CUET UG के पैटर्न में बदलाव की तैयारी, एक ही दिन में पूरी हो सकती है परीक्षा
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) CUET UG का मौजूदा पैटर्न बदलने की तैयारी में है। प्रस्ताव में परीक्षा एक ही दिन में कराने, पेपर का वक्त घटाने और विषयों की संख्या पांच से चार करने की बात है।
सीयूईटी यूजी देने वाले स्टूडेंट्स के लिए आने वाली परीक्षा प्रक्रिया में बड़े बदलाव हो सकते हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) परीक्षा को आसान बनाने और उसमें कम वक्त लगे, इसके लिए मौजूदा पैटर्न में फेरबदल की तैयारी कर रही है। प्रस्ताव के मुताबिक स्टूडेंट्स को बार-बार परीक्षा केंद्र के चक्कर लगाने की परेशानी से राहत मिल सकती है।
अभी का सिस्टम यह है कि स्टूडेंट जो विषय चुनता है, उसके हिसाब से उसे अलग-अलग दिन परीक्षा देनी पड़ती है। जो स्टूडेंट ज्यादा से ज्यादा पांच विषय चुनते हैं, उन्हें दो या तीन बार परीक्षा केंद्र जाना पड़ता है। इससे सफर का खर्च, वक्त और भागदौड़ तीनों बढ़ जाते हैं।
प्रस्तावित बदलाव में एक स्टूडेंट की सारी परीक्षा एक ही दिन में पूरी कराने की योजना है। सीयूईटी की परीक्षा विंडो 12 से 15 दिन की रहती है। इसी दौरान हर स्टूडेंट को एक ही दिन का स्लॉट मिल सकता है, जिसमें वह अपने सारे पेपर दे दे।
पेपर के वक्त में भी बदलाव का विचार है। सीयूईटी यूजी के मौजूदा पैटर्न में हर विषय के पेपर के लिए 60 मिनट तय हैं। नए प्रस्ताव में इसे घटाकर करीब 40 से 45 मिनट करने पर विचार चल रहा है। वक्त कम होने का असर सवालों की गिनती पर भी पड़ेगा। अभी एक विषय में 50 सवाल आते हैं, जो नए पैटर्न में घटकर 35 से 40 तक हो सकते हैं। यानी परीक्षा छोटी होगी, लेकिन स्टूडेंट्स को कम वक्त में ज्यादा सटीकता से सवाल हल करने होंगे।
विषयों की संख्या पर भी दोबारा सोचा जा रहा है। अभी स्टूडेंट सीयूईटी यूजी में ज्यादा से ज्यादा पांच विषय चुन सकते हैं। यूजीसी और एनटीए के स्तर पर इसे पांच से घटाकर चार करने की संभावना देखी जा रही है। अगर पांच विषयों का विकल्प रहा और हर पेपर 40 मिनट का हुआ, तो स्टूडेंट करीब 200 मिनट यानी 3 घंटे 20 मिनट में परीक्षा पूरी कर सकते हैं। चार विषयों में यह वक्त घटकर करीब 160 मिनट रह जाएगा।
ये बदलाव सिर्फ यूजी तक सीमित नहीं रहेंगे। सीयूईटी पीजी (CUET PG) में भी जिन विषयों के लिए कम अर्जी आती हैं, उन्हें परीक्षा से बाहर रखने की योजना पर विचार हो रहा है। जिन कोर्सेस में उपलब्ध सीटों के मुकाबले बहुत कम अर्जी आती हैं, वहां एंट्रेंस एग्जाम कराने की जगह मेरिट के आधार पर एडमिशन देने का विकल्प अपनाया जा सकता है।