मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:48 IST

एमबीए या पीजीडीएम: दोनों कोर्स में क्या फर्क है और किसके लिए कौन सा ठीक रहेगा

बिजनेस और मैनेजमेंट की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के सामने अक्सर सवाल आता है कि एमबीए करें या पीजीडीएम। डिग्री, सिलेबस, एडमिशन और फीस के आधार पर दोनों कोर्स की तुलना।

एमबीए या पीजीडीएम: दोनों कोर्स में क्या फर्क है और किसके लिए कौन सा ठीक रहेगा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

बिजनेस और मैनेजमेंट में आगे पढ़ना चाहने वाले विद्यार्थियों के सामने एक सवाल बार-बार खड़ा होता है: एमबीए (MBA) किया जाए या पीजीडीएम (PGDM)? दोनों कोर्स मैनेजमेंट से जुड़े हैं और करियर के मौकों में भी इनके बीच ज्यादा फर्क नहीं है। फिर भी कुछ बारीक बातों में दोनों अलग दिखते हैं। यहां दोनों कोर्स को एक-एक करके समझते हैं।

सबसे पहले डिग्री और डिप्लोमा का फर्क। एमबीए एक 'डिग्री कोर्स' है, जो आम तौर पर यूनिवर्सिटी चलाती हैं। डिग्री होने की वजह से कॉर्पोरेट जगत में इसे पारंपरिक और बड़ी मान्यता मिलती है।

पीजीडीएम एक 'डिफरंट डिप्लोमा कोर्स' है, जिसे ज्यादातर ऑटोनॉमस बी-स्कूल चलाते हैं, जैसे IIMs, XLRI और SP Jain। यह डिप्लोमा जरूर है, लेकिन देश के टॉप मैनेजमेंट संस्थान इसी कोर्स के लिए जाने जाते हैं। इसलिए इसकी प्रोफेशनल कीमत एमबीए जितनी या कुछ मामलों में उससे ज्यादा मानी जाती है।

अब सिलेबस और प्रैक्टिकल पढ़ाई की बात। एमबीए यूनिवर्सिटी से जुड़ा होता है, इसलिए उसका सिलेबस ज्यादा सैद्धांतिक और पारंपरिक रहता है। कई बार यूनिवर्सिटी के सिलेबस पुराने ढर्रे के होते हैं और उन्हें बदलने में कुछ साल लग जाते हैं।

पीजीडीएम का सिलेबस इंडस्ट्री यानी उद्योग जगत की ताजा जरूरतों के हिसाब से हर साल अपडेट होता है। इसमें किताबी ज्ञान के मुकाबले प्रैक्टिकल ज्ञान, इंडस्ट्री प्रोजेक्ट और मैनेजमेंट स्किल्स बढ़ाने पर ज्यादा जोर रहता है। जो विद्यार्थी उद्यमी बनना चाहते हैं, या कॉर्पोरेट दुनिया में जल्दी रम जाना चाहते हैं, उनके लिए यह अच्छा विकल्प हो सकता है।

एडमिशन का रास्ता दोनों कोर्स के लिए लगभग एक जैसा है। CAT, XAT, MAT, ATMA, CMAT और MAH-CET जैसी राष्ट्रीय और राज्य स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के आधार पर ही दोनों में दाखिला मिलता है।

अब ट्यूशन फीस। सरकारी या यूनिवर्सिटी से जुड़े कॉलेजों से एमबीए करने पर सरकार से अनुदान मिलता है, इसलिए फीस तुलना में कम रहती है।

पीजीडीएम की फीस आम तौर पर ज्यादा होती है, क्योंकि ऑटोनॉमस बी-स्कूल चलाते हैं और विद्यार्थियों को पूरे खर्च का हिसाब खुद बैठाना पड़ता है। हालांकि कुछ टॉप एमबीए कॉलेजों की फीस भी पीजीडीएम जितनी या उससे ज्यादा हो सकती है।

कुल मिलाकर, अगर आपको पारंपरिक यूनिवर्सिटी की डिग्री चाहिए और पढ़ाई बजट में करनी है, तो एमबीए ठीक रहता है। लेकिन अगर आप इंडस्ट्री से जुड़ी प्रैक्टिकल पढ़ाई, अपडेटेड सिलेबस और टॉप बी-स्कूल से सीखना चाहते हैं, तो पीजीडीएम बेहतर विकल्प हो सकता है।

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