गांधी जयंती पर पुणे की वे तीन जगहें, जहां महात्मा गांधी के निशान आज भी हैं
येरवडा जेल, पर्णकुटी और आगा खान पैलेस: पुणे में गांधीजी के कारावास, उपवास और नजरबंदी की जगहें।
महात्मा गांधी की जिंदगी के सफर में पुणे की खास जगह है। आजादी की लड़ाई, समाज सुधार पर उनका जोर, उपवास, जेल और अस्पृश्यता मिटाने के काम से पुणे की कई जगहें जुड़ी हैं। इसीलिए गांधी जयंती के मौके पर पुणे के इन ऐतिहासिक निशानों को फिर से देखना जरूरी हो जाता है। (पुणे/गायत्री पवळे)
गांधीजी के पुणे से रिश्ते में सबसे पहले येरवडा जेल का जिक्र करना पड़ता है। 1922 में राजद्रोह के मुकदमे में सजा होने के बाद उन्हें येरवडा जेल में भेजा गया था। 1930 में दांडी मार्च के बाद भी उन्हें येरवडा जेल ही भेजा गया। सितंबर 1932 में उन्होंने इसी जेल में सांप्रदायिक निर्णय (जातीय निवाड़ा) के विरोध में उपवास किया।
येरवडा के पास की पर्णकुटी भी पुणे में गांधीजी के ठहरने की एक अहम जगह है। गांधी हेरिटेज पोर्टल के मुताबिक गांधीजी 1933 से 1944 के बीच कई बार पर्णकुटी में रुके। 8 से 28 मई 1933 के दौरान उन्होंने यहां 21 दिन का आत्मशुद्धि का उपवास किया।
1934 में पुणे में अपने सत्कार के कार्यक्रम में जाते वक्त उनकी मोटर पर बम फेंका गया। गांधीजी दूसरी मोटर में सफर कर रहे थे, इसलिए इस हमले में वे बच गए।
पुणे के इतिहास का सबसे भावुक अध्याय आगा खान पैलेस से जुड़ा है। 'भारत छोड़ो' आंदोलन के बाद 9 अगस्त 1942 से गांधीजी, कस्तूरबा गांधी और उनके साथी यहां नजरबंद रहे। इसी दौरान 15 अगस्त 1942 को महादेव देसाई और 22 फरवरी 1944 को कस्तूरबा गांधी का निधन हुआ। दोनों का अंतिम संस्कार आगा खान पैलेस के परिसर में किया गया। इसी जगह गांधीजी ने 1943 में 21 दिन का उपवास किया। 6 मई 1944 को उनकी रिहाई हुई।
इन इमारतों के जरिए पुणे सिर्फ गांधीजी के राजनीतिक संघर्ष का गवाह नहीं रहा, बल्कि सत्याग्रह, अहिंसा, स्वावलंबन और सामाजिक समानता के विचारों का भी गवाह बना। आज आगा खान पैलेस को भारतीय आजादी की लड़ाई से जुड़ी धरोहर के तौर पर संभालकर रखा जा रहा है। 1969 में आगा खान ने यह इमारत भारत की जनता को सौंप दी थी।
गांधी जयंती पर इसलिए पुणे को सिर्फ 'गांधी की यादों का शहर' कहने के बजाय ऐसे शहर के रूप में देखा जा सकता है, जो इतिहास की जीवित निशानियां संभाले हुए है। येरवडा, पर्णकुटी और आगा खान पैलेस, ये तीनों जगहें गांधीजी की जिंदगी के अलग-अलग दौर बताती हैं: जेल की सजा, सामाजिक चिंतन और आजादी की लड़ाई का निर्णायक संघर्ष।