बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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19:16 IST

बिना मंज़ूरी या मंज़ूर नक्शे से ज़्यादा एरिया वाले फ्लैट की रजिस्ट्री पर रोक

महाराष्ट्र सरकार ने सब-रजिस्ट्रार को ज़रूरी कागज़ात न होने या मंज़ूर नक्शे से ज़्यादा एरिया दर्ज होने पर रजिस्ट्री से मना करने का अधिकार दिया है।

नागपुर: प्रॉपर्टी के फर्जी लेन-देन रोकने और घर खरीदने वालों को गैरकानूनी निर्माण से बचाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने सब-रजिस्ट्रार को नया अधिकार दिया है। अब अगर ज़रूरी अनुमतियां और सहायक कागज़ात नहीं हैं, या फ्लैट का दर्ज एरिया मंज़ूर बिल्डिंग प्लान की सीमा से ज़्यादा है, तो सब-रजिस्ट्रार दस्तावेज़ की रजिस्ट्री से मना कर सकते हैं।

ये सख्त निर्देश 12 अक्टूबर को राजस्व विभाग के एक सर्कुलर के ज़रिए जारी हुए हैं। ये पूरे राज्य में लागू हैं और निर्माण परियोजनाओं की यूनिटों से जुड़े पहली बिक्री के एग्रीमेंट, सेल डीड, अपार्टमेंट डीड और ट्रांसफर के दस्तावेज़ों पर लागू होंगे।

सरकार का यह कदम इन शिकायतों के बाद आया कि इमारतें ज़रूरी अनुमति के बिना बन रही हैं और फ्लैट सक्षम प्राधिकरण से मंज़ूर एरिया से ज़्यादा एरिया के साथ बेचे जा रहे हैं। इससे खरीदारों को आर्थिक नुकसान और कानूनी उलझनों का सामना करना पड़ता है।

यह फैसला 22 सितंबर 2026 को राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद लिया गया। बैठक प्रॉपर्टी लेन-देन की गड़बड़ियों पर बात करने और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया कड़ी करने के लिए हुई थी।

नए सर्कुलर में रजिस्ट्रेशन विभाग की वे सिफारिशें शामिल हैं जो मुंधवा ज़मीन घोटाले के बाद दस्तावेज़ों की जांच मज़बूत करने के लिए भेजी गई थीं।

रजिस्ट्रेशन के संयुक्त महानिरीक्षक राजेंद्र मुठे ने कहा कि नए निर्देश फर्जी रजिस्ट्रेशन रोकने के विभाग के प्रस्तावों के मोटे तौर पर अनुरूप हैं। मुठे ने कहा, "पहले सब-रजिस्ट्रार किसी दस्तावेज़ की रजिस्ट्री से मना नहीं कर सकते थे। अब इस सर्कुलर के साथ वे दस्तावेज़ जांच सकते हैं और रजिस्ट्री से मना कर सकते हैं। फर्जीवाड़ा रोकने के लिए ये जांच ज़रूरी हैं।"

निर्देशों के मुताबिक अगर ज़रूरी रिकॉर्ड नहीं हैं या गड़बड़ी मिलती है, तो रजिस्ट्रेशन अधिकारियों को आगे बढ़ने के बजाय तय अनुमतियां और सहायक कागज़ात जांचने होंगे।

सर्कुलर में महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (महारेरा) में रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 की धारा 3 के तहत रजिस्टर होने वाली परियोजनाओं और इससे छूट वाली परियोजनाओं के लिए अलग-अलग शर्तें रखी गई हैं।

जिन परियोजनाओं को महारेरा में रजिस्टर होना ज़रूरी है, उनके कागज़ात में अथॉरिटी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट या ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट और संबंधित यूनिट का एरिया बताने वाला मंज़ूर बिल्डिंग प्लान होना चाहिए।

महारेरा रजिस्ट्रेशन से छूट वाली परियोजनाओं में सक्षम प्राधिकरण की जारी की हुई निर्माण अनुमति या कमेंसमेंट सर्टिफिकेट, यूनिट का एरिया दिखाने वाला मंज़ूर बिल्डिंग प्लान, ज़ोन सर्टिफिकेट और माप या सर्वे प्लान चाहिए।

इन शर्तों का मकसद यह तय करना है कि प्रॉपर्टी के पास ज़रूरी मंज़ूरियां हैं या नहीं और लेन-देन के कागज़ात में बताई गई यूनिट आधिकारिक मंज़ूर प्लान से मेल खाती है या नहीं।

सर्कुलर का एक अहम प्रावधान यह है कि अगर प्रॉपर्टी दस्तावेज़ में लिखा एरिया मंज़ूर बिल्डिंग प्लान में दिखाए एरिया से ज़्यादा है, तो सब-रजिस्ट्रार को रजिस्ट्री से मना करना ही होगा। बाकी तय कागज़ात जमा होने पर भी यह रोक लागू रहेगी। इससे बेचे या ट्रांसफर किए जा रहे फ्लैट के साइज़ की जांच में मंज़ूर प्लान अहम पैमाना बन जाता है।

इस कदम से अनधिकृत निर्माण, फ्लैट की माप में गड़बड़ी और मंज़ूर सीमा से ज़्यादा एरिया की बिक्री वाले लेन-देन पर जांच कड़ी होने की उम्मीद है।

कार्यकर्ता जोशी ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि फर्जी रजिस्ट्रेशन रोकने और रजिस्ट्रेशन दफ्तरों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दस्तावेज़ों की जांच ज़रूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि सब-रजिस्ट्रार को नए दिशानिर्देश सख्ती से लागू करने चाहिए।

सर्कुलर रजिस्ट्रेशन के स्तर पर सख्त जांच की ओर बदलाव दिखाता है। अधिकारियों से उम्मीद है कि वे लेन-देन दर्ज करने से पहले प्रॉपर्टी की वैधता और मंज़ूर माप जांचेंगे। घर खरीदने वालों के लिए ये नई शर्तें बताती हैं कि खरीद पूरी करने से पहले मंज़ूर बिल्डिंग प्लान, कानूनी अनुमतियां और बिक्री के कागज़ात में लिखा असली एरिया देखना ज़रूरी है। इस सख्ती का असर इस पर निर्भर करेगा कि महाराष्ट्र भर के रजिस्ट्रेशन दफ्तरों में इसे कितनी लगातार लागू किया जाता है।

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