धनत्रयोदशी से पहले सोना खरीदें या रुकें, तीन बातें तय करेंगी भाव की चाल
धनत्रयोदशी और दिवाली नज़दीक हैं और सोने के भाव में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इम्पोर्ट ड्यूटी, ग्लोबल गोल्ड और US बॉन्ड यील्ड, और देश की मांग, ये तीन बातें भाव पर असर डाल रही हैं।
धनत्रयोदशी और दिवाली पास आते ही लोगों की नज़र फिर से सोने की खरीदारी पर है। लेकिन सोने के भाव में अभी काफी उतार-चढ़ाव है, इसलिए सवाल खड़ा हो गया है कि अभी खरीदें या कुछ वक्त रुकें। सोने की कीमत पर भारत की इम्पोर्ट ड्यूटी, इंटरनेशनल मार्केट का भाव, अमेरिका की बॉन्ड यील्ड और देश की मांग, इन सबका असर पड़ रहा है।
सितंबर 2026 में सोने के भाव में बड़ी गिरावट आई। 29 सितंबर को ग्लोबल मार्केट में स्पॉट गोल्ड 7 हफ्तों के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा और उसके बाद थोड़ा संभल गया। स्पॉट गोल्ड उस दिन $4,110.55 प्रति औंस के 7 हफ्तों के निचले स्तर तक गया था।
पहली बात इम्पोर्ट ड्यूटी की है। 2026 में भारत ने सोने पर प्रभावी इम्पोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी, जो 13 मई 2026 से लागू हुई। बाजार में चर्चा है कि ड्यूटी घटकर फिर 6% हो सकती है, मगर सरकार की तरफ से ऐसा कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। इसलिए ड्यूटी घटने की मान्यता पर भाव का पक्का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता।
एनालिस्ट राहुल जैन के मुताबिक अगर ड्यूटी 15% रही तो सोना करीब Rs 1,57,000 प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है। ड्यूटी 6% तक घटी तो लैंडेड प्राइस करीब Rs 1,44,000 प्रति 10 ग्राम तक आ सकती है। यानी ड्यूटी में कटौती हुई तो देश में सोने के भाव पर गिरावट का दबाव बन सकता है। ड्यूटी बढ़ने के बाद तस्करी के सोने का कारोबार बढ़ने की रिपोर्ट भी आई हैं, और अधिकृत आयातकों के मुकाबले तस्करी के सोने की कीमत में बड़ा फर्क बताया गया है।
दूसरी बात ग्लोबल गोल्ड और US बॉन्ड यील्ड है। भारत में सोने का भाव इंटरनेशनल मार्केट की चाल पर काफी टिका रहता है। 29 सितंबर 2026 को अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी यील्ड 5.27% से ऊपर पहुंच गई थी। बढ़ी हुई बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर से सोने पर दबाव पड़ सकता है, क्योंकि सोने से ब्याज की कमाई नहीं होती। फेडरल रिज़र्व की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें भी अहम हैं।
अनुमान यह है कि इंटरनेशनल भाव में 5% गिरावट आई तो भारत में सोना करीब Rs 1,45,000 प्रति 10 ग्राम तक आ सकता है। ग्लोबल भाव 10% गिरा तो भारतीय बाजार में कीमत करीब Rs 1,38,000 तक आने की संभावना जताई गई है।
तीसरी बात देश की मांग है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत में सोने की मांग करीब 6% घटी। पहली छमाही में यह गिरावट करीब 17% बताई गई है। हालांकि सोने में निवेश की मांग तुलना में मजबूत रही और गोल्ड ETF में निवेश भी ऊंचे स्तर पर बताया गया है। World Gold Council की सितंबर की समीक्षा के मुताबिक अगस्त की बड़ी तेजी के मुकाबले सितंबर में भारतीय और इंटरनेशनल भाव में सुधार यानी नरमी आई है। त्योहार और शादियों का सीज़न आगे खिसकने के साथ मांग बढ़ने की उम्मीद है।
तो क्या धनत्रयोदशी तक रुकना चाहिए? इम्पोर्ट ड्यूटी में संभावित बदलाव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर और देश की कमजोर मांग की वजह से कम अवधि में सोने पर दबाव रह सकता है, ऐसा अंदाज़ा जताया जा रहा है। इसी आधार पर राहुल जैन ने फिलहाल फौरन बड़ी खरीदारी करने के बजाय धनत्रयोदशी तक बाजार की चाल देखने की राय रखी है। लेकिन यह एक एनालिस्ट का अंदाज़ा है, आगे का भाव पक्के तौर पर नहीं बताया जा सकता।
क्या सोना Rs 1 लाख के नीचे जा सकता है? 29 सितंबर को भारतीय बाजार में 24 कैरेट सोना करीब Rs 1.48 लाख के आसपास था। मुंबई समेत अलग-अलग बाजारों में भाव में फर्क हो सकता है। MCX पर भी सोने के वायदा भाव पर दबाव दिखा। 28 सितंबर को MCX दिसंबर गोल्ड फ्यूचर्स करीब Rs 1,48,750 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। ज्यादातर एनालिस्ट को नज़दीकी वक्त में सोने के Rs 1 लाख प्रति 10 ग्राम से नीचे जाने की संभावना कम लगती है, फिर भी इसे पूरी तरह नामुमकिन नहीं माना जा सकता। इंटरनेशनल भाव बहुत गिरे और रुपये की चाल में बड़ा बदलाव आए तो देश के भाव पर असर पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया के संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं। ब्रेंट क्रूड 29 सितंबर के आसपास $105 से $108 प्रति बैरल पर था। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है, इसका असर अमेरिकी फेड की ब्याज नीति पर पड़ सकता है और सोने पर परोक्ष दबाव बन सकता है।
इंटरनेशनल मार्केट में हाल की गिरावट के पीछे निवेशकों की मुनाफा वसूली और ETF से निकलता पैसा भी वजह बताया गया है। मोतीलाल ओसवाल के नवीन दमानी जैसे कुछ एनालिस्ट ने पहले अनुमान लगाया था कि सोना और नीचे आकर Rs 1.30 लाख से Rs 1.32 लाख प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है। उनकी राय थी कि लंबे वक्त के निवेशक ऐसे स्तर पर खरीदने की सोच सकते हैं। कुछ ब्रोकरेज हाउस के अनुमान में 2026 के बाकी हिस्से में देश में सोने का भाव Rs 1.40 लाख से Rs 1.60 लाख प्रति 10 ग्राम के दायरे में रह सकता है। इंटरनेशनल भाव $3,800 से $4,000 प्रति औंस के आसपास गिरे और रुपया काफी कमजोर हो, तभी Rs 1 लाख के नीचे जाने की संभावना को ज्यादा गंभीरता से लेना होगा।
खरीदने से पहले सिर्फ त्योहार की मांग देखना काफी नहीं है। इम्पोर्ट ड्यूटी, इंटरनेशनल भाव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर, कच्चे तेल के दाम और भारत की मांग, सब पर नज़र रखनी होगी। गिरावट के बाद थोड़ा सुधार दिख रहा है, फिर भी उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इसलिए ग्राहक अपनी ज़रूरत के हिसाब से फैसला करें और बड़ा निवेश करने से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। यह जानकारी बाजार के आंकड़ों और जानकारों की राय पर आधारित है, इसे निवेश या सोना खरीदने की सलाह न समझें।