मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:26 IST

चिमूर की आश्रमशाला में 82 बच्चों के आधे बाल उड़ाने का आरोप, अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस

चिमूर तालुका की जांभूळघाट आश्रमशाला में करीब 82 विद्यार्थियों के बाल अजीब तरीके से काटे जाने का आरोप है। पालक नाराज हैं और मुख्याध्यापक ने अधीक्षक को नोटिस दिया है।

चिमूर की आश्रमशाला में 82 बच्चों के आधे बाल उड़ाने का आरोप, अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

चिमूर तालुका की जांभूळघाट आश्रमशाला में बच्चों के बाल काटे जाने के मामले को लेकर पालकों में भारी गुस्सा है। आरोप है कि शासकीय माध्यमिक आश्रमशाला के करीब 82 विद्यार्थियों के बाल अजीब तरीके से काट दिए गए। आरोप के मुताबिक अनुशासन के नाम पर अधीक्षक ने नाई को ऐसा करने को कहा था। मुख्याध्यापक प्रशांत गिरी ने अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस थमाया है।

यह निवासी आश्रमशाला चिमूर आदिवासी प्रकल्प के तहत आती है और यहां लगभग साढ़े पांच सौ लड़के-लड़कियां पढ़ते हैं। बच्चे यहीं रहते हैं, इसलिए उनके रहने से लेकर रोज के अनुशासन तक की पूरी जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की है। बच्चों के बाल कटवाने के लिए सरकारी स्तर पर एक नाई नियुक्त किया गया है, और इसके लिए शनिवार और रविवार के दिन तय हैं।

शनिवार को दोपहर करीब चार बजे आश्रमशाला परिसर में रोज की तरह बालों की कटिंग चल रही थी। इसी बीच कुछ विद्यार्थी परिसर में खेल रहे थे। आरोप है कि इसी बात पर भड़के अधीक्षक ने नाई से कहा कि बच्चों के आधे सिर के बाल उड़ा दो और ट्रिमर अजीब ढंग से घुमाओ। इस आदेश के बाद करीब 82 बच्चों के बाल बेढंगे तरीके से कट गए। पालकों का कहना है कि बच्चों की मर्जी के बिना और उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाली इस हरकत का उनके मन और भावनाओं पर गहरा असर पड़ा है।

इलाके में यह भी चर्चा है कि घटना के वक्त अधीक्षक नशे की हालत में थे। इस दावे की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस शक की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है।

मामले की गंभीरता देखते हुए आश्रमशाला के मुख्याध्यापक प्रशांत गिरी ने अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस दिया। मुख्याध्यापक ने सफाई दी कि वे किसी जरूरी काम से एक घंटे के लिए चिमूर गए थे। लौटने पर जैसे ही विद्यार्थियों ने सारा वाकया बताया, उन्होंने अधीक्षक को नोटिस दे दिया।

पालकों का कहना है कि सिर्फ कारण बताओ नोटिस देकर मामला दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने गुस्से में सवाल उठाया है कि बच्चों को इस तरह बेइज्जत करने वाली सजा देने का हक अधीक्षक को किसने दिया। पालकों ने अधीक्षक के साथ मुख्याध्यापक पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की है।

उनका कहना है कि आदिवासी विद्यार्थियों की सुरक्षा के साथ उनके मान-सम्मान को बचाना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसलिए पालक चाहते हैं कि वरिष्ठ अधिकारी खुद इस घटना पर ध्यान दें, जांच करें, पीड़ित विद्यार्थियों की बात सुनें और दोषियों पर फौरन कार्रवाई करें। अब सबकी नजर इस पर है कि चिमूर आदिवासी प्रकल्प और आदिवासी विकास विभाग इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाते हैं।

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