CAMIT ने वित्त मंत्री से UPI पर 0.4% MDR के फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की
व्यापारी संगठन CAMIT ने 2000 रुपये से ऊपर के UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लगने वाले चार्ज को लेकर केंद्र सरकार से गुजारिश की है।
चैंबर ऑफ एसोसिएशंस ऑफ महाराष्ट्र इंडस्ट्री एंड ट्रेड यानी CAMIT ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से अपील की है कि 2000 रुपये से ज्यादा के पर्सन-टू-मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लगाने के फैसले पर दोबारा विचार किया जाए। यह नया नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होना तय है।
CAMIT ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया कि पर्सन-टू-पर्सन ट्रांजैक्शन और 2000 रुपये तक के मर्चेंट पेमेंट को फ्री रखा जाएगा। लेकिन संगठन ने चिंता जताई कि व्यापारियों पर बार-बार लगने वाला यह चार्ज उस पूरे सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है, जिसने भारत को डिजिटल पेमेंट में दुनिया का लीडर बनाया है।
CAMIT के अध्यक्ष डॉ. दीपेन अग्रवाल ने कहा कि UPI भारत की सबसे बड़ी डिजिटल कामयाबियों में से एक है, और इसमें छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी तक व्यापारी वर्ग की भूमिका बहुत अहम रही है।
उन्होंने बताया कि जुलाई 2026 में अकेले UPI के जरिए करीब 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल कीमत लगभग 29.88 लाख करोड़ रुपये रही। इससे पता चलता है कि डिजिटल पेमेंट अब भारत की अर्थव्यवस्था का कितना बड़ा हिस्सा बन चुका है।
डॉ. अग्रवाल के मुताबिक डिजिटल पेमेंट से ट्रांजैक्शन ज्यादा पारदर्शी और ट्रेस करने लायक हुए हैं, जिससे सरकार की फॉर्मलाइजेशन और टैक्स कंप्लायंस बेहतर करने की कोशिशों को भी मदद मिली है। आज छोटे से छोटा दुकानदार भी डिजिटल पेमेंट स्वीकार कर रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि इसी वजह से देश का जीएसटी कलेक्शन भी नई ऊंचाई पर पहुंचा है। अप्रैल 2026 में जीएसटी कलेक्शन करीब 2.43 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा लगभग 22.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। उन्होंने साफ किया कि यह ग्रोथ अकेले UPI की वजह से नहीं है, बल्कि बढ़ती डिजिटलाइजेशन, GSTN, ई-इनवॉइसिंग और फॉर्मलाइजेशन ने मिलकर इसमें योगदान दिया है।
इसी पृष्ठभूमि में डॉ. अग्रवाल ने कहा कि 2000 रुपये से ऊपर के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लगाने के फैसले पर फिर से सोचने की जरूरत है। उनका कहना था कि आज के दौर में 2000 रुपये को बड़ा कमर्शियल ट्रांजैक्शन नहीं माना जा सकता, क्योंकि कपड़े, दवाइयां, इलेक्ट्रिकल सामान, स्पेयर पार्ट्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसी रोजमर्रा की खरीदारी अक्सर इस रकम से ज्यादा की होती है।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि जो दुकानदार डिजिटल पेमेंट स्वीकार करता है, वह पहले से ही एक पारदर्शी और फॉर्मल इकोनॉमी में योगदान दे रहा है, इसलिए इस आदत को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, न कि उस पर बार-बार लगने वाला अतिरिक्त चार्ज थोपा जाना चाहिए। उन्होंने माना कि UPI सिस्टम की साइबर सिक्योरिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूती बनाए रखने के लिए सरकार को संसाधनों की जरूरत जायज है, लेकिन CAMIT का कहना है कि इसका बोझ व्यापारियों और MSME पर MDR के जरिए नहीं डाला जाना चाहिए।
इसी वजह से CAMIT ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से गुजारिश की है कि इस फैसले की समीक्षा कर UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर, खासकर व्यापारियों और MSME के लिए, जीरो-MDR व्यवस्था जारी रखी जाए। इसके अलावा बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को उचित मुआवजा देने के लिए कोई और तरीका भी अपनाया जा सकता है।
डॉ. अग्रवाल ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि डिजिटल पेमेंट को फॉर्मलाइजेशन के लिए एक प्रोत्साहन ही बने रहना चाहिए, न कि फॉर्मलाइजेशन की कीमत बन जाए। उन्होंने कहा कि भारत ने करोड़ों कारोबारियों को कैश से डिजिटल पेमेंट की तरफ लाने में कामयाबी हासिल की है, और सरकार की नीति ऐसी होनी चाहिए कि यह सफर आगे बढ़ता रहे, न कि किसी अनजाने में ऐसा कदम उठ जाए जो लोगों को फिर से कैश की तरफ मोड़ दे।