मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:34 IST

एल निनो का खतरा: अगले छह महीने में दुनियाभर में 4.5 लाख मौतों की आशंका, भारत को भी चेतावनी

शिकागो यूनिवर्सिटी की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब की रिपोर्ट में भारत समेत एशिया, अफ्रीका के देशों को गर्मी से होने वाली मौतों को लेकर आगाह किया गया है।

एल निनो का खतरा: अगले छह महीने में दुनियाभर में 4.5 लाख मौतों की आशंका, भारत को भी चेतावनी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

दुनियाभर के मौसम वैज्ञानिकों ने एक बड़ी चेतावनी दी है। ग्लोबल वॉर्मिंग और बदलते मौसम के बीच पैसिफिक महासागर में एक बेहद ताकतवर एल निनो बनता दिख रहा है, और इसका असर सितंबर 2026 से फरवरी 2027 तक, यानी अगले छह महीनों में दिखने वाला है। शिकागो यूनिवर्सिटी की मशहूर क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब ने अपनी नई स्टडी में बताया है कि इस तीव्र एल निनो की वजह से दुनियाभर में भीषण गर्मी की लहर आ सकती है, जिसमें 4 लाख 50 हजार से ज्यादा अतिरिक्त लोगों की जान जाने का खतरा है।

एल निनो असल में एक प्राकृतिक मौसमी घटना है, जो मध्य और पूर्वी पैसिफिक महासागर के पानी का तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ने पर बनती है। समंदर की इस असामान्य गर्मी की वजह से दुनियाभर की हवाओं, बारिश और मौसम के पूरे चक्र में उलटफेर हो जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार बन रहा एल निनो पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक है। पैसिफिक महासागर का तापमान पहले ही सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ चुका है, और इंसानी गतिविधियों की वजह से पहले से बढ़ा हुआ ग्लोबल तापमान इस घटना से और खतरनाक स्तर पर पहुंच सकता है।

क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के सह-संस्थापक माइकल ग्रीनस्टोन की अगुवाई में हुई इस स्टडी में दुनियाभर के 24,378 अलग-अलग इलाकों के तापमान और गर्मी से होने वाली अतिरिक्त मौतों के बीच के संबंध का गहराई से विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इस भीषण गर्मी की सबसे ज्यादा मार एशिया और अफ्रीका के देशों पर पड़ेगी। अफ्रीका के साहेल इलाके में करीब 66,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है, जिसमें अकेले नाइजीरिया में 31,400 और सूडान में 17,600 लोगों की जान जा सकती है।

भारत के लिए भी यह रिपोर्ट चिंता की बात है। रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ गर्मी की लहर और अचानक बढ़े तापमान की वजह से भारत में करीब 15,800 अतिरिक्त लोगों की मौत होने का अंदाजा लगाया गया है। सबसे अहम बात यह है कि इनमें से ज्यादातर मौतें दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच, यानी सर्दी के महीनों में होने की आशंका है, जब अचानक गर्मी बढ़ने से लोग ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। भारत के पड़ोसी और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों जैसे इंडोनेशिया (19,300 मौतें), फिलीपींस, वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया में मिलाकर 19,400 से ज्यादा मौतों का खतरा जताया गया है। दक्षिण अमेरिका में ब्राजील में 13,300 और अमेरिका में करीब 3,500 लोगों की जान जा सकती है।

वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि 4.5 लाख का यह आंकड़ा सिर्फ सीधी गर्मी की वजह से होने वाली मौतों का है। इसमें एल निनो की वजह से आने वाले सूखे, बेमौसम बारिश, बाढ़ और जंगलों की आग से होने वाले नुकसान शामिल नहीं हैं। एल निनो के असर से दुनिया के कुछ हिस्सों में भयंकर सूखा पड़ेगा और खेती को भारी नुकसान होगा, तो कहीं तेज बारिश और बाढ़ से लोग बेघर हो सकते हैं। इसका सीधा असर खाने-पीने की चीजों, पीने के पानी और अस्पतालों की व्यवस्था पर पड़ेगा। हालांकि मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक यह आंकड़ा तय नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी है। समय रहते कदम उठाए जाएं तो जान-माल का नुकसान काफी हद तक टाला जा सकता है। इसके लिए स्थानीय प्रशासन को हीट वॉर्निंग सिस्टम दुरुस्त करना होगा, शहरों में कूलिंग सेंटर बनाने होंगे, अस्पतालों में इमरजेंसी की तैयारी रखनी होगी और तेज धूप में बाहर काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा के लिए नियम लागू करने होंगे।

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