मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
18:01 IST

अमेरिकी सेना की इराक से पूरी वापसी, 1 अक्टूबर को मनेगा 'सार्वभौमत्व दिन'

करीब दो दशक बाद अमेरिकी सेना ने इराक से अपनी पूरी वापसी पूरी कर ली है।

अमेरिकी सेना की इराक से पूरी वापसी, 1 अक्टूबर को मनेगा 'सार्वभौमत्व दिन'
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

मध्य पूर्व में एक बड़े दौर का अंत हो गया है। अमेरिका ने इराक में अपना सैन्य अभियान आधिकारिक तौर पर पूरी तरह खत्म कर दिया है और बगदाद छोड़ दिया है। करीब दो दशक बाद अमेरिकी सेना इराक से लौटी है। इस वापसी के बाद इराक की सरकार 1 अक्टूबर को आधिकारिक तौर पर 'सार्वभौमत्व दिन' (Sovereignty Day) के रूप में बड़े उत्साह से मनाएगी।

यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब मध्य पूर्व में अमेरिका और इराण के बीच तनाव और जंग जैसे हालात बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय गठबंधन की सेना ने इराक को आतंकी और चरमपंथी गुटों से बचाने में अहम भूमिका निभाई। लेकिन उस पर लगातार यह आरोप भी लगता रहा कि उसकी मौजूदगी से इलाके में तनाव बढ़ा।

इस जंग की शुरुआत 2003 में हुई थी। तब अमेरिका के उस वक्त के प्रशासन और उसके साथियों ने इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन पर 'सामूहिक संहारक हथियार' (Weapons of Mass Destruction) बनाने का गंभीर आरोप लगाया था। इसके बाद अमेरिका ने ब्रिटेन, कनाडा और फ्रांस जैसे नाटो (NATO) सहयोगी देशों की सेना को साथ लेकर इराक पर सीधा हमला बोल दिया। इराकी सेना और अमेरिकी अगुवाई वाले गठबंधन के बीच यह भीषण जंग करीब तीन साल चली। आखिर 30 दिसंबर 2006 को सद्दाम हुसैन को फांसी दी गई और जंग का पहला दौर खत्म हुआ।

सद्दाम हुसैन के जाने के बाद अमेरिकी सेना ने राष्ट्रपति के महलों समेत पूरे इराक में गहन तलाशी ली। इतनी खोजबीन के बाद भी अमेरिका को वहां कोई विनाशकारी या रासायनिक हथियार नहीं मिला।

सद्दाम की मौत के बाद इराक में भारी राजनीतिक और सामाजिक अराजकता फैल गई। हालात काबू में रखने के लिए अमेरिकी सेना ने वहां स्थायी सैन्य अड्डे बनाए और फौज तैनात की। एक वक्त इराक में करीब 1,50,000 अमेरिकी सैनिक तैनात थे।

सद्दाम की सत्ता उखाड़ने के बाद अमेरिकी प्रशासन से एक ऐतिहासिक चूक हुई। उसने यह गलत अंदाजा लगाया कि उस वक्त की इराकी सेना सद्दाम के प्रति ही वफादार रहेगी, और पूरी सरकारी सेना को अचानक भंग कर दिया। इस एक फैसले से करीब 3,50,000 इराकी सैनिक एक रात में बेरोजगार हो गए। नाराज इन सैनिकों ने बाद में 'इस्लामिक स्टेट' (IS) नाम के कुख्यात आतंकी संगठन और दूसरे कट्टर गुटों का दामन थाम लिया। आगे चलकर इन्हीं पूर्व सैनिकों की मदद से आईएसआईएस ने इराक ही नहीं, सीरिया समेत पूरे मध्य पूर्व में भीषण खून-खराबा और आतंकी हमले किए।

2014 में जब इस्लामिक स्टेट ने इराक और सीरिया के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया, तो उसे रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन की सेना दोबारा इराक में उतरी। 2017 में इराक में और 2019 में सीरिया में आईएसआईएस की इलाकाई हार हुई। फिर भी संगठन के बचे-खुचे छिपे गुटों को खत्म करने के लिए गठबंधन की सेना इराक में ही डटी रही।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 2024 में अपने कार्यकाल के दौरान बगदाद से अमेरिकी सेना को चरणबद्ध तरीके से हटाने के ऐतिहासिक समझौते पर दस्तखत किए थे। इसी तय समय-सारणी और समझौते के मुताबिक अमेरिकी सेना ने 30 सितंबर 2026 को इराक से अपनी पूरी वापसी पूरी कर ली।

इराकी प्रशासन का मानना है कि विदेशी गठबंधन की सेना के लौटने से अब स्थानीय चरमपंथी गुटों के पास हथियार रखने या हिंसा करने का कोई बहाना नहीं बचेगा। इस साल सत्ता में आए इराक के नए प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने ऐलान किया कि अमेरिकी सेना के जाने के बाद का पहला दिन, यानी 1 अक्टूबर, 'सार्वभौमत्व दिन' के रूप में मनाया जाएगा। इराक की कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के प्रमुखों ने इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि यह राष्ट्रीय मौका इराक के पूरे स्वावलंबन का प्रतीक है।

फिलहाल प्रधानमंत्री अल-जैदी की सरकार अलग-अलग विद्रोही और हथियारबंद गुटों से हथियार सौंपने की अपील कर रही है। शुरू में 30 सितंबर की आखिरी तारीख दी गई थी, लेकिन हथियारों के नियमन पर बातचीत चलने की वजह से वह मियाद वापस ले ली गई है। कई ताकतवर गुटों ने हथियार डालने से इनकार कर दिया है, फिर भी वरिष्ठ नेता बीच-बचाव करके शांति कायम करने की कोशिश में लगे हैं।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे