बच्चों की मोबाइल और रील्स की लत, फोन छीनने पर चिड़चिड़ापन कम करने के आसान तरीके
इंटरनेट और सोशल मीडिया का असर इतना बढ़ गया है कि छोटे बच्चों को भी रील्स देखने की लत लग गई है।
इंटरनेट और सोशल मीडिया का असर आजकल इतना बढ़ गया है कि छोटे-छोटे बच्चों को भी रील्स देखने की लत लग रही है। दो-तीन साल के बच्चे भी अब फोन दिखाए बिना खाना नहीं खाते। फोन का यह बढ़ता असर देखकर कई देशों ने किशोर उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन भी लगा दिया है। सोशल मीडिया मनोरंजन और जानकारी का जरिया जरूर है, लेकिन इसका ज्यादा इस्तेमाल सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। मोबाइल फोन का ज्यादा स्क्रीन टाइम मानसिक सेहत पर असर डालने लगता है। अक्सर देखा जाता है कि जब बच्चों से मोबाइल वापस लिया जाता है या उन्हें मोबाइल इस्तेमाल करने से मना किया जाता है, तो वे जिद्दी हो जाते हैं और चिड़चिड़ाने लगते हैं। ऐसे में पेरेंट्स के सामने सवाल खड़ा होता है कि बच्चों को मोबाइल से दूर कैसे रखा जाए।
रिसर्च बताती है कि मोबाइल का लगातार इस्तेमाल बच्चों की खुशी और उनकी आदतों पर बुरा असर डालता है। इससे दिमाग में डोपामाइन नाम का हॉर्मोन बनता है। हाथ से फोन छीन लेने पर यह प्रोसेस टूट जाती है, जिससे बच्चे बेचैन हो जाते हैं, उनमें निराशा बढ़ती है और वे चिड़चिड़ाने लगते हैं। इसीलिए गुस्से में बच्चों के हाथ से फोन छीनने से पहले प्यार से उन्हें किसी दूसरे काम में लगाने की कोशिश करनी चाहिए। इससे बच्चों पर कोई दबाव महसूस नहीं होगा और वे अपनी मर्जी से फोन का इस्तेमाल कम करेंगे।
पहले जब मोबाइल फोन नहीं थे, तब बच्चे मैदानी खेलों में ज्यादा रमते थे। इससे बच्चों की शारीरिक ग्रोथ भी अच्छी होती है, इसलिए मैदानी खेल उनके लिए जरूरी माने जाते हैं। बच्चों को अपने बचपन के मैदानी खेल सिखाएं और कुछ देर उनके साथ ये खेल खेलें। उन्हें साइकिलिंग करने दें। रोज के रूटीन में बच्चों के लिए थोड़ा वक्त निकालकर प्यार से उनके साथ ये खेल खेलें और इसकी अहमियत उन्हें समझाएं। इससे बच्चे खुद-ब-खुद खेल में रमेंगे और फोन का इस्तेमाल कम करेंगे।
छोटे बच्चों का यह स्वभाव होता है कि जिस काम के लिए उन्हें मना किया जाता है, वे वही काम पहले करना चाहते हैं। आपका चिल्लाना उनके मन पर बुरा असर डाल सकता है। इससे उनके मन में आपके लिए नाराजगी पैदा होगी और आपके रिश्ते में दूरी भी आ सकती है। इसलिए बच्चों पर चिल्लाकर बात करने के बजाय एक दोस्त की तरह उन्हें बात समझाएं। उनसे बातचीत करें और उन्हें दूसरी क्रिएटिव चीजों जैसे पेंटिंग, पॉटरी, गाना, डांस, डीआईवाई आर्ट में व्यस्त रखने की कोशिश करें। इससे उनका वक्त भी बर्बाद नहीं होगा और उनमें कुछ अच्छे हुनर भी आएंगे।