चीन ने अक्टूबर के लिए ईंधन निर्यात रोका, एशिया की सप्लाई पर पड़ेगा असर
चीन ने अक्टूबर महीने के लिए हाँगकाँग और मकाऊ को छोड़कर बाकी सभी बाजारों में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात रोक दिया है। बताया गया है कि यह फैसला देश के अंदर ईंधन का स्टॉक मजबूत करने के लिए लिया गया है। चीन दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग केंद्रों में से एक है, इसलिए उसके इस कदम का असर एशिया में पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल की सप्लाई पर पड़ने की आशंका है।
चीन की बड़ी रिफाइनरी कंपनियों को अक्टूबर में हाँगकाँग और मकाऊ के बाहर ईंधन भेजने की इजाजत अब तक नहीं मिली है। माना जा रहा है कि पेट्रोलियम उत्पादों के घरेलू स्टॉक पर दबाव बढ़ने से बीजिंग ने देश की सप्लाई को पहले रखा है।
चीन ने इससे पहले भी ईंधन निर्यात पर पाबंदियां लगाई थीं। उसके बाद जुलाई में कुछ हद तक निर्यात फिर शुरू किया गया था। लेकिन अब अक्टूबर की शुरुआत से निर्यात दोबारा रोक दिया गया है। 7 अक्टूबर के बाद यह इजाजत फिर दी जाएगी या नहीं, यह अभी साफ नहीं है।
चीन से बड़े पैमाने पर ईंधन का निर्यात होता रहा है और इसका फायदा सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया और एशिया के दूसरे बाजारों को मिल रहा था। अगर चीन का निर्यात घटता है तो इन देशों को दूसरे सप्लायरों से ईंधन खरीदना पड़ सकता है।
खास तौर पर डीजल बाजार पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। एशिया में डीजल की सप्लाई पहले से कुछ तंग है। ऐसे में चीन से आने वाले डीजल में कमी हुई तो आयात करने वालों के बीच दूसरे माल के लिए होड़ बढ़ सकती है। इसका असर डीजल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर पड़ सकता है।
चीन का यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब मध्यपूर्व के संघर्ष और रूस की रिफाइनरी पर हुए हमलों की वजह से दुनिया के ईंधन बाजार पर पहले से दबाव है। रूस ने भी डीजल निर्यात पर लगी पाबंदियां अक्टूबर तक जारी रखी हैं।
चीन से सप्लाई घटने पर एशियाई रिफाइनिंग मार्जिन और डीजल जैसे ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि यूरोप की तरफ से रणनीतिक डीजल स्टॉक को बाजार में लाने की चर्चा है, जिससे कुछ अतिरिक्त सप्लाई मिलने की संभावना है। इसलिए आने वाले दिनों में बाजार किस तरफ जाएगा, यह इस पर टिका है कि चीन की निर्यात पर रोक कितने समय चलती है और दूसरे देशों से कितना वैकल्पिक ईंधन मिलता है।