अशोक मलिक ने पैरा पॉवरलिफ्टिंग में जीता रजत पदक, दूसरी कोशिश में उठाया 192 किलो
आइची-नागोया एशियाई पैरा गेम्स 2026 में भारतीय पैरा पॉवरलिफ्टर अशोक कुमार मलिक ने रजत पदक जीतकर भारत की पदक तालिका में इजाफा किया।
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भारतीय पैरा पॉवरलिफ्टर अशोक कुमार मलिक ने दिखा दिया कि जिद, मेहनत और भरोसे के दम पर नामुमकिन लगने वाला लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। आइची-नागोया एशियाई पैरा गेम्स 2026 में उन्होंने रजत पदक जीता और भारत की पदक तालिका में अहम इजाफा किया।
मुकाबले में अशोक ने अपनी दूसरी कोशिश में 192 किलो वजन उठाया। इससे पहले पहली कोशिश में वे 187 किलो वजन कामयाबी से उठा चुके थे। आखिरी कोशिश में उन्होंने 201 किलो उठाने का प्रयास किया, लेकिन इसमें वे सफल नहीं हो सके। फिर भी पहली दो कोशिशों के दमदार प्रदर्शन की बदौलत रजत पदक उनके नाम रहा।
अशोक मलिक 17 बार के राष्ट्रीय चैंपियन हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तर पर वे पहले भी बढ़िया प्रदर्शन कर चुके हैं। साल 2022 में उन्होंने एशिया ओशिनिया चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। उसी साल हांगझोऊ एशियाई पैरा गेम्स में उन्हें कांस्य पदक मिला। 2026 की एशियाई चैंपियनशिप में भी वे कांस्य पदक जीत चुके हैं।
विश्व स्तर की स्पर्धाओं में भी अशोक ने अपनी छाप छोड़ी है। 2023 में मिस्र में हुए पैरा पॉवरलिफ्टिंग वर्ल्ड कप में उन्होंने रजत पदक जीता। उसके बाद 2024 में पटाया में हुए वर्ल्ड कप में स्वर्ण पदक उनके हिस्से आया, जबकि त्बिलिसी में हुई स्पर्धा में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया।
अशोक हरियाणा के सोनीपत जिले की गोहाना तहसील के मिर्जापुर खेड़ी गांव के रहने वाले हैं। सिर्फ पांच साल की उम्र में उन्हें पोलियो हो गया था, लेकिन इस शारीरिक चुनौती के आगे उन्होंने अपने सपने नहीं छोड़े। दिल्ली में कॉलेज की पढ़ाई के दौरान 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों से उन्हें खेल की प्रेरणा मिली और 2011 में उन्होंने पॉवरलिफ्टिंग शुरू कर दी।
2022 में एशिया ओशिनिया चैंपियनशिप में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना उनके करियर का अहम पड़ाव रहा। लगातार प्रैक्टिस, मेहनत और डटे रहने के बल पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई।
अशोक की जिंदगी में कई मुश्किल मौके आए। 2020 में उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद उनकी मां ने अशोक और उनके भाई की जिम्मेदारी संभाली। इस कठिन दौर में परिवार और दोस्तों ने उनका साथ दिया।
खेल में कामयाबी के लिए जरूरी साज-सामान जुटाने में उनकी मौसी ने बड़ी भूमिका निभाई। कोच जे. पी. सिंह ने उन्हें गाइड किया, जबकि दोस्त विक्रम सिंह मोर ने ट्रेनिंग और खानपान से जुड़ी जरूरतें पूरी करने में मदद की। सबके सहयोग से अशोक का खेल का सफर और मजबूत हुआ, और अब एशियाई पैरा गेम्स का रजत पदक उनकी कामयाबी में एक और सम्मान जोड़ गया है।
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