CJP के सौरभ दास का आरोप: दिल्ली पुलिस पर AI-डीपफेक से फंसाने की साजिश का इल्जाम
CJP के सह-संयोजक सौरभ दास ने दावा किया कि 'स्कूल ठीक करो' मुहिम के दौरान उन्हें और उनके साथियों को राष्ट्रविरोधी मामले में फंसाने के लिए डीपफेक और AI का इस्तेमाल हो रहा है।
कॉकरोच जनता पार्टी की 'स्कूल ठीक करो' मुहिम पूरे देश में चल रही है, और इसी बीच पार्टी के सह-संयोजक और प्रवक्ता सौरभ दास ने दिल्ली पुलिस पर बड़ा इल्जाम लगाया है। दास का कहना है कि दिल्ली पुलिस अभी भी उनकी और उनके साथियों की जांच कर रही है, और उन्हें एक कथित 'राष्ट्रविरोधी' कहानी में फंसाने की कोशिश हो रही है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर पोस्ट करते हुए दास ने लिखा कि उन्हें अपने सूत्रों और पुलिस महकमे में मौजूद कुछ जान-पहचान वालों से यह जानकारी मिली है। उनका दावा है कि इन्हीं संपर्कों ने उन्हें बताया कि यह कथित राष्ट्रविरोधी कहानी गढ़ने के लिए डीपफेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, एडिट की हुई चैट्स और ऐसी ही दूसरी तरकीबों का सहारा लिया जा रहा है।
दास ने आगे कहा कि दिल्ली पुलिस उन्हें और उनके साथियों को कथित राष्ट्रविरोधी साजिश से जोड़ने के लिए तरह-तरह के डिजिटल औजार इस्तेमाल कर रही है, जिसमें डीपफेक और AI टेक्नोलॉजी के साथ-साथ एडिटेड चैट्स भी शामिल हैं। दास के मुताबिक यह सब कुछ जनता के टैक्स के पैसे से किया जा रहा है।
दास ने पुलिस को सलाह भी दी कि उनकी और उनके साथियों की चौकशी करने के बजाय दिल्ली पुलिस को शहर में चल रहे कथित PG माफिया, हॉस्पिटल माफिया और एजुकेशन माफिया की जांच करनी चाहिए। दास के इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
दास ने यह भी याद दिलाया कि आंदोलनकारियों को आंदोलन से जुड़े मामलों में हमेशा के लिए माफी दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि ऐसी कोशिशों के लिए दिल्ली पुलिस को बुकर प्राइज या साहित्य का नोबेल पुरस्कार नहीं मिलने वाला, इसलिए पुलिस को लोगों का वक्त और सरकारी पैसा बर्बाद नहीं करना चाहिए।
अपनी पोस्ट में दास ने एक पुरानी घटना का भी जिक्र किया। उनका दावा है कि संसद मोर्चे से करीब तीन-चार दिन पहले उस वक्त के पुलिस कमिश्नर को पद से हटा दिया गया था, क्योंकि उन्होंने और गृह सचिव ने अमित शाह की कुछ कथित सख्त हिदायतों को मानने से इनकार कर दिया था। दास ने दिल्ली पुलिस को यह वाकया याद करने की सलाह दी।
दास ने साफ कहा कि अगर दिल्ली पुलिस को उनसे, आंदोलनों से या सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ा कोई भी सवाल है, तो उन्हें किसी तरह के 'जुगाड़' की जरूरत नहीं है। पुलिस उन्हें, अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका को कभी भी बुला सकती है। दास ने कहा कि तीनों नए पुलिस कमिश्नर के दफ्तर में एक साथ हाजिर होने और किसी भी सवाल का सामना करने के साथ-साथ लंबी पूछताछ के लिए भी तैयार हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर इन तीनों को सीधे बुलाकर पूछताछ की जाए, तो डीपफेक की जरूरत ही नहीं पड़ेगी, क्योंकि उस हालत में असली लोग खुद पुलिस के सामने मौजूद होंगे।