'अलबत्या गलबत्या' नाटक १००० प्रयोगों की दहलीज पर, गीतों का विशेष कार्यक्रम २८ सितंबर को
अद्वैत थिएटर का लोकप्रिय बालनाट्य अब 1000 प्रयोगों की तरफ बढ़ रहा है, और गडकरी रंगायतन में गीतों का खास अनावरण होगा है
चिन्मय मांडलेकर के डायरेक्शन में बना और अद्वैत थिएटर का बनाया हुआ मशहूर बालनाट्य 'अलबत्या गलबत्या' अब १००० प्रयोगों की तरफ बढ़ रहा है। यह नाटक करीब ५० साल पहले दिवंगत साहित्यकार रत्नाकर मतकरी ने लिखा था, और तब से यह बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी पसंद आता रहा है। मराठी बालरंगभूमी पर इस नाटक ने कई रिकॉर्ड बनाए हैं।
सिर्फ ३६५ दिनों में इस नाटक ने ३३३ प्रयोग हाउसफुल किए हैं, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है। ऐसा भी हुआ है कि एक ही दिन में चार, पांच, और एक बार तो एक ही टीम ने पूरे छह प्रयोग किए। साल २०२४ की जानकारी के मुताबिक कोविड के दौर को छोड़कर छह साल में इस नाटक ने ८०० प्रयोगों का आंकड़ा पार कर लिया था, और तभी से यह १०००वें प्रयोग की तरफ बढ़ रहा है।
'अलबत्या गलबत्या' सिर्फ बच्चों का मनोरंजन करने वाला नाटक नहीं है, बल्कि इसके जरिए बच्चों की पर्सनालिटी को निखारने के साथ-साथ उन्हें मराठी भाषा के संस्कार भी मिलते हैं, ऐसा बताया जा रहा है। नाटक के गाने भी दर्शकों को खासे पसंद आए हैं। कहानी की रोचकता, गाने और स्टेज पर होने वाला मनोरंजन, इन सब वजहों से यह नाटक बच्चों के दिलों में खास जगह बना चुका है।
इस नाटक के गाने चिन्मय मांडलेकर, रत्नाकर मतकरी, समृद्धी पांडे, संचित गायकवाड और संस्कारी ने लिखे हैं। इन गानों को आवाज दी है अवधूत गुप्ते, वैशाली सामंत और नाटक में काम करने वाले बाल कलाकारों ने। अब यह गाने बच्चों के लिए अलग से भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
इन गानों के संगीत का अनावरण सोमवार, २८ सितंबर को ठाणे के गडकरी रंगायतन में होगा। सुबह ८ से १०.३० बजे तक होने वाले नाटक के प्रयोग के बाद यह खास कार्यक्रम रखा गया है।
इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के प्रशासक विद्याधर अनास्कर और बालरंगभूमी परिषद की अध्यक्षा नीलम शिर्के मुख्य मेहमान के तौर पर मौजूद रहेंगी। इन्हीं के हाथों 'अलबत्या गलबत्या' के गानों का अनावरण किया जाएगा।
१००० प्रयोगों की तरफ बढ़ रहे 'अलबत्या गलबत्या' के इस सफर में गानों के अनावरण से एक और अहम पड़ाव जुड़ जाएगा। करीब पांच दशकों से दर्शकों का मनोरंजन कर रहे इस बालनाट्य का यह सफर मराठी रंगभूमी के लिए भी खास माना जा रहा है।