एल निनो का असर: दुनियाभर में गर्मी से साढ़े चार लाख से ज्यादा मौतों का अंदाजा
जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच गर्मी से होने वाली अतिरिक्त मौतों का अंदाजा एल निनो के असर की वजह से लगाया गया है।
'गॉडझिला एल निनो' कहे जाने वाले बेहद ताकतवर El Nino मौसम पैटर्न की वजह से दुनियाभर में तापमान में बड़ी बढ़ोतरी होने की संभावना जताई गई है। इस बढ़ती गर्मी का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ सकता है। जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच गर्मी से जुड़ी लगभग 4 लाख 51 हजार अतिरिक्त मौतें होने का अंदाजा लगाया गया है। साफ कर दिया जाए कि यह आंकड़ा पक्का नहीं है, बल्कि मौसम के अंदाजों पर आधारित एक संभावित प्रोजेक्शन है।
इस El Nino की वजह से सामान्य सालों के मुकाबले दुनियाभर में सबसे गर्म दिनों की संख्या करीब 44 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। तापमान में यह बढ़ोतरी खासकर उन इलाकों के लिए चिंता की बात है जहां वैसे भी गर्मी ज्यादा रहती है और जो क्लाइमेट चेंज से पहले ही प्रभावित हैं। लंबे समय तक तापमान ज्यादा रहा तो हीट स्ट्रोक, हार्ट की बीमारी और सांस से जुड़ी परेशानियां बढ़ने का खतरा रहता है। बुजुर्ग, छोटे बच्चे और खुले में काम करने वाले मजदूरों पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है।
इस अंदाजे के मुताबिक अफ्रीका के साहेल इलाके, दक्षिण-पूर्व एशिया, भारत और ब्राजील जैसे इलाकों में गर्मी का असर सबसे ज्यादा दिखने की संभावना है। नाइजीरिया, इंडोनेशिया और सूडान में भी गर्मी से जुड़ी अतिरिक्त मौतों की संख्या बड़ी हो सकती है।
इसलिए आने वाले कुछ महीनों में गर्मी से बचाव के लिए पब्लिक हेल्थ सिस्टम, पानी की सप्लाई और इमरजेंसी सर्विसेज के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। इस बीच, El Nino के असर से दुनिया के तापमान के लेवल पर भी फर्क पड़ने की संभावना मौसम के जानकारों ने जताई है।
'गॉडझिला एल निनो' का असर सिर्फ तापमान बढ़ने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पब्लिक हेल्थ के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन सकता है। लंबे वक्त तक तेज गर्मी रहने पर शरीर में पानी की कमी, हीट स्ट्रोक, ब्लड प्रेशर और हार्ट से जुड़ी समस्याएं बढ़ने की संभावना रहती है।
खासकर बुजुर्गों, छोटे बच्चों, प्रेग्नेंट महिलाओं और धूप में काम करने वाले मजदूरों को ज्यादा ध्यान रखना होगा। बढ़ते तापमान की वजह से अस्पतालों पर भी दबाव बढ़ सकता है। इसीलिए संभावित हीट वेव से पहले प्रशासन को पानी की सप्लाई, हेल्थ सुविधाओं और लोगों को जागरूक करने के उपायों को मजबूत करने की जरूरत बताई जा रही है।