एआई से बने विज्ञापनों पर ASCI की नई गाइडलाइंस, तीन महीने बाद लागू होंगी
ASCI ने विज्ञापनों में सिंथेटिकली जनरेटेड कंटेंट के लेबल को लेकर गाइडलाइंस जारी की हैं। ये गाइडलाइंस तीन महीने बाद लागू होंगी।
एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया यानी ASCI ने आज विज्ञापनों में सिंथेटिकली जनरेटेड कंटेंट (SGC) को सही तरीके से लेबल करने के लिए गाइडलाइंस जारी की हैं। इनमें तय किया गया है कि विज्ञापन देने वालों को कृत्रिम तरीके से बनाए गए कंटेंट का इस्तेमाल कब बताना जरूरी है और कौन सा कंटेंट इस्तेमाल करने की इजाजत ही नहीं है। मई महीने में एक मसौदा जारी किया गया था। उस पर भागधारकों से बातचीत हुई और उसके बाद अंतिम गाइडलाइंस घोषित की गईं।
ब्रांड्स विज्ञापन बनाने और उन्हें सुधारने के लिए बड़े पैमाने पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये गाइडलाइंस इस बात पर ध्यान देती हैं कि कंटेंट का ग्राहकों पर क्या असर पड़ता है। बेवजह की उम्मीदें जगाना, कमजोर तबकों का फायदा उठाना, असुरक्षित हालात दिखाना, बिना मंजूरी किसी व्यक्ति के रूप का इस्तेमाल करना या झूठी और गुमराह करने वाली जानकारी देना, इन वजहों से SGC गुमराह करने वाला या नुकसानदेह हो सकता है। SGC इस्तेमाल करने वाले सभी विज्ञापनों को ASCI कोड का पालन करना जरूरी है।
गाइडलाइंस जारी होने की तारीख से तीन महीने बाद लागू होंगी। इनमें चार बड़े हिस्से साफ किए गए हैं, ताकि विज्ञापन देने वाले समझ सकें कि जानकारी कब देनी है और SGC के कौन से इस्तेमाल मंजूर नहीं हैं।
पहला हिस्सा प्रतिबंधित कंटेंट का है। जो विज्ञापन गैरकानूनी हैं, हक का उल्लंघन करते हैं, गुमराह करने वाले दावे करते हैं या ASCI कोड तोड़ते हैं, उन पर AI लेबल लगा होने के बावजूद पाबंदी बनी रहेगी। इसमें नकली सिफारिशें या प्रशंसापत्र बनाना शामिल है। सिंथेटिक प्रस्तुति के जरिए प्रोडक्ट के नतीजे या खूबियां गुमराह करने वाले ढंग से बताना भी इसी में आता है। ग्राहकों को गुमराह करने के लिए जो जगहें या बैकग्राउंड असल में हैं ही नहीं, उन्हें सच बनाकर दिखाना, बिना इजाजत कॉपीराइट सामग्री लेना, और बिना मंजूरी डीपफेक या किसी व्यक्ति की फोटो का इस्तेमाल करना भी इसमें गिना गया है।
दूसरा हिस्सा उस कंटेंट का है जिस पर लेबल लगाना जरूरी है। जहां SGC ग्राहकों के फैसलों पर असर डालता है और बताए बिना ग्राहक गुमराह हो सकते हैं, वहां लेबल अनिवार्य है। इसमें कृत्रिम तरीके से बनाए गए इन्फ्लुएंसर्स और ब्रांड एम्बेसडर्स का इस्तेमाल आता है। पर्सनलाइज्ड मैसेज के लिए मंजूरी के साथ किसी असली व्यक्ति के चेहरे या आवाज की नकल करना भी इसी में है। विज्ञापन किए गए प्रोडक्ट या सर्विस के बारे में ग्राहकों पर असर डाल सकने वाली नकली घटनाएं या बैकग्राउंड दिखाना, और ऐसे प्रोडक्ट्स का डेमो दिखाना जो अभी मौजूद नहीं हैं, यह भी शामिल है। SGC से बने साउंड इफेक्ट्स, जो हेडफोन्स जैसे प्रोडक्ट की मुख्य खूबियों से गहरा नाता रखते हैं, उन पर भी लेबल जरूरी है। पैसे देकर या स्पॉन्सर्ड AI से बनी प्रोडक्ट सिफारिशों पर साफ तौर पर "स्पॉन्सर्ड बाय (ब्रांड)" का लेबल होना चाहिए।
तीसरा हिस्सा उस कंटेंट का है जिसे लेबल की जरूरत नहीं। जहां SGC से ग्राहक की समझदारी से फैसला लेने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता, वहां खुलासा जरूरी नहीं है। इसमें कलर करेक्शन, लाइट एडजस्टमेंट, शोर कम करना और छोटे-मोटे दाग हटाने जैसी नियमित एडिटिंग शामिल है। सजावटी या आसपास के बैकग्राउंड एलिमेंट्स, साफ तौर पर काल्पनिक इफेक्ट्स, विज्ञापन का मसौदा तैयार करने जैसे प्रशासनिक और टेक्स्ट पर आधारित काम भी इसमें हैं। सबटाइटल, अनुवाद और सटीक ऑडियो डिस्क्रिप्शन जैसी सुविधाएं बढ़ाने वाली एप्लिकेशन्स को भी छूट है।
चौथा हिस्सा डिस्क्लोजर लेबल्स और अमल का है। जहां जानकारी देना जरूरी है, वहां ब्रांड्स विज्ञापन प्लेटफॉर्म के दिए लेबल इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे "एआई का इस्तेमाल करके ऑडियो/वीडियो तैयार किया गया है" की जगह AI से ऑडियो/वीडियो बनाया गया है, या AI से ऑडियो/वीडियो में बदलाव किया गया है। ब्रांड्स चाहें तो दूसरे लेबल भी लगा सकते हैं, बशर्ते उनसे ग्राहकों को सिंथेटिक कंटेंट का स्वरूप ठीक से समझ आए। जहां लागू हो, वहां ये खुलासे डिस्क्लेमर पर ASCI कोड की गाइडलाइंस के मुताबिक होने चाहिए।
ASCI की सेक्रेटरी जनरल और सीईओ मनीषा कपूर ने कहा, "विज्ञापनों में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और ग्राहकों को केंद्र में रखकर हमारा नजरिया भी उसी हिसाब से बदलना जरूरी है। खासकर AI लेबल के बिना विज्ञापन का ग्राहकों पर उलटा असर पड़ सकता है, इसलिए ये गाइडलाइंस व्यावहारिक पारदर्शिता की गारंटी देती हैं। अहम बात यह है कि इन गाइडलाइंस में साफ किया गया है कि सिर्फ AI लेबल लगा देने से कोई गुमराह करने वाला विज्ञापन मंजूर नहीं हो जाता। संवाद ईमानदार, पारदर्शी और ASCI कोड के मुताबिक हो, यह पक्का करने की जिम्मेदारी विज्ञापन देने वालों की रहेगी।"