अलग-अलग जरूरतों के लिए अलग बैंक खाते रखने से पैसों का हिसाब आसान होता है
सैलरी, खर्च और आपातकालीन फंड के लिए अलग खाते रखने से बजट पर नजर रखना आसान होता है।
कमाई का सारा पैसा एक ही खाते में रखना कई लोगों की आदत होती है, लेकिन अलग-अलग जरूरतों के लिए अलग खातों में पैसा रखना एक अच्छा आर्थिक तरीका हो सकता है। अलग बैंक खाते रखने से जरूरी खर्च, रोजमर्रा की जरूरतें और आपातकालीन फंड एक-दूसरे से अलग रहते हैं।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि एक तरफ बजट पर नजर रखना आसान हो जाता है। दूसरी तरफ, अचानक आने वाली जरूरतों के समय होने वाला खर्च बचाकर बचत की जा सकती है। आइए जानते हैं कि अलग-अलग मकसद के लिए बैंक खातों का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।
पूरी सैलरी एक ही खाते में पड़ी रहे तो अक्सर यह समझना मुश्किल हो जाता है कि कितना पैसा खर्च करना है और कितना बचाना है। इसीलिए अपनी जरूरत के हिसाब से अलग खाते रखे जा सकते हैं।
पहला है सैलरी खाता। आपकी सैलरी इसी खाते में आती है और यहीं से आप किराया, ईएमआई, बिजली और पानी जैसे जरूरी खर्च चुका सकते हैं। इससे हर महीने के तय खर्च का हिसाब रखना आसान हो जाता है।
दूसरा है खर्च खाता। महीने भर के मनोरंजन, बाहर खाने, खरीदारी और दूसरे गैर-जरूरी खर्चों के लिए अलग खाता रखें। इसमें एक तय रकम पहले से डाल दें और पूरा महीना उसी सीमा के अंदर चलाएं।
तीसरा है आपातकालीन फंड खाता। अचानक आने वाले खर्चों के लिए अलग फंड बनाएं। इसे रोज के खर्च के हिसाब से अलग रखना बेहतर है।
आपातकालीन फंड में कितनी रकम रखनी चाहिए, इस पर आम तौर पर सलाह दी जाती है कि यह 3 से 6 महीने के जरूरी खर्च जितना हो। अगर आपकी नौकरी या आमदनी स्थिर नहीं है, तो इससे ज्यादा रकम रखना भी फायदेमंद हो सकता है। साथ ही, परिवार की जिम्मेदारियां और कर्ज बढ़ने पर आपातकालीन फंड की जरूरत भी बढ़ सकती है।
अब सवाल यह कि आपातकालीन फंड का पैसा कहां रखा जाए। इस फंड का मुख्य मकसद यह है कि जरूरत पड़ते ही पैसा तुरंत मिल जाए। इसलिए पूरी रकम एक ही जगह रखने के बजाय उसे ऐसी जगह रखें जहां से पैसे निकालने में ज्यादा वक्त या ज्यादा शुल्क न लगे। कुछ रकम बचत खाते में रखें और कुछ ऐसी एफडी में रखी जा सकती है, जहां जरूरत पड़ने पर रकम निकालने की सुविधा हो।