मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:20 IST

अविधवा नवमी क्या है, पितृपक्ष में इस दिन कैसे होता है पूर्वजों का स्मरण

अविधवा नवमी पितृपक्ष की नवमी तिथि है। इस दिन विवाहित स्त्री का सम्मान किया जाता है और दिवंगत महिला पूर्वजों को याद किया जाता है।

अविधवा नवमी क्या है, पितृपक्ष में इस दिन कैसे होता है पूर्वजों का स्मरण
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

अविधवा नवमी को मातृ नवमी या अहेर नवमी भी कहा जाता है। यह पितृपक्ष यानी श्राद्ध के दिनों में आने वाली नवमी तिथि है। यह तिथि उन स्त्रियों के श्राद्ध और स्मरण के लिए समर्पित है, जिनकी मृत्यु पति के जीवित रहते हुई। हिंदू धर्म में इसे एक अहम धार्मिक तिथि माना जाता है।

अविधवा का मतलब है वह स्त्री, जिसका पति जीवित है। इसी वजह से इस तिथि को खास तौर पर पति के जीवित रहते विवाहित स्त्रियों के सम्मान और उनके सौभाग्य के लिए निभाई जाने वाली धार्मिक परंपरा के रूप में जाना जाता है। कुछ इलाकों में इसे अविधवा नवमी, नवमी श्राद्ध या मातृ नवमी के संदर्भ में भी देखा जाता है। हालांकि इन नामों और विधियों का मतलब इलाके और परंपरा के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है।

कुछ परिवारों में इस दिन विवाहित स्त्री को सौभाग्य का प्रतीक मानकर उसका सम्मान करने की प्रथा मिलती है। परिवार की परंपरा के मुताबिक विवाहित स्त्री को घर बुलाया जाता है और उसकी ओटी भरी जाती है। उसे हल्दी-कुंकू लगाया जाता है और फल, कपड़े या सौभाग्य की चीजें दी जाती हैं।

कुछ परंपराओं में इस दिन परिवार के दिवंगत लोगों को याद करके उनके लिए श्राद्ध या तर्पण भी किया जाता है। इसलिए अविधवा नवमी का रिश्ता सिर्फ सौभाग्य से नहीं है। यह परिवार की दिवंगत माताओं, दादियों, पत्नियों और दूसरी विवाहित स्त्रियों के स्मरण से भी जुड़ा है।

इस परंपरा के पीछे परिवार की स्त्रियों का सम्मान, पूर्वजों का स्मरण और परिवार की भलाई के लिए प्रार्थना की बात है। विवाहित स्त्री को हल्दी-कुंकू लगाना, उसकी ओटी भरना या सौभाग्य की चीजें देना, उसके सुखी वैवाहिक जीवन के लिए शुभकामना का प्रतीक माना जाता है।

अविधवा नवमी की पूजा और सारी विधियां एक जैसी नहीं होतीं। कुछ जगहों पर इसे पितृपक्ष की नवमी तिथि से जोड़ा जाता है, तो कुछ परिवारों में यह अलग तरीके से मनाई जाती है। इसलिए सही तिथि और विधि तय करते वक्त अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग क्या कहता है, यह देखना जरूरी होगा।

धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई जैसे विषयों के लेख सिर्फ पाठकों की जानकारी के लिए होते हैं। इनसे जुड़ा कोई भी प्रयोग करने से पहले जानकारों की सलाह लेना जरूरी है।

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