दो विषयों में फेल BUMS छात्रा को पटना हाईकोर्ट से राहत, तीसरे साल की परीक्षा में बैठ सकेगी
पटना हाईकोर्ट ने आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी को आदेश दिया कि खुशबू कुमारी को 3 अक्टूबर से शुरू हो रही तीसरे साल की परीक्षा में बैठने दिया जाए।
पटना हाईकोर्ट ने एक यूनानी मेडिकल छात्रा के हक में बड़ा फैसला सुनाया है। दो विषयों में फेल होने के बावजूद अब उसका साल बर्बाद नहीं होगा और वह तीसरे साल की परीक्षा दे सकेगी। यह फैसला जस्टिस हरीश कुमार की बेंच ने दिया।
मामला खुशबू कुमारी का है, जो कदमकुआं के सरकारी तिब्बी कॉलेज में BUMS 2021-2026 बैच की छात्रा हैं। वह कटिहार की रहने वाली हैं। दूसरे साल की पहली सप्लीमेंट्री परीक्षा का रिजल्ट आया तो वह दो विषयों में फेल हो गईं।
नियम के मुताबिक यूनिवर्सिटी को तय वक्त पर दूसरी सप्लीमेंट्री परीक्षा करानी चाहिए थी। लेकिन आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी (AKU) ने यह परीक्षा कराई ही नहीं। आज तक दूसरी सप्लीमेंट्री परीक्षा नहीं हुई है।
उधर तीसरे साल की मुख्य परीक्षा की तारीख आ गई और वह 3 अक्टूबर से शुरू होनी है। दूसरी सप्लीमेंट्री परीक्षा न होने की वजह से खुशबू तीसरे साल की परीक्षा में बैठ ही नहीं पातीं और उनका पूरा एक साल बर्बाद हो जाता। इसीलिए उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका डाली।
खुशबू के वकील ने कोर्ट में NCISM के राजपत्र का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि NCISM के नियम के हिसाब से अगर कोई छात्र दूसरे साल में एक या दो विषयों में फेल हो जाए, तो उसे तीसरे साल में बैठने दिया जाता है और अगले साल में जाने की इजाजत होती है। इसलिए खुशबू को भी यह इजाजत मिलनी चाहिए।
कोर्ट ने माना कि गलती यूनिवर्सिटी की है। कोर्ट ने कहा कि यूनिवर्सिटी ने वक्त पर दूसरी सप्लीमेंट्री परीक्षा नहीं ली, इससे छात्रा का नुकसान हो रहा है और उसका साल बर्बाद होना ठीक नहीं होगा। इसलिए कोर्ट ने AKU को आदेश दिया कि खुशबू कुमारी को 3 अक्टूबर से शुरू हो रही तीसरे साल की मुख्य परीक्षा में बैठने दिया जाए।
कोर्ट ने यूनिवर्सिटी और कॉलेज को भी निर्देश दिए हैं। उनसे कहा गया कि इसके लिए एक पोर्टल शुरू करें, छात्रा का फॉर्म और फीस लें और उसे अस्थायी एडमिट कार्ड दें।
साथ ही कोर्ट ने यूनिवर्सिटी से कहा कि दूसरी सप्लीमेंट्री परीक्षा भी जल्द से जल्द करा ली जाए, ताकि दूसरे छात्रों का नुकसान न हो। इस फैसले से खुशबू कुमारी का साल बच गया है और यूनानी की पढ़ाई कर रहे बाकी छात्रों के लिए भी यह फैसला अहम माना जा रहा है।