चांदी की जोडवी पहनने के पीछे क्या है ज्योतिषीय मान्यता, राहू-केतू से जुड़ा नाता
महिलाओं के पैरों में पहनी जाने वाली चांदी की जोडवी सिर्फ श्रृंगार नहीं, बल्कि इससे जुड़ी हैं कई ज्योतिषीय और सेहत से जुड़ी मान्यताएं
हिंदू धर्म में महिलाओं के गहनों का ताल्लुक सिर्फ सजावट से नहीं, बल्कि कई धार्मिक मान्यताओं और रिवाजों से भी होता है। पैर की उंगली में पहनी जाने वाली अंगूठी यानी जोडवी एक ऐसा ही पारंपरिक गहना है, जिसे खासकर शादीशुदा महिलाएं पहनती हैं। चांदी की इस जोडवी को लेकर ज्योतिष शास्त्र में कई मान्यताएं प्रचलित हैं। ज्योतिष के मुताबिक चांदी धातु का संबंध चंद्रमा से माना जाता है, वहीं राहू और केतू को छाया ग्रह कहा जाता है।
ग्रहों के असर और चांदी की जोडवी पहनने से जुड़े उपायों की चर्चा अक्सर होती रहती है। आखिर जोडवी का राहू-केतू से क्या रिश्ता है और इसे पहनने के पीछे कौन सी ज्योतिषीय सोच काम करती है, आइए जानते हैं।
वैदिक ज्योतिष के हिसाब से चांदी का नाता चंद्रमा और शुक्र ग्रह से जोड़ा जाता है। चंद्रमा मन, ठंडक और मानसिक शांति का प्रतीक माना जाता है, जबकि शुक्र वैवाहिक सुख और सुंदरता से जुड़ा है। कहा जाता है कि पैर में चांदी पहनने से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और मानसिक तनाव कम होने में मदद मिलती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शरीर के अलग-अलग हिस्से अलग-अलग ग्रहों से जुड़े माने जाते हैं। परंपरागत मान्यता है कि केतू का असर शरीर के निचले हिस्से पर, खासकर पैरों पर होता है। राहू को गड़बड़ी और अचानक आने वाली रुकावटों से जुड़ा ग्रह माना जाता है। लाल किताब में चांदी को ऐसी धातु बताया गया है जो राहू-केतू के अशुभ असर को कम कर सकती है। कहा जाता है कि पैरों से जुड़ी ऊर्जा को संतुलित रखने और मानसिक अस्थिरता या घर की परेशानियों पर काबू पाने के लिए चांदी की जोडवी पहनना फायदेमंद माना जाता है।
आमतौर पर पैर के अंगूठे से सटी दूसरी उंगली में ही जोडवी पहनी जाती है। इसकी वजह धार्मिक परंपरा के साथ-साथ सेहत से भी जुड़ी बताई जाती है। आयुर्वेद के मुताबिक इस दूसरी उंगली की नसें गर्भाशय और दिल से जुड़ी मानी जाती हैं। कहा जाता है कि चांदी की जोडवी से पड़ने वाला हल्का दबाव खून के दौरे को ठीक रखने और हार्मोन का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
धार्मिक मान्यता के मुताबिक सोने की जोडवी पहनने से बचना चाहिए। सोने को भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है और यह गुरु ग्रह से जुड़ी धातु है। यही वजह है कि कुछ परंपराओं में कमर के नीचे सोने के गहने पहनना ठीक नहीं समझा जाता।
ज्योतिष के मुताबिक जोडवी पहनते वक्त महिलाओं को कुछ बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। अपनी पहनी हुई जोडवी किसी को भी न दें, ऐसी मान्यता है कि इस्तेमाल की गई जोडवी कभी किसी दूसरी महिला को तोहफे में नहीं देनी चाहिए। अगर जोडवी टूट जाए तो लोक मान्यता के अनुसार इसे शुभ संकेत माना जाता है और टूटने या खो जाने पर उसकी जगह नई चांदी की अंगूठी पहन लेनी चाहिए। साथ ही दोनों पैरों में संतुलन बनाए रखने की भी परंपरा है, यानी हर पैर की उंगली में बराबर संख्या में जोडवी पहनी जानी चाहिए।
धर्म और ज्योतिष से जुड़ी यह जानकारी सिर्फ पाठकों की सामान्य जानकारी के लिए है। इससे जुड़ा कोई भी प्रयोग करने से पहले जानकार से सलाह जरूर लें।