बाजीगर में शाहरुख के बचपन का रोल करने वाले सुमीत पाठक अब मीडिया कंपनी चलाते हैं
1993 की फिल्म बाजीगर में शाहरुख खान के बचपन का किरदार निभाने वाले सुमीत पाठक आज पर्दे के पीछे की दुनिया में अपनी पहचान बना चुके हैं।
एंटरटेनमेंट की दुनिया में कई कलाकार ऐसे हुए जिन्होंने बचपन में ही एक्टिंग से दर्शकों के दिल में जगह बना ली। इनमें से कुछ आगे भी एक्टिंग करते रहे, तो कुछ ने इस लाइन से हटकर अलग रास्ता चुन लिया। सुमीत पाठक ऐसे ही एक कलाकार हैं। हो सकता है नाम फौरन याद न आए, लेकिन 1993 की फिल्म 'बाजीगर' में शाहरुख खान के बचपन का रोल करने वाले इस बाल कलाकार को बहुत से लोग आज भी याद रखते हैं।
सुमीत ने 1992 में फिल्म 'एक लड़का एक लड़की' से बाल कलाकार के तौर पर शुरुआत की। अगले साल, 1993 में, अब्बास-मस्तान के निर्देशन में बनी 'बाजीगर' में उन्हें शाहरुख खान के निभाए अजय मल्होत्रा के बचपन का किरदार मिला। फिल्म में उनका स्क्रीन टाइम ज्यादा नहीं था, फिर भी उनकी असरदार एक्टिंग ने दर्शकों का ध्यान खींचा। कहा जाता है कि इस रोल के लिए उन्हें फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार पुरस्कार मिला था।
'बाजीगर' की कामयाबी के बाद सुमीत ने 'इक्के पे इक्का', 'राजकुमार' और 'माहीर' जैसी फिल्मों में काम किया। एक्टिंग के साथ-साथ उन्होंने पढ़ाई और ट्रेनिंग पर भी ध्यान दिया। उन्होंने दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में पढ़ाई की और शास्त्रीय नृत्य की ट्रेनिंग भी ली।
बाल कलाकार की पहचान को बड़े कलाकार के रूप में बनाए रखना आसान नहीं होता, और सुमीत ने भी यह दौर देखा। 2002 में वे फिल्म 'तुमको न भूल पाएंगे' से बड़े पर्दे पर लौटे, जिसमें उन्होंने सलमान खान के भाई का रोल किया था। इसके बाद 2004 में वे वत्सल सेठ के साथ 'टारजन: द वंडर कार' में नजर आए। हालांकि उन्हें खास लोकप्रियता छोटे पर्दे के एक किरदार से मिली।
2005 से 2007 के बीच हंगामा टीवी के सीरियल 'हीरो-भक्ति ही शक्ति है' में सुमीत ने जॉय सेहगल का किरदार निभाया। सीरियल की कहानी के मुताबिक जॉय को देवी दुर्गा से महाशक्ति मिलती है और वह उसका इस्तेमाल बुराई से लड़ने में करता है। खासकर बच्चों और नौजवान दर्शकों में यह शो काफी पसंद किया गया, और इस रोल से भी सुमीत को बड़ी पहचान मिली।
एक्टिंग के साथ सुमीत ने पर्दे के पीछे भी अपनी अलग जगह बनाई। पत्नी और बिजनेस पार्टनर श्वेता पाठक के साथ उन्होंने 'गुलमोहर मीडिया' की शुरुआत की। कंपनी ने पहले भाषा लोकलाइजेशन के क्षेत्र में काम किया, फिर पोस्ट-प्रोडक्शन और मीडिया टेक्नोलॉजी में भी पांव फैलाए। आज उसका कामकाज मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई समेत भारत के कई शहरों में है। पारंपरिक स्टूडियो मॉडल से आगे बढ़कर कंपनी ने क्लाउड आधारित एडिटिंग और निर्माण को भी अपनाया, जिससे अलग-अलग जगहों पर बैठी टीमें एक ही प्रोजेक्ट पर साथ काम कर पाती हैं।
आमिर खान प्रोडक्शन्स के चर्चित सामाजिक कार्यक्रम 'सत्यमेव जयते' के लोकलाइजेशन का काम गुलमोहर मीडिया ने संभाला। इस कार्यक्रम को कई भाषाओं के दर्शकों तक पहुंचाने के दौरान कंपनी को बड़े पैमाने के लोकलाइजेशन प्रोजेक्ट चलाने का तजुर्बा मिला। उसके बाद कंपनी का दायरा और बढ़ा, और आज वह सिर्फ भाषा लोकलाइजेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि कंटेंट निर्माण और मीडिया टेक्नोलॉजी में भी काम कर रही है।
सुमीत का सफर सिर्फ एक्टिंग तक नहीं रहा। उन्होंने वॉइस आर्टिस्ट के तौर पर भी काम किया है। 'ऑस्वाल्ड', 'पावर रेंजर्स', 'रिची रिच' और 'बेब्लेड' जैसे मशहूर एनिमेटेड शोज के लिए उन्होंने आवाज दी। इसके अलावा कई दक्षिण भारतीय फिल्मों के हिंदी वर्जन में भी उन्होंने काम किया। धीरे-धीरे उन्होंने कैमरे के सामने की एक्टिंग से दूरी बना ली और पर्दे के पीछे के काम पर ज्यादा ध्यान देने लगे।
गुलमोहर मीडिया अब सिर्फ भारतीय बाजार तक नहीं रुकी है। दक्षिण-पूर्व एशिया के दर्शकों तक भारतीय कंटेंट पहुंचाने के लिए कंपनी भारतीय एनिमे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। साथ ही फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों के अंतरराष्ट्रीय कंटेंट पर भी उसका काम चल रहा है।
कभी 'बाजीगर' में शाहरुख खान के बचपन का रोल करके चर्चा में आए सुमीत पाठक आज एंटरटेनमेंट की दुनिया के पर्दे के पीछे अपनी छाप छोड़ रहे हैं। बाल कलाकार से एक्टर, वॉइस आर्टिस्ट और अब मीडिया क्षेत्र के उद्यमी तक उनका सफर वाकई ध्यान खींचता है।