करीब 20 लाख बच्चे कैनॅबिस और 40 लाख बच्चे ओपिऑइड्स लेते पाए गए थे। यह आंकड़ा 2018 के डेटा पर आधारित उपलब्ध राष्ट्रीय सर्वे का है।

गैरकानूनी तस्करी की असल मात्रा नापना मुश्किल होता है, इसलिए जब्ती के आंकड़ों को ही तस्करी का एक अहम संकेत माना जाता है। NCB के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक देशभर में 5,33,903 किलो गांजा, 6,483 किलो हशीश और 2,595.63 किलो हेरॉइन जब्त किया गया था। महाराष्ट्र में उसी साल 55,351 किलो गांजा और 2,177.49 किलो मेफेड्रोन जब्त हुआ था।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे