मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:41 IST

अमरावती जिले के 283 जिला परिषद स्कूलों में खेल का मैदान नहीं, बच्चे खेलें कहां

अमरावती जिले में 1,571 जिला परिषद स्कूल हैं, जिनमें से 1,288 के पास अपना मैदान है और 283 के पास नहीं।

अमरावती जिले के 283 जिला परिषद स्कूलों में खेल का मैदान नहीं, बच्चे खेलें कहां
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

गांव-देहात के बच्चे खेल में आगे आएं और जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाएं, इसके लिए सरकार हर साल खेल विकास की घोषणाएं करती है। लेकिन अमरावती जिले के जिला परिषद स्कूलों की हकीकत इन घोषणाओं को आईना दिखाती है।

जिले में कुल 1,571 जिला परिषद स्कूल हैं। इनमें से 1,288 स्कूलों के पास अपना खेल का मैदान है। बाकी 283 स्कूलों के पास बच्चों के खेलने के लिए अपनी कोई जगह नहीं है। यानी इन स्कूलों के हजारों बच्चों को खेलने के लिए जगह ढूंढनी पड़ रही है और उनके खेल के भविष्य पर सवाल खड़ा हो गया है।

नतीजा यह है कि चाहे खेल का पीरियड हो या स्कूल छूटने के बाद का खेलने का वक्त, बच्चे खेलें तो कहां, यह सवाल शिक्षकों के सामने भी खड़ा है। जिन स्कूलों में मैदान नहीं है, वहां के बच्चों को स्कूल के छोटे से चबूतरे, तंग आंगन, पड़ोस की निजी जगह या गांव की सार्वजनिक खुली जगह का सहारा लेना पड़ता है।

ऐसे में बच्चों के लिए खुलकर दौड़ना, कूदना, प्रैक्टिस करना या मैदानी स्पर्धाएं कराना लगभग नामुमकिन हो जाता है। तस्वीर यह बनती है कि ग्रामीण इलाकों के गुणवान बच्चों को शुरुआत से ही जरूरी खेल सुविधाएं नहीं मिल रहीं।

शिक्षा के अधिकार कानून के मुताबिक प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को मान्यता देते समय कई अहम शर्तें पूरी करनी होती हैं। बच्चों के लिए खेल का मैदान, पीने का पानी, शौचालय और मुख्याध्यापक का दफ्तर जैसी बुनियादी सुविधाओं की नियमित जांच होना अपेक्षित है। फिर भी, जब स्कूलों के पास मैदान ही नहीं है, तब उनकी जांच कैसे होती है और उनकी मान्यता कैसे बनी रहती है, यह सवाल अभिभावक उठा रहे हैं।

अंजनगांव सुर्जी तालुका में खेल सुविधाओं की हालत और भी गंभीर है। यह जिले का अकेला तालुका है, जहां अब तक अपना तालुका खेल संकुल खड़ा नहीं हुआ है। शहर के पास खेल संकुल के लिए जरूरी सरकारी जमीन नहीं मिल रही, इसलिए यह मसला कई साल से अटका पड़ा है। लगातार मांग के बावजूद अब तक कोई ठोस हल नहीं निकला।

एक तरफ ग्रामीण बच्चों में खेल की काबिलियत है, दूसरी तरफ मैदान और खेल सुविधाओं की कमी है। जिन बच्चों को मैदान पर दौड़ने का मौका ही नहीं मिलता, वे राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक कैसे पहुंचेंगे, यह सीधा सवाल अब अभिभावक और खेल प्रेमी पूछ रहे हैं।

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