ब्रांड फाइनेंस की दुनिया की टॉप 50 मैराथन सूची में टाटा मुंबई मैराथन 21वें नंबर पर
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प्रोकैम इंटरनेशनल की टाटा मुंबई मैराथन को ब्रांड फाइनेंस की रिपोर्ट में 21वां स्थान मिला है। उसे इमर्जिंग मार्केट्स की श्रेणी में स्ट्रॉन्गेस्ट इकोनॉमिक इम्पैक्ट का पुरस्कार भी मिला।
मुंबई के नाम एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। प्रोकैम इंटरनेशनल की आयोजित की जाने वाली टाटा मुंबई मैराथन ने दुनिया भर में अपनी पहचान पक्की की है। ब्रांड फाइनेंस की "मैराथन्स टॉप 50" (2026) रिपोर्ट में दुनिया के टॉप 50 मैराथन ब्रांड्स के बीच इस स्पर्धा को 21वां स्थान मिला है।
इतना ही नहीं, टाटा मुंबई मैराथन को "स्ट्रॉन्गेस्ट इकोनॉमिक इम्पैक्ट - इमर्जिंग मार्केट्स" नाम का पुरस्कार भी दिया गया है। इस तरह दोहरी कामयाबी से मुंबई मैराथन की ग्लोबल अहमियत और साफ हो गई है।
ब्रांड फाइनेंस दुनिया की जानी-मानी ब्रांड वैल्युएशन कंसल्टेंसी है। उसने मैराथन स्पर्धाओं की ब्रांड ताकत, उनकी लोकप्रियता और उनके आर्थिक व सामाजिक योगदान का अध्ययन करके यह रिपोर्ट जारी की है। इस अध्ययन में भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, कनाडा, ब्राजील, जापान और ऑस्ट्रेलिया, यानी नौ देशों की 75 से ज्यादा मैराथन स्पर्धाओं को परखा गया।
रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की टॉप 50 मैराथन ने 2025 में अपने मेजबान शहरों में करीब छह अरब अमेरिकी डॉलर का आर्थिक असर पैदा किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि मैराथन से सिर्फ खेल जगत को ही नहीं, बल्कि टूरिज्म, होटल कारोबार, हॉस्पिटैलिटी, रिटेल और स्थानीय कारोबार को भी बड़ा बढ़ावा मिलता है। इसलिए ऐसी स्पर्धाएं शहरों के आर्थिक और सामाजिक विकास में अहम भूमिका निभाती हैं।
इस सम्मान पर प्रोकैम इंटरनेशनल के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर विवेक सिंह ने कहा कि मैराथन अब सिर्फ दौड़ की स्पर्धाएं नहीं रह गई हैं। वे सबके साथ जुड़ने, शहर पर गर्व करने और आर्थिक विकास का असरदार जरिया बन गई हैं। उनके मुताबिक टाटा मुंबई मैराथन ने दिखा दिया है कि स्थानीय स्तर पर खड़ी हुई खेल स्पर्धा दुनिया तक कैसे पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि इस पुरस्कार से भारत में दौड़ के आंदोलन को और ताकत मिलेगी।
टाटा संस के कॉर्पोरेट ब्रांड और मार्केटिंग प्रमुख आद्रिऑन टेरॉन ने भी इस कामयाबी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि टाटा मुंबई मैराथन मुंबई के जज्बे, रफ्तार और सबको साथ लेकर चलने की पहचान है। उनके अनुसार इस स्पर्धा में अलग-अलग उम्र के लोग एक साथ आते हैं, और अंतरराष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं के बड़े केंद्र के तौर पर मुंबई की पहचान और मजबूत हो रही है।
टीसीएस की ग्लोबल हेड, स्पोर्ट्स स्पॉन्सरशिप्स मिशेल टेलर ने भी मैराथन की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेल के जरिए समुदायों को जोड़ना और लोगों को सेहतमंद जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना, इसका बेहतरीन उदाहरण टाटा मुंबई मैराथन है।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर श्रीपाद शेंडे ने कहा कि मैराथन सिर्फ एक स्पर्धा नहीं है। यह हर किसी के निजी लक्ष्य और जिद के सफर की कहानी है। उन्होंने यह भी कहा कि यह स्पर्धा सेहतमंद जीवनशैली को बढ़ावा देने के साथ समाज के अलग-अलग तबकों को एक साथ लाती है।
ब्रांड फाइनेंस के स्पोर्ट्स सर्विसेज प्रमुख स्कॉट मोअर ने भारत में मैराथन कल्चर के बढ़ते असर की तारीफ की। उनका कहना है कि टाटा मुंबई मैराथन ने देश में दौड़ की संस्कृति और खेलों में निवेश को रफ्तार दी है। उन्होंने साफ किया कि ऐसी स्पर्धाओं से भागीदारी बढ़ती है, कारोबारी निवेश खिंचकर आता है और मेजबान शहरों के लिए आर्थिक मूल्य बनता है।
टाटा मुंबई मैराथन को मिली यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता मुंबई के खेल जगत के लिए अहम पड़ाव है। इस पुरस्कार ने रेखांकित किया है कि दौड़ की स्पर्धाएं सिर्फ एक दिन तक सीमित नहीं रहतीं, वे शहर के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में भी बड़ा योगदान दे सकती हैं।
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