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23:24 IST

BRICS का नया एजुकेशन एजेंडा: अब सिर्फ डिग्री नहीं, ये स्किल्स भी मांगेंगे कॉलेज और नौकरी

ब्रिक्स देशों के एजुकेशन एजेंडे में AI, स्पेस टेक्नॉलॉजी और ग्रीन स्किल्स को बड़ी जगह मिली है, जिससे आगे स्टूडेंट्स के लिए सिर्फ डिग्री काफी नहीं रहेगी।

BRICS का नया एजुकेशन एजेंडा: अब सिर्फ डिग्री नहीं, ये स्किल्स भी मांगेंगे कॉलेज और नौकरी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ कंप्यूटर साइंस तक सीमित सब्जेक्ट नहीं रह गया है। ब्रिक्स (BRICS) देशों के एजुकेशन मिनिस्टर्स ने 2025 में एजुकेशन सेक्टर में AI के इस्तेमाल, AI साक्षरता और जिम्मेदारी के साथ AI इस्तेमाल करने को लेकर एक साझा घोषणा की थी। इसमें बताया गया कि AI से सीखने की क्षमता कैसे बेहतर हो सकती है, हर स्टूडेंट की जरूरत के हिसाब से पढ़ाई कैसे बदल सकती है और एजुकेशन में जो गैप है वो कैसे कम हो सकता है। साथ ही डेटा प्राइवेसी, अल्गोरिदम में मौजूद पूर्वग्रह और AI के नैतिक इस्तेमाल जैसे चैलेंजेस पर भी जोर दिया गया।

ब्रिक्स के हायर एजुकेशन सहयोग में कंप्यूटर साइंस और इनफॉर्मेशन सिक्युरिटी पहले से ही अहम विषय रहे हैं। 'ब्रिक्स नेटवर्क यूनिवर्सिटी' के जरिए इन क्षेत्रों में जॉइंट प्रोग्राम, रिसर्च और एजुकेशनल सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। यानी आने वाले समय में डेटा साइंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्युरिटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी स्किल्स पढ़ाई और नौकरी दोनों के लिए बहुत जरूरी हो जाएंगी।

ब्रिक्स देशों ने टेक्निकल और वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (TVET) को अपने एजुकेशनल सहयोग का अहम हिस्सा बनाया है। 2026 में भारत की अध्यक्षता में हुई 'BRICS-TCA' की मीटिंग में डिजिटल और ग्रीन ट्रांजिशन से जुड़े वर्कफोर्स पर चर्चा हुई। भारत ने 'BRICS इंटरनेशनल स्किल गैप स्टडी' और 'BRICS स्किल्स कॉम्पिटिशन' जैसे प्रस्ताव भी रखे हैं।

भविष्य की स्किल्स की बात सिर्फ AI तक सीमित नहीं है। ब्रिक्स के TVET सहयोग में पहले से ही इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), स्मार्ट सिटीज, स्मार्ट हेल्थकेयर, ड्रोन टेक्नॉलॉजी, ब्लॉकचेन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई पीढ़ी की स्किल्स को शामिल किया गया है। ऐसे में इंजीनियरिंग और वोकेशनल एजुकेशन में इन क्षेत्रों से जुड़े प्रैक्टिकल कोर्स और इंडस्ट्री-ओरिएंटेड ट्रेनिंग की भूमिका और बढ़ेगी।

ब्रिक्स देशों के लिए स्पेस भी तेजी से उभरता हुआ सहयोग का क्षेत्र बन रहा है। जून 2026 में बेंगलुरु में 'BRICS हेड्स ऑफ स्पेस एजेंसीज' की मीटिंग हुई, जिसमें मेंबर देशों ने रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन और स्पेस सस्टेनेबिलिटी जैसे विषयों पर चर्चा की। इससे स्पेस साइंस, सैटेलाइट टेक्नॉलॉजी, रिमोट सेंसिंग, अर्थ ऑब्जर्वेशन और स्पेस डेटा जैसे क्षेत्रों में रिसर्च और स्किल सहयोग को रफ्तार मिल रही है।

क्लाइमेट चेंज और सस्टेनेबल डेवलपमेंट भी ब्रिक्स के एजुकेशन एजेंडे का अहम हिस्सा है। ब्रिक्स नेटवर्क यूनिवर्सिटी की प्राथमिकताओं में इकोलॉजी और क्लाइमेट चेंज, एनर्जी, वॉटर रिसोर्स और पॉल्यूशन ट्रीटमेंट जैसे विषय शामिल हैं। यानी आगे रिन्यूएबल एनर्जी, क्लाइमेट टेक्नॉलॉजी, वॉटर मैनेजमेंट और एन्वायरमेंटल डेटा जैसी इंटर-डिसिप्लिनरी स्किल्स की डिमांड काफी बढ़ेगी।

ब्रिक्स नेटवर्क यूनिवर्सिटी का मकसद मेंबर देशों के हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस के बीच जॉइंट रिसर्च, एकेडमिक मोबिलिटी और नए एजुकेशनल इनिशिएटिव को बढ़ावा देना है। 2026 में इस नेटवर्क को और मजबूत करने पर काम हुआ। जुलाई 2026 में भारत में हुई मीटिंग में पारंपरिक और एशियाई/लोकल नॉलेज सिस्टम को नया विषय बनाने का प्रस्ताव रखा गया।

ब्रिक्स का यह नया एजुकेशन एजेंडा साफ बताता है कि आने वाले समय में सिर्फ पारंपरिक डिग्री काफी नहीं होगी। AI, डेटा साइंस, साइबर सिक्युरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग, IoT, ड्रोन्स, स्पेस टेक्नॉलॉजी, ग्रीन टेक्नॉलॉजी और डिजिटल स्किल्स से जुड़ा ज्ञान और प्रैक्टिकल स्किल्स स्टूडेंट्स के लिए बेहद जरूरी हो जाएंगी। खास बात यह है कि ब्रिक्स देश इन स्किल्स को हायर एजुकेशन के साथ-साथ टेक्निकल और वोकेशनल ट्रेनिंग (TVET) से भी जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

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