मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:48 IST

डेटा सेंटर विस्तार से इंजीनियरिंग में 1 लाख नौकरियां, 300 अरब डॉलर निवेश का अनुमान

पॉलिसी कन्सेन्सस सेंटर के वेबिनार में देश में डेटा सेंटर सेक्टर के तेज विस्तार, रोजगार सृजन और स्वच्छ ऊर्जा पर चर्चा हुई।

डेटा सेंटर विस्तार से इंजीनियरिंग में 1 लाख नौकरियां, 300 अरब डॉलर निवेश का अनुमान
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

देश में डेटा सेंटर सेक्टर जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, उससे रोजगार, निवेश और स्वच्छ ऊर्जा तीनों को बढ़ावा मिलेगा। यह बात पॉलिसी कन्सेन्सस सेंटर (पीसीसी) की तरफ से नई दिल्ली में आयोजित एक खास वेबिनार में सामने आई। "लिविंग नेक्स्ट टू द क्लाउड: एन एविडेंस-बेस्ड अप्रोच टू डेटा सेंटर्स इन रेजिडेंशियल इंडिया" नाम के इस वेबिनार में नीति निर्माता, इंडस्ट्री के बड़े लोग और स्थानीय नागरिक साथ बैठे और देश में डेटा सेंटर इकोसिस्टम के तेज विस्तार से आर्थिक विकास, रोजगार और स्वच्छ ऊर्जा में आने वाली रफ्तार पर विस्तार से बात हुई।

इंडस्ट्री के अंदाजों के मुताबिक 2030 तक भारत की डेटा सेंटर क्षमता 6 से 6.5 गीगावॉट तक पहुंच सकती है, और इसकी डेवलपमेंट पाइपलाइन 3,860 मेगावॉट तक जा सकती है। इसके लिए करीब 29.9 अरब डॉलर के डेवलपमेंट कैपिटल की जरूरत पड़ेगी। साथ ही 2030 तक डेटा सेंटर का विस्तार 10 करोड़ वर्ग फुट से ज्यादा होने का अनुमान है, जिसमें इस सेक्टर में 300 अरब डॉलर से ज्यादा के निवेश की प्रतिबद्धता शामिल है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि डेटा सेंटर को सिर्फ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की तरह नहीं, बल्कि भारत के व्यापक आर्थिक और सस्टेनेबल बदलाव के एक अहम हिस्से की तरह देखा जाना चाहिए।

पॉलिसी कन्सेन्सस सेंटर के सह-संस्थापक और पार्टनर अरिंदम गोस्वामी ने टेक्नोलॉजी और पर्यावरण के बीच संतुलन पर जोर देते हुए कहा, "जिम्मेदार विकास का मतलब सिर्फ नतीजों को संभालना नहीं, बल्कि पूरे इकोसिस्टम में पॉजिटिव असर पैदा करना है। भारत के डिजिटल भविष्य के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करते वक्त टेक्नोलॉजी को संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल, निवेश और पर्यावरण की देखभाल से जोड़ना जरूरी है।"

पीसीसी की सह-संस्थापक और सीईओ निरुपमा सौंदरराजन ने कहा, "शहरों का जैसे-जैसे विस्तार हो रहा है, जो इलाके कभी शहर के बाहर माने जाते थे वे अब शहरी केंद्रों का हिस्सा बनते जा रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि एक ऐसा प्लानिंग फ्रेमवर्क हो जिससे शहरों के विकास के साथ-साथ डेटा सेंटर और नागरिक समुदाय जिम्मेदारी से साथ रह सकें।"

वेबिनार में केंद्रीय विज्ञान व तकनीक राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के हवाले से बताया गया कि डेटा सेंटर के विस्तार से करीब 1 लाख इंजीनियरिंग नौकरियां पैदा हो सकती हैं, जिनमें एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक कूलिंग सिस्टम, स्मार्ट ग्रिड और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के संचालन से जुड़ी नौकरियां शामिल हैं।

एनर्जी इकोनॉमिस्ट डॉ. पंकज शर्मा ने ग्रीनफील्ड जगहों की अहमियत बताते हुए कहा, "डेटा सेंटर को व्यापक विकास के मौके के हिस्से की तरह देखा जाना चाहिए। ग्रीनफील्ड जगहों की वजह से रिहायशी इलाकों से टकराव के बगैर डेटा सेंटर का विस्तार हो सकता है और नए निवेश केंद्र बन सकते हैं।"

केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद नाईक के मुताबिक एआई डेटा सेंटर की अतिरिक्त बिजली की मांग 2031-32 तक 26.3 गीगावॉट तक पहुंच सकती है, जो मुख्य रूप से रिन्यूएबल एनर्जी से पूरी की जाएगी। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर के कंसल्टेंट विशाल त्रिपाठी ने ग्रिड के तालमेल पर कहा, "डेटा सेंटर में पावर ग्रिड को डिमांड-रिस्पॉन्स सेवाएं देने की बड़ी क्षमता है। कॉरपोरेट खरीद और स्कोप 2 अकाउंटिंग नियमों के मुताबिक हरित दर डेटा सेंटर को रिन्यूएबल एनर्जी मुहैया करा सकते हैं।"

टेक्नोग्रीन सॉल्यूशंस के सह-संस्थापक डॉ. अजय ओझा के मुताबिक पर्यावरण मानकों का पालन करते हुए सस्टेनेबिलिटी सिर्फ सिद्धांत तक सीमित न रहकर असल में प्रोत्साहन देने वाली होनी चाहिए, और इसे सार्वजनिक करने से ऑपरेटरों के बीच तुलना और बेंचमार्किंग आसान होगी। नैसकॉम के डिप्टी डायरेक्टर (पब्लिक पॉलिसी) सुदीप्तो बैनर्जी ने कहा कि पानी, बिजली, जमीन और फाइबर जैसी अहम चीजों की जानकारी जिले के स्तर पर "रिसोर्स मैप्स" के रूप में एक ही जगह उपलब्ध होनी चाहिए, जिससे नई जगहों का चुनाव ज्यादा पारदर्शी और असरदार होगा।

सिफी इन्फिनिट स्पेसेस के सीईओ शरद अग्रवाल ने डेटा सेंटर के संचालन के लिए "सिक्स जीरो" नीति बताई, जिसके तहत यह इंडस्ट्री जीरो आउटेज, जीरो रेजिलिएंस रिस्क, जीरो सिक्योरिटी इंसिडेंट्स, जीरो सेफ्टी इश्यूज, जीरो डिफेक्ट्स और जीरो कार्बन फुटप्रिंट, इन छह मकसदों पर काम करती है। मुंबई के चांदिवली में डेटा सेंटर के बिल्कुल पास रहने वाली डॉ. सोनिया तासकांडे ने अपना अनुभव बताते हुए कहा, "मैं डेटा सेंटर के बिल्कुल पास रहती हूं। मुझे रोजमर्रा की जिंदगी या पानी की उपलब्धता में कभी कोई दिक्कत नहीं आई। सही मैनेजमेंट हो तो डेटा सेंटर और आबादी वाली बस्तियां आसानी से साथ रह सकती हैं।"

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